Module 6   ऑप्शन स्ट्रैटेजीChapter 11

शॉर्ट स्ट्रैडल

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11.1 – संदर्भ

पिछले अध्याय में हमने जाना कि लॉन्ग स्ट्रैडल में मुनाफा कमाने के लिए हमें कुछ चीजों को अपने पक्ष में करना पड़ता है। एक बार उन चीजों पर फिर से नजर डाल लेते हैं – 

  1. स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते समय वोलैटिलिटी को नीचे होना चाहिए 
  2. स्ट्रेटजी की होल्डिंग अवधि में वोलैटिलिटी को ऊपर जाना चाहिए 
  3. बाजार में एक बड़ी चाल आनी चाहिए, भले ही किसी भी दिशा में हो 
  4. बाजार की यह चाल एक निश्चित अवधि में आनी चाहिए यानी जल्दी और एक्सपायरी के पहले होनी चाहिए 
  5. लॉन्ग स्ट्रैडल का इस्तेमाल बाजार की किसी बड़ी घटना के आसपास होना चाहिए और इस घटना का नतीजा उससे बिल्कुल अलग होना चाहिए जैसा कि बाजार उम्मीद कर रहा है

यह सच है कि लॉन्ग स्ट्रैडल में बाजार की चाल की दिशा का कोई असर नहीं होता लेकिन यहां पर पैसे कमाना इतना आसान नहीं होता खासकर जब हम यह जानते हैं कि ऊपर दिए गए पांच बिंदुओं को आपके पक्ष में काम करना होगा और तभी आप पैसे बना सकते हैं। आपको याद ही होगा कि पिछले अध्याय में हमने देखा था कि ब्रेकडाउन तक पहुंचने के लिए 2% से चाल की जरूरत होती है और मुनाफा कमाने के लिए 1% अतिरिक्त चाल की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि इंडेक्स को करीब 3% चलना होगा। मेरा अपना अनुभव कहता है कि बाजार में इतनी बड़ी चाल का आना काफी मुश्किल होता है और यही वजह है कि मैं कभी भी लॉन्ग स्ट्रैडल लेने के पहले दो बार सोचता हूं। 

मैंने कई ट्रेडर्स को लॉन्ग स्ट्रैडल का इस्तेमाल बहुत ही लापरवाही से करते हुए देखा है, उनको लगता है कि इस स्ट्रैटेजी में बाजार की दिशा का कोई असर नहीं पड़ता इसलिए वो सुरक्षित हैं। लेकिन अंततः वो पैसे गंवा बैठते हैं। बाजार की चाल और बाजार का टाइम डिले (time delay) आमतौर पर उनके पक्ष में काम नहीं करते हैं। यहां ध्यान रखिए कि मैं आपको लॉन्ग स्ट्रैडल लेने के लिए हतोत्साहित नहीं कर रहा हूं। वास्तव में, लॉन्ग स्ट्रैडल का सीधा और सरल होना सबको पता है, जब ऊपर के 5 बिंदु आप के पक्ष में हो तो यह बहुत खूबसूरती से काम करता है, मैं सिर्फ यह मानता हूं कि इन पांचों चीजों का एक साथ आपके पक्ष में आना थोड़ा कठिन होता है। 

तो अगर इन 5 चीजों का आपके पक्ष में आना लॉन्ग स्ट्रैडल में मुनाफा कमाने से रोकता है तो यही पांच बिंदु इस स्ट्रेटजी की विपरीत स्थिति में आपका साथ देंगे यानी शॉर्ट स्ट्रैडल में आपका साथ देंगे।

10.2 – शॉर्ट स्ट्रैडल

बहुत सारे ट्रेडर इस बात से डरते हैं कि शॉर्ट स्ट्रैडल में घाटा असीमित होता है। लेकिन मैं बहुत सारे मौकों पर शॉर्ट स्ट्रैडल से ट्रेड करना फायदेमंद मानता हूं। आइए पहले देख लेते हैं कि शॉर्ट स्ट्रैडल का सेटअप कैसा होता है और इसका P&L अलग-अलग स्थितियों में किस तरह से काम करता है

एक शॉर्ट स्ट्रैडल को बनाना काफी आसान होता है – यहां ATM कॉल और पुट ऑप्शन को बेचना होता है जबकि लॉन्ग स्ट्रैडल में ATM कॉल और पुट ऑप्शन को खरीदना होता था। शॉर्ट स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल नेट क्रेडिट के लिए किया जाता है, जब आप ATM ऑप्शन को बेचते हैं तो प्रीमियम की रकम आपके एकाउंट में आती है।

एक उदाहरण देखते हैं, मान लें कि निफ्टी 7859 पर है, तो अब 7600 ATM स्ट्राइक होगा। ऑप्शन का प्रीमियम होगा –  

