Module 6   ऑप्शन स्ट्रैटेजीChapter 6

सिंथेटिक लॉन्ग और आर्बिट्राज

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6.1 – भूमिका

अगर आपको निफ़्टी फ्यूचर्स की एक ही एक्सपायरी सीरीज में लॉन्ग पोजीशन और शार्ट पोजीशन दोनों बनानी हो तो? आप इसे कैसे करेंगे और ऐसा करने की वजह क्या हो सकती है? 

इस अध्याय में हम इन्हीं दोनों सवालों का जवाब देंगे। तो पहले यह समझते हैं कि इसको कैसे करना चाहिए और आगे यह समझेंगे कि कोई इसको क्यों करना चाहेगा (वैसे इसका सबसे सीधा जवाब है कि आर्बिट्राज करने के लिए)। 

अब तक आपको समझ में आ गया होगा कि ऑप्शंस एक बहुत ही वर्सेटाइल डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट (versatile derivative instrument) है यानी इसके जरिए बहुत सारी चीजें की जा सकती हैं। आप इनका इस्तेमाल कर के किसी भी तरीके का पे ऑफ स्ट्रक्चर बना सकते हैं इनपेऑफ में फ्यूचर्स भी एक है (लॉन्ग और शार्ट फ्यूचर दोनों तरह के पे ऑफ) 

इस अध्याय में हम समझेंगे कि कैसे ऑप्शन का इस्तेमाल करके एक बनावटी यानी आर्टिफिशियल लॉन्ग फ्यूचर पे ऑफ बनाया जा सकता है। लेकिन ऐसा करने के पहले एक बार लॉन्ग फ्यूचर के लीनियर पे ऑफ पर यहां नजर डाल लेते हैं। here

नहीं तो आप इसे भी देख सकते हैं।

जैसा कि आप देख सकते हैं कि लॉन्ग फ्यूचर पोजीशन 2360 पर शुरू की गई है और इस जगह पर ना तो आप पैसे बना रहे हैं और ना ही पैसे गंवा रहे होंगे। इसलिए जहां पर आपने पोजिशन बनाई है वह आपका ब्रेक इवन प्वाइंट है। अगर फ्यूचर आपके ब्रेक इवन प्वाइंट से ऊपर जाता है तो आप पैसे बनाएंगे और अगर फ्यूचर आपके ब्रेक इवन प्वाइंट के नीचे जाता है तो आपको घाटा सहना पड़ेगा। 10 प्वाइंट ऊपर जाने पर आप जितना मुनाफा कमाएंगे एकदम उतना ही घाटा 10 प्वाइंट नीचे जाने पर भी उठाएंगे। इस तरह के लीनियर पे ऑफ की वजह से  फ्यूचर को लीनियर इंस्ट्रूमेंट भी कहते हैं। 

सिंथेटिक लॉन्ग बनाने के लिए ऑप्शन का इस्तेमाल करते हुए इसी तरीके का लॉन्ग फ्यूचर्स तैयार किया जाता है। 

6.2 – स्ट्रैटेजी से जुड़ी बातें

सिंथेटिक लॉन्ग बनाना काफी आसान है, बस इसमें 

  1. एक ATM कॉल ऑप्शन को खरीदना होता है 
  2. एक ATM पुट ऑप्शन को बेचना होता है। 

जब आप ऐसा करें तो ध्यान रखें कि 

  1. सभी ऑप्शन एक ही अंडरलाइंग से जुड़े हुए हों 
  2. एक ही एक्सपायरी सीरीज के हों 

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि निफ्टी 7389 पर है मतलब 7400 की स्ट्राइक ATM होगी। सिंथेटिक लॉन्ग बनाने के लिए हमें 7400 CE  पर लॉन्ग जाना होगा, इसका प्रीमियम होगा 107 और साथ ही हमें 7400 PE को 80 पर शार्ट करना होगा। 

दोंनो प्रीमियम का अंतर नेट कैश प्लो होगा यानी 107 – 80 = 27

आइए कुछ परिस्थितियों पर नजर डालते हैं 

स्थिति 1 –  बाजार की एक्सपायरी 7200 पर होती है (ATM से नीचे) 

7200 पर 7400 CE वर्थलेस हो कर एक्सपायर होगा। इसलिए हम दिया हुआ प्रीमियम, 107 गंवा देंगे। जबकि 7400 PE की इंट्रिन्सिक वैल्यू होगी, इसे निकालने के लिए- 

पुट ऑप्शन की इंट्रिन्सिक वैल्यू –

Max [strike – spot, 0]

Max [7400 -7200,0]

= Max [200,0]

= 200

क्योंकि हमने इस ऑप्शन को शॉर्ट किया (बेचा) है, इसलिए हमें जो प्रीमियम मिला है उसे खो देंगे। हमारा घाटा होगा – 

80 – 200 = – 120

लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन का कुल पे ऑफ होगा – 

= -107 – 120 

= – 227

स्थिति 2 – बाजार की एक्सपायरी 7400 पर होती है (ATM पर) 

अगर बाजार की एक्सपायरी 7400 पर होती है तो दोंनो ही ऑप्शन वर्थलेस एक्सपायर होंगे, इसलिए-

  1. 7400 CE के लिए दिया गया प्रीमियम 107 हम खो देंगे।
  2. 7400 PE का प्रीमियम यानी 80 हमें मिल जाएगा।
  3. दोनों पोजीशन का नेट पे ऑफ होगा -27 क्योंकि 80 -107 = -27

यहां ध्यान रखिए कि इस स्ट्रैटेजी का नेट कैश आउट फ्लो भी 27 ही है और दोनों प्रीमियम का अंतर भी उतना ही है।

स्थिति 3 – बाजार की एक्सपायरी 7427 पर होती है (ATM + दोनों प्रीमियम के अंतर पर)

7427 वास्तव में एक रोचक स्तर है, ये इस स्ट्रैटेजी का ब्रेक इवन है, जहां हम ना तो पैसे बनाएंगे और ना ही पैसे गंवाएंगे। 

  1. 7400 CE – ये एक ITM ऑप्शन है और इसकी इंट्रिन्सिक वैल्यू है 27 । लेकिन हमने 107 का प्रीमियम दिया है इसलिए हमें 80 का नुकसान होगा।   
  2. 7400 PE – ये ऑप्शन OTM हो कर एक्सपायर होगा इसलिए इसका प्रीमियम यानी 80 हमें अपने पास रखने मिल जाएगा।
  3. इस तरह, हम 80 बनाएंगे और 80 ही गंवा भी रहे हैं, इसीलिए 7427 ही इस स्ट्रैटेजी का ब्रेक इवन है।

 स्थिति 4-  बाजार की एक्सपायरी 7600 पर होती है (ATM के ऊपर) 

7600 पर 7400 CE की इंट्रिन्सिक वैल्यू होगी 200 और हम कमाएंगे – 

इंट्रिन्सिक वैल्यू – प्रीमियम

= 200 – 107 

= 93

7400 PE वर्थलेस एक्सपायर होंगा इसलिए इसका प्रीमियम यानी 80 हमें अपने पास रखने को मिल जाएगा।

इस तरह से स्ट्रैटेजी का कुल पे ऑफ होगा

= 93 + 80 

= 173

इन चार स्थितियों के आधार पर अन्य हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं की जब बाजार ऊपर जाता है तो इस स्ट्रैटेजी में पैसे बनते हैं और जब बाजार नीचे जाता है तो पैसे डूबते हैं, ठीक वैसे ही, जैसे कि फ्यूचर्स में होता है। लेकिन अभी भी इसका यह मतलब नहीं है कि इसमें पे ऑफ फ्यूचर्स की तरह का होगा। सिंथेटिक लॉन्ग का पे ऑफ भी फ्यूचर के पे ऑफ की तरह ही काम कर रहा है यह जानने के लिए हमें इस स्ट्रैटेजी के पे ऑफ को ब्रेक इवन प्वाइंट के नजरिए से देखना होगा। मान लीजिए कि ब्रेक इवन प्वाइंट से 200 प्वाइंट ऊपर और नीचे। अगर इन दोनों जगहों पर पे ऑफ बराबर है तो इसका मतलब है कि इस यह पे ऑफ एक लीनियर पे ऑफ है, जो कि फ्यूचर्स की तरह का ही है। 