  • 7600 CE यहां 77 पर ट्रेड कर रहा है
  • 7600 PE यहां 88 पर ट्रेड कर रहा है 

अब शॉर्ट स्ट्रैडल के लिए हमें ये दोनों ऑप्शन बेचने होंगे और हमें कुल 77 + 88 = 165 का प्रीमियम मिलेगा। 

यह ध्यान रखें कि –  ऑप्शन एक ही अंडरलाइंग से जुड़े होंएक ही एक्सपायरी के हों और एक ही स्ट्राइक से जुड़े हों। अब मान लीजिए कि आपने शॉर्ट स्ट्रैडल ले लिया है तो आइए कुछ अलग-अलग स्थितियों में P&L को देखते हैं

स्थिति 1बाजार 7200 पर एक्सपायर होता है (पुट ऑप्शन में नुकसान होता है) 

यह वह स्थिति है जहां पुट ऑप्शन में होने वाला घाटा इतना बड़ा है कि वो CE और PE दोनों से मिलने वाले प्रीमियम से अधिक होगा। 7200 पर

  • 7600 CE वर्थलेस एक्सपायर होगा, इस वजह से, ₹77 का प्रीमियम हमें मिल जाएगा। 
  • 7600 PE इंट्रिन्सिक वैल्यू होगी 400, दिए गए प्रीमियम को इसमें से निकालने के बाद, मतलब ₹88 को निकालने के बाद, हमें नुकसान होगा 400 – 88 = – 312 
  • कुल यानी नेट नुकसान होगा 312 – 77 = 235

जैसा कि आप देख सकते हैं कि कॉल ऑप्शन से होने वाला मुनाफे से अधिक पुट ऑप्शन में नुकसान हो रहा है। 

स्थिति 2 – बाजार 7435 पर (नीचे के ब्रेक इवन पर) एक्सपायर होता है 

यह वह स्थिति है जहां पर ना तो पैसे बनते हैं और ना ही पैसे डूबते हैं। 

  • 7600 CE वर्थलेस एक्सपायर होगा इसलिए जो प्रीमियम दिया गया है यानी ₹77 उसको हम अपने पास रख सकेंगे। यानी ₹77 का मुनाफा होगा। 
  • 7600 PE की इंट्रिन्सिक वैल्यू होगी 165 इसका मतलब है जबकि हमें प्रीमियम मिला है ₹88 का, इसलिए हमें नुकसान होगा 165 – 88 = – 77 
  • कॉल ऑप्शन से होने वाला फायदा पुट ऑप्शन के होने वाले नुकसान के बराबर है इसलिए 7435 पर ना तो पैसे बनते हैं और ना ही पैसे डूबते हैं। 

स्थिति 3 – बाजार 7600 पर एक्सपायर होता है (ATM स्ट्राइक पर, अधिकतम फायदा) 

7600 पर स्थिति शॉर्ट स्ट्रैडल के लिए सबसे अच्छी है, स्थिति सीधी है, कॉल और पुट दोनों ऑप्शन वर्थलेस एक्सपायर होंगे और दोनों का प्रीमियम हमें मिल जाएगा। यानी दिए गए प्रीमियम ₹165 के बराबर का फायदा होगा। 

मतलब यह कि शॉर्ट स्ट्रैडल में आपको सबसे अधिक मुनाफा तब होता है जब बाजार में कोई चाल नहीं होती है यानी वो अपनी जगह पर स्थिर रहता है।

स्थिति 4 – बाजार 7765 पर एक्सपायर होता है (ऊपर का ब्रेक डाउन) 

यह स्थिति लगभग स्थिति 2 की तरह ही है। यहां पर स्ट्रैटेजी का ब्रेक इवन ATM स्ट्राइक के ऊपर बनता है 

  • 7600 CE की इंट्रिन्सिक वैल्यू होगी 165, यानी कॉल ऑप्शन के प्रीमियम ₹77 को निकालने के बाद हमें ₹88 (165 -77) का नुकसान होगा 
  • 7600 PE वर्थलेस एक्सपायर होगा इसलिए इसके लिए दिया गया प्रीमियम ₹88 हम रख सकेंगे 
  • 7600 PE  में होने वाला फायदा 7600 CE  में होने वाले घाटे की भरपाई करेगा, मतलब ना तो फायदा होगा ना ही नुकसान 

इसलिए इस स्तर पर स्ट्रैटेजी का ऊपर का ब्रेक इवन होगा।

स्थिति 5 – बाजार 8000 पर एक्सपायर होता है, (कॉल ऑप्शन में पैसे डूबते हैं) 