आइए देखते हैं –  

हमें पता है कि इसका ब्रेक इवन प्वाइंट है – 

ATM + दोनों प्रीमियम का अंतर

= 7400 + 27

= 7427

इस जगह पर पे ऑफ दोनों तरफ से एक जैसा दिखना चाहिए यानी सिमेट्रिक होना चाहिए। हम 7427 + 200 = 7627 और 7427 – 200 = 7227 को जांचते है।

7627 पर 

  1. 7400 CE की इंट्रिन्सिक वैल्यू होगी 227 । इसलिए हम 227 – 107 = 120 कमाएंगे। 
  2. 7400 PE वर्थलेस एक्सपायर होंगा इसलिए इसका प्रीमियम यानी 80 हमें अपने पास रखने को मिल जाएगा।
  3. इस तरह, कुल मिला कर पे ऑफ होगा 120 + 80 =  200 
  4. 7400 CE की कोई इंट्रिन्सिक वैल्यू नहीं होगी। इसलिए हमने जो 107 का प्रीमियम दिया है वो हम गंवा देंगे। 
  5. 7400 PE की इंट्रिन्सिक वैल्यू होगी 7400 -7227 = 173 इसलिए हमें इसका प्रीमियम 80 मिला है इसलिए कुल नेट घाटा होगा 80 – 173 = -93  
  6. इस तरह, कुल मिला कर पे ऑफ होगा -93 – 107 = – 200 

तो साफ है कि ब्रेक इवन पर पे ऑफ में सिमेट्री है और इस वजह कहा जा सकता है कि सिंथेटिक लॉन्ग का पे ऑफ भी फ्यूचर के पे ऑफ की तरह का ही है।

एक्सपायरी के अलग अलग स्तर पर पे ऑफ को नीचे दिखाया गया है।

जब आप नेट पे ऑफ को एक ग्राफ पर डालते हैं तो ये लॉन्ग कॉल फ्यूचर्स की तरह ही दिखता है।

सिंथेटिक लॉन्ग कैसे बनाया जाए यह हम अब समझ चुके हैं। अब यह समझना बाकी है कि किस खास स्थिति में सिंथेटिक लॉन्ग को बनाने की जरूरत पड़ती है।

6.3 – द फिश मार्केट आर्बिट्राज (The Fish Market Arbitrage)

मैं यहां यह मान ले रहा हूं कि आप आर्बिट्राज के बारे में कुछ जानते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, आर्बिट्राज एक ऐसा मौका है जब आप किसी वस्तु को सस्ते में बाजार से खरीदते हैं और बाद में उसी को महंगे दाम पर बेचते हैं और दोनों कीमतों के बीच में मिलने वाला अंतर ही आपकी कमाई बनता है। अगर ठीक से किया जाए तो आर्बिट्राज का सौदा हमेशा बिना रिस्क का होता है। एक साधारण से उदाहरण से आपको समझाने की कोशिश करता हूं।

मान लीजिए आप समुद्र के किनारे के किसी शहर में रहते हैं जहां पर ताजी मछलियां बहुत आसानी से मिलती हैं। आपके शहर में मछली की कीमत काफी कम है मान लीजिए ₹100 किलोग्राम। आपके शहर से 125 किलोमीटर दूर एक और शहर है, जहां पर ताजी मछलियों की काफी मांग है। लेकिन वहां पर यही मछली ₹150 किलोग्राम पर बिकती है। 

ऐसी हालत में, अगर आप अपने शहर में ₹100 प्रति किलो पर मछली खरीद सकें और उसी मछली को पास वाले शहर में ₹150 प्रति किलो पर बेच सकें तो इस तरीके से आप हर किलोग्राम मछली पर ₹50 कमा सकते हैं जो कि दोनों कीमतों का अंतर है। मान लीजिए कि मछली को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में आपको कुछ पैसे खर्च करने पड़ते हैं और आपको पास 50 की जगह सिर्फ ₹30 की ही कमाई होती है। लेकिन फिर भी यह एक अच्छा सौदा है। यह मछली के बाजार में एक आर्बिट्राज का नमूना है।

जरा सोचिए अगर हर दिन आप अपने शहर से ₹100 प्रति किलो पर मछली खरीद सकें और उसको पास के शहर में ₹150 प्रति किलो पर बेच सकें और ₹20 का खर्च काटने के बाद ₹30 प्रति किलो की कमाई कर सकें, तो इससे अच्छा क्या हो सकता है। आपके पास बिना रिस्क मुनाफा कमाने की गारंटी है।

अगर सब कुछ ऐसे ही चले तो कोई भी रिस्क नहीं है, लेकिन अगर चीजें बदलती है और तब आपका मुनाफा भी बदलेगा। ऐसी ही कुछ चीजों पर नजर डालते हैं जो बदल सकती हैं – 

  1. मछली ना हो (अपॉर्चुनिटी यानी मौके का रिस्क) – मान लीजिए एक दिन जब आप ₹100 प्रति किलो पर मछली खरीदने बाजार जाते हैं और वहां जाकर आपको पता चलता है कि आज बाजार में मछली ही नहीं है। तो आपके पास ₹30 कमाने का मौका नहीं होगा। 
  2. खरीदार ना होना (लिक्विडिटी यानी खरीदार ना होने का रिस्क) – आप ₹100 प्रति किलो पर मछली खरीदते हैं और बगल के शहर में जाते हैं ताकि आप उस मछली को ₹150 पर बेच सकें। लेकिन जब आप वहां पहुंचते हैं तो आपको पता चलता है कि मछली के लिए कोई खरीदार नहीं है। आपके पास सिर्फ मरी हुई मछलियां बचती हैं जिसकी कोई कीमत नहीं रह जाती। 
  3. सही कीमत न मिले (कीमत (बैड बारगेनिंग) का रिस्क यानी एग्जीक्यूशन रिस्क) – आर्बिट्राज के मौके का यह पूरा कारोबार इस बात पर टिका हुआ है कि आप हर बार ₹100 पर मछली खरीद पाएंगे और उसे ₹150 पर बेच पाएंगे। लेकिन मान लीजिए किसी दिन आपको मछली 110 पर खरीदनी पड़े और 140 पर बेचना पड़े और वहां तक पहुंचने के लिए आपको ₹20 खर्च भी करने पड़े तो इसका मतलब होगा कि आम तौर पर ₹30 कमाने की जगह आप सिर्फ ₹10 कमा पाएंगे। अगर ऐसा ही कुछ समय तक चलता रहा तो आर्बिट्राज का यह मौका आपके लिए आकर्षक नहीं रह जाएगा और हो सकता है कि आगे से आप इसे ना करना चाहें।
  4. मछली की ढुलाई महंगा हो जाए ( ट्रांजैक्शन यानी सौदे की कीमत बढ़ जाने का रिस्क) –  आर्बिट्राज के मौके के मैं मुनाफा कमाने के लिए मछली की ढुलाई कीमत का स्थिर रहना बहुत ही जरूरी है। मान लीजिए कि ढुलाई ₹20 से बढ़कर ₹30 हो जाती है तो आर्बिट्राज का आकर्षण कम हो जाएगा और अगर ढुलाई बढ़ती गई तो फिर इस आर्बिट्राज में कमाई कम होती जाएगी। इसीलिए इस सौदे की कीमत कारोबार में मुनाफा कमाने के लिए एक जरूरी चीज है। 
  • बाजार में कम्पीटीशन का आ जाना (कौन सस्ते में बेच सकता है) – हम एक कम्पीटीशन वाली दुनिया में रहते हैं। ऐसे में कुछ और लोग भी आ सकते हैं जो बिना रिस्क के ₹30  कमाना चाहते हैं। जरा सोचिए –  
  • अब तक केवल आप ये काम कर रहे थे कि ₹100 पर मछली खरीद कर ₹150 पर बेच रहे थे। 
  • आपके दोस्त ने देखा कि आप एक बिना रिस्क वाला मुनाफा कमा रहे हैं और वह भी आपकी तरह ही यह काम करना चाहता है, आप उसको रोक नहीं सकते। 
  • अब आप दोनों ₹100 पर मछली खरीद रहे हैं ₹20 उसकी ढुलाई पर खर्च कर रहे हैं और पास के शहर में मछली को बेचने की कोशिश में लगे हैं।  
  • एक खरीदार आता है और देखता है कि अब यहां पर दो मछली बेचने वाले हैं और दोनों एक ही तरीके की मछली बेच रहे हैं । अब आप दोनों में से कौन उस खरीदार को मछली बेच पाएगा?
  • अब आप दोनों के पास एक ही तरीके की मछली है। इसलिए खरीदार देखेगा कि कौन उसको सस्ते में मछली दे रहा है। अब मान लीजिए कि आप चाहते हैं कि आपकी मछली बिके, तो आप अपनी कीमत ₹145 कर देंगे। 
  • अगले दिन आपका दोस्त भी यही तरीका अपनाता है और मछली को ₹140 प्रति किलो पर बेचना शुरू कर देता है। इससे एक तरीके की प्राइस वॉर शुरू हो जाएगी और धीरे-धीरे कीमतें गिरती जाएंगी और दोनों के लिए आर्बिट्राज का यह मौका खत्म होता जाएगा। 
  • कीमतें कितनी गिर सकती हैं? साफ है कि ₹120 तक कीमत गिर सकती है क्योंकि मछली खरीदने और उसको यहां तक ढो कर लाने की कीमत इतनी ही है। 120 के नीचे इस धंधे या कारोबार को करने का कोई मतलब ही नहीं बनता। 
  • इस तरह से कम्पीटीशन के कारण बाजार में यह आर्बिट्राज का मौका धीमे-धीमे खत्म हो जाता है। अब उस बगल के शहर में भी मछली ₹120 प्रति किलो पर मिलने लगती है। 