इस स्थिति में बाजार 7600 के ATM स्तर से काफी ऊपर है। इसलिए कॉल ऑप्शन का प्रीमियम बढ़ेगा और हमें नुकसान होगा। 

  • 7600 PE वर्थलेस एक्सपायर होगा इसलिए ₹88 का प्रीमियम मिल जाएगा 
  • 8000 पर 7600 CE की इंट्रिन्सिक वैल्यू 400 होगी, इसलिए मिले हुए प्रीमियम ₹77 को निकालने के बाद हमें 323 (400 -77) का नुकसान होगा। 
  • हमें पुट ऑप्शन के लिए ₹88 का प्रीमियम मिला है, इसलिए नुकसान होगा 88 – 323 = 235   

तो जैसा कि आप देख सकते हैं कि कॉल ऑप्शन में होने वाला नुकसान इतना ज्यादा है कि वह दोनों ऑप्शन के लिए मिले कुल प्रीमियम से भी अधिक है।  

अब बाजार की अलग-अलग एक्सपायरी स्तर पर होने वाले पे ऑफ के टेबल पर नजर डालते हैं

 

 

जैसा कि आप देख सकते हैं कि 

  1. अधिकतम फायदा (165) 7600 के स्तर पर होता है जो कि ATM स्ट्राइक है 
  2. स्ट्रैटेजी में फायदा सिर्फ नीचे और पर के ब्रेकडाउन के बाच में ही होता है 
  3. बाजार की किसी भी दिशा में चले तो असीमित नुकसान होता है 

इनको पे ऑफ स्ट्रक्चर के ग्राफ में भी देखा जा सकता है

एक उल्टे V की तरह दिखने वाले इस पे ऑफ ग्राफ से यह साफ है कि 

  1. अधिकतम फायदा ATM स्ट्राइक पर होता है, आप जैसे जैसे ATM से दूर जाते हैं मुनाफा कम होता जाता है।
  2. अगर बाजार दोनों ब्रेक डाउन स्तर के बीच में रहता है तो इस स्ट्रैटेजी में पैसे बनते हैं।
  3. अधिकतम नुकसान तब होता है जब बाजार ब्रेक डाउन स्तर से काफी दूर चला जाता है, बाजार ब्रेक डाउन स्तर से जितना दूर होता है नुकसान उतना ही अधिक होता है। 
  4. अधिकतम नुकसान =  असीमित 
  5. यहां पर दो ब्रेक इवन है दोनों ही तरफ ATM से बराबर दूरी पर 
  6. ऊपर का ब्रेक इवन = ATM + नेट प्रीमियम 
  7. नीचे का ब्रेक इवन = ATM नेट  प्रीमियम 

अब तक आपको समझ में आ गया होगा कि शॉर्ट स्ट्रैडल पूरी तरह से विपरीत है लॉन्ग स्ट्रैडल से। शॉर्ट स्ट्रैडल सबसे अच्छे से काम तब करता है जब बाजार एक छोटे दायरे में रहता है और उसमें ज्यादा बड़ी चाल नहीं आती। 

बहुत सारे ट्रेडर शॉर्ट स्ट्रैडल से डरते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इसमें दोनों तरफ असीमित नुकसान हो सकता है। लेकिन मेरा अपना अनुभव कहता है कि अगर आप इस का इस्तेमाल सही से करें तो ये एक अच्छी स्ट्रैटेजी हो सकती है। पिछले मॉड्यूल में मैंने एक खास स्थिति का जिक्र किया था जिसमें शॉर्ट स्ट्रैडल का इस्तेमाल हो सकता है। मेरे हिसाब से वो इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण है कि शॉर्ट स्ट्रैडल का इस्तेमाल कब किया जाना चहिए।

अब मैं फिर से उस केस स्टडी को पेश कर रहा हूं शायद आप उसे ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।  

11.3 – केस स्टडी ( पिछले मॉड्यूल से )

इस केस स्टडी का इस्तेमाल मैंने मॉड्यूल 5, अध्याय 23 में किया था। मैं फिर से उस केस स्टडी को पेश कर रहा हूं शायद आप इस उदाहरण को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। आप उस अध्याय को फिर से पढ़ लेंगे तो आपके लिए इसे समझना आसान हो जाएगा।  

इंफोसिस 12 अक्टूबर को अपने Q2 के नतीजे पेश करने वाला था। यहां पर भी सोच सीधी-सादी थी कि इस खबर की वजह से वोलैटिलिटी ऊपर जाएगी, तो ऑप्शन को शॉर्ट करना चाहिए। इस उम्मीद के साथ कि आप बाद में जब वोलैटिलिटी नीचे हो जाए आप इसे कम भाव पर खरीद सकेंगे। तो पूरी योजना के साथ, इस पोजीशन को 8 अक्टूबर को लिया गया यानी घटना से 4 दिन पहले। 