मुझे उम्मीद है कि अब आपको आर्बिट्राज के बारे में कुछ हद तक समझ में आ गया होगा। वास्तव में आर्बिट्राज के किसी भी मौके को एक गणित के फार्मूले के तौर पर भी दिखाया जा सकता है। अगर अपने मछली वाले उदाहरण को एक गणित के फार्मूले में दिखाना हो तो 

[शहर B में मछली को बेचने का खर्च शहर A में मछली को खरीदने का खर्च] = 20

जब इस फार्मूले में असंतुलन बना रहता है तब तक वहां पर आर्बिट्राज का मौका बना रहता है। चाहे वह किसी भी तरीके का बाजार हो, मछली बाजार, कृषि बाजार, मुद्रा बाजार या फिर शेयर बाजार। ऐसे आर्बिट्राज के मौके वहां पर मौजूद होते हैं और वे मौके गणित के सीधे फार्मूले पर आधारित होते हैं।

6.4 – ऑप्शन आर्बिट्राज

आर्बिट्राज का मौका हर तरीके के बाजार में होता है, बस आपको एक पैनी नजर रखनी पड़ती है और बाजार में जब ऐसा मौका आए तो उसे पहचान कर वहां से फायदा कमाना होता है। आमतौर पर शेयर बाजार में आर्बिट्राज के मौके आपको एक निश्चित सीमा तक मुनाफा कमाने का अवसर देते हैं। इसमें कम लेकिन गारंटी सहित मुनाफा होता है। इस मुनाफे पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ता कि बाजार किस तरफ जा रहा है। इसीलिए बाजार में रिस्क से डरने वाले के कारोबारियों के लिए आर्बिट्राज बहुत ही पसंदीदा सौदा होता है। 

मैं यहां पर एक सीधे सादे आर्बिट्राज के मामले पर चर्चा करना चाहता हूं जो कि पुट कॉल पैरिटी पर आधारित है। मैं पुट कॉल पैरिटी के बारे में विस्तार से आपको नहीं समझाउंगा, सीधे अपने उदाहरण पर जाऊंगा। 

लेकिन अगर आप पुट कॉल पैरिटी को समझना चाहते हैं तो खान एकेडमी के इस वीडियो को देख सकते हैं 

https://youtu.be/m4mrd7sHCPM

तो, पुट कॉल पैरिटी पर आधारित आर्बिट्राज का समीकरण ऐसा होगा 

लॉन्ग सिंथेटिक लॉन्ग + शॉर्ट फयूचर्स =

इसे आप और विस्तार दे सकते हैं 

लॉन्ग ATM कॉल + शॉर्ट ATM पुट + शॉर्ट फ्यूचर्स = 0

इस समीकरण से दिखता है कि अगर आप सिंथेटिक लॉन्ग को होल्ड करते हैं और फ्यूचर को शार्ट करते हैं तो फिर एक्सपायरी के समय आपका P&L  जीरो होगा। इस पोजीशन में नतीजा जीरो क्यों निकलता है, इसका जवाब पुट कॉल पैरिटी में छुपा है।

लेकिन अगर इस समीकरण P&L  में जीरो की जगह कोई भी और संख्या आती है तो इसका मतलब है कि वहां पर एक आर्बिट्राज का मौका है। 

इसको अच्छे से समझने के लिए नीचे के उदाहरण पर नजर डालिए –

21 जनवरी को निफ्टी स्पॉट 7304 था और निफ्टी फ्यूचर्स 7316 पर 

7300 CE और  PE (ATM ऑप्शन) 79.5 और 73.85 पर ट्रेड कर रहे हैं। ध्यान दीजिए कि ये सभी कॉन्ट्रैक्ट जनवरी 2016 सीरीज के हैं।

ऊपर बताए गए आर्बिट्राज के समीकरण के आधार पर ट्रेड करें तो पोजीशन ऐसे बनेगी

  1. लॉन्ग 7300 CE @ 79.5
  2. शार्ट 7300 PE @ 73.85
  3. शॉर्ट निफ्टी फ्यूचर्स @ 7316

ध्यान दीजिए कि पहली दो पोजीशन से लॉन्ग सिंथेटिक लॉन्ग बन रहा है। अब आर्बिट्राज के समीकरण के आधार पर एक्सपायरी पर पोजीशन का P&L  जीरो होगा। आइए देखते हैं कि ये सच साबित होता है कि नहीं

स्थिति 1 –  बाजार की एक्सपायरी 7200 पर होती है

  • 7300 CE वर्थलेस हो कर एक्सपायर होगा। इसलिए हम दिया हुआ प्रीमियम, 79.5 गंवा देंगे। 
  • 7300 PE की इंट्रिन्सिक वैल्यू 100 होगी, लेकिन हम इस पर 73.85 पर शॉर्ट हैं पे ऑफ होगा  73.85 – 100 = – 26.15
  • हम निफ्टी फ्यूचर्स पर @ 7316 पर शॉर्ट हैं इसलिए हमें 116 प्वाइंट का फायदा होगा (7316 -7200 = 116)
  • कुल यानी नेट पा ऑफ होगा -79.5 – 26.15 + 116 = + 10.35

साफ है कि 0 पे ऑफ की जगह हमें P&L  में एक पॉजिटिव संख्या मिल रही है।

स्थिति 2 – बाजार की एक्सपायरी 7300 पर होती है 

अगर बाजार की एक्सपायरी 7400 पर होती है तो दोंनो ही ऑप्शन वर्थलेस एक्सपायर होंगे, इसलिए-

    1. 7300 CE वर्थलेस एक्सपायर होगा इसलिए दिया गया प्रीमियम 79.5 हम खो देंगे।
    2. 7400 PE वर्थलेस एक्सपायर होगा इसलिए इसका प्रीमियम यानी 73.85 हमें मिल जाएगा।
    3. हम निफ्टी फ्यूचर्स पर 7316 पर शॉर्ट हैं इसलिए हमें 16 प्वाइंट का फायदा होगा (7316 -7300 = 16)
  • नेट पे ऑफ होगा  – 79.5 + 73.85 + 16 + 10.35

स्थिति 3 – बाजार की एक्सपायरी 7400 पर होती है 

    1. 7300 CE की इंट्रिन्सिक वैल्यू 100 होगी इसलिए इसका पे ऑफ होगा 100 – 79.5 =  20.5
    2. 7300 PE वर्थलेस एक्सपायर होगा इसलिए इसका प्रीमियम यानी 73.85 हमें मिल जाएगा।
    3. हम निफ्टी फ्यूचर्स पर 7316 पर शॉर्ट हैं इसलिए हमें 84 प्वाइंट का नुकसान होगा(7316 -7400 = -84)
  • नेट पे ऑफ होगा  20.5 + 73.85 -84 + 10.35

आप से किसी भी एक्सपायरी के लिए जांच सकते हैं (भले ही बाजार किसी भी दिशा में जा रहे हों), हर जगह एक्सपायरी पर आपको 10.35 कमाने का मौका मिलेगा। मैं फिर से दोहरा देता हूं कि एक्सपायरी पर 10.35 कमाने का मौका मिलेगा।  

अलग अलग एक्सपायरी को पे ऑफ को आप नीचे देख सकते हैं

सब कुछ बढ़िया लग रहा है, लेकिन एक मुश्किल आ सकती है,

सौदे पर होने वाला खर्च 

आपको यह देखना होगा कि यह ट्रेड करने के लिए आपको कितने पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं और क्या उस खर्च के बाद भी होने वाला मुनाफा आपको इस ट्रेड को करने के लिए सही लग रहा है। इन चीजों पर ध्यान दीजिए 

  • ब्रोकरेज –  अगर आप एक साधारण ब्रोकर के साथ ये ट्रेड कर रहे हैं तो आपको अपने ट्रेड का एक निश्चित प्रतिशत ब्रोकरेज के तौर पर देना पड़ेगा जो कि आपके मुनाफे में से ही निकलेगा। तो अगर आप 10 प्वाइंट का मुनाफा कमा रहे हैं तो हो सकता है कि आपको 8 से 10 प्वाइंट का ब्रोकरेज भी देना पड़े। लेकिन अगर आप यह ट्रेड ज़ेरोधा जैसे डिस्काउंट ब्रोकर के साथ कर रहे हैं तो इसके लिए आपका ब्रेक इवन चार से पांच प्वाइंट का ही होगा। इसलिए भी ज़ेरोधा के साथ अकाउंट खोलना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। 
  • एसटीटी (STT) – याद रखिए कि P&L  एक्सपायरी के बाद ही समझ में आती है। इसका मतलब है कि आपको अपनी पोजीशन को एक्सपायरी तक ले जाना पड़ेगा। अगर आप एक ITM ऑप्शन पर लॉन्ग है तो  एक्सपायरी पर आपको एक अच्छी खासी रकम एसटीटी के तौर पर देनी पड़ेगी। यह रकम भी आपके मुनाफे में से ही निकलेगी। 
  • दूसरे टैक्स-  इसके अलावा आपको सर्विस टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी आदि भी देना पड़ेगा। 

तो इन सब खर्चों को देखने के बाद, 10 पॉइंट के आर्बिट्राज का फायदा उठाने की कोशिश बहुत आकर्षक नहीं लगेगी। लेकिन अगर पे ऑफ 15 या 20 प्वाइंट का हो और आप एसटीटी से बचने के लिए अपनी पोजीशन को एक्सपायरी के ठीक पहले स्क्वेयर ऑफ कर सकें (कुछ और प्वाइंट इसकी वजह से कम हो जाएंगे) तो आप एक ठीक-ठाक मुनाफा कमा सकते हैं। 

इस अध्याय की मुख्य बातें 

  1. आप ऑप्शन का इस्तेमाल फ्यूचर्स के पे ऑफ के जैसा पे ऑफ बनाने के लिए भी कर सकते हैं।
  2. एक सिंथेटिक लॉन्ग किसी भी लॉन्ग फ्यूचर के पे ऑफ जैसा पे ऑफ तैयार कर सकता है। 
  3. एक साथ ATM कॉल को खरीद और ATM कॉल को बेच कर एक सिंथेटिक लॉन्ग बनाया जाता है।
  4. सिंथेटिक लॉन्ग का ब्रेक इवन प्वाइंट होता है ATM स्ट्राइक + दिया गया नेट प्रीमियम 
  5. अगर सिंथेटिक लॉन्ग + शार्ट फ्यूचर मिल कर एक्सपायरी के समय जीरो के अलावा कोई भी एक पॉजिटिव संख्या दिखाते हैं, तो वहां पर आर्बिट्राज का मौका बनता है। 
  6. आर्बिट्राज का ट्रेड तभी करें जब आपको लगे कि एक्सपायरी पर हर तरीके के खर्च निकालने के बाद आपको कुछ अच्छा मुनाफा होगा।

4 comments

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  1. Vivek Kumar Jaiswal says:

    How to calculate STT and other taxes?

  2. DJ says:

    Please check ✅ situation 2 , when market closes at 7300.
    Thank u…

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