इंफोसिस 1142 रुपए पर ट्रेड हो रहा था इसलिए इस ट्रेडर ने फैसला किया कि 1140 की स्ट्राइक (ATM) ली।

ट्रेड शुरू करते वक्त ऑप्शन चेन का चित्र ऐसा था

8 अक्टूबर को सुबह 10:35 पर 1140 CE ₹48 पर ट्रेड कर रहा था और इंप्लाइड वोलैटिलिटी 40.26% थी। 1140 PE ₹47 पर ट्रेड कर रहा था इंप्लाइड वोलैटिलिटी 8% थी। कुल मिलाकर दोनों का प्रीमियम ₹95 प्रति लॉट मिला। 

बाजार को उम्मीद थी कि इंफोसिस अच्छे नतीजों का ऐलान करेगा। वास्तव में नतीजे उम्मीद से भी ज्यादा अच्छे थे , देखिए –

जुलाई सितंबर तिमाही के लिए इंफोसिस ने 519 मिलियन डॉलर का नेट प्रॉफिट दिखाया था जबकि पिछले साल इसी अवधि के लिए मुनाफा 511 मिलियन डॉलर का था। कंपनी की आमदनी 8.7% बढ़कर 2.39 बिलियन डॉलर हो गई। सीक्वेंशियल बेसिस (sequential basis) यानी अनुक्रमिक आधार पर भी आमदनी 6% बढ़ी जबकि बाजार 4- 4.5 % की ही उम्मीद कर रहा था। 

रुपए में देखे तो नेट प्रॉफिट 9.8% बढ़कर 3398 करोड़ हो गया और आमदनी 15635 करोड़ रुपए जो कि पिछले साल से 17.2% ज्यादा थी। (स्त्रोत- इकोनामिक टाइम्स) 

कंपनी ने नतीजों की घोषणा सुबह 9:18 पर की बाजार खोलने के 3 मिनट बाद की और इस ट्रेडर ने अपना सौदा उसी समय काट दिया। 

यह है उस समय का चित्र-

1140 CE अब ₹55 पर ट्रेड कर रहा था और इंप्लाइड वोलैटिलिटी (Implied Volatility) गिरकर 28% रह गई थी 1140 PE अब ₹20 पर ट्रेड कर रहा था और इंप्लाइड वोलैटिलिटी गिरकर 40% रह गई थी। 

यहां ध्यान दीजिए कि कॉल ऑप्शन जिस रफ्तार से ऊपर बढ़ा वो उस रफ्तार से कम था जिस रफ्तार से पुट ऑप्शन नीचे गिरा। अब कुल मिलाकर प्रीमियम था 75 रुपए प्रति लॉट। इस तरह से  ट्रेडर ने हर लॉट पर ₹20 बनाए। 

11.4 – ग्रीक्स – The Greeks

CE और PE दोनों का डेल्टा करीब 0.5 होगा। हम इन दोनों ऑप्शन के डेल्टा को जोड़ कर इस पोजीशन के डेल्टा को देख सकते हैं। 

  • 7600 CE  का डेल्टा @ 0.5, पर चूंकि हम यहां पर शॉर्ट हैं इसलिए डेल्टा होगा – 0.5
  • 7600 PE का डेल्टा @ 0.5, पर चूंकि हम यहां पर शॉर्ट हैं इसलिए डेल्टा होगा + 0.5
  • कुल डेल्टा होगा -0.5+ 0.5 = 0

डेल्टा का 0 होना हमें बताता है कि इस स्ट्रैटेजी पर बाजार की दिशा का कोई असर नहीं होगा। याद रहे कि शॉर्ट और लॉन्ग स्ट्रैडल दोनों ही डेल्टा न्यूट्रल होते हैं। लॉन्ग स्ट्रैडल के डेल्टा न्यूट्रल होने का मतलब है कि यहां मुनाफा असीमित है जबकि शॉर्ट स्ट्रैडल के डेल्टा न्यूट्रल होने का मतलब है कि यहां नुकसान असीमित है। 

यहां पर सोचने वाली बात ये है कि – जब आप स्ट्रैडल की पोजीशन बनाते हैं तब तो आप डेल्टा न्यूट्रल होते हैं लेकिन क्या आपकी पोजीशन बाद में भी डेल्टा न्यूट्रल रहेगी। अगर हां, तो क्यों, और अगर जवाब ना है, तो पोजीशन को डेल्टा न्यूट्रल रखने के लिए क्या करना चाहिए।

अगर आपने इन बातो पर ठीक से विचार कर लिया तो मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि ऑप्शन को ले कर आपकी समझ बाजार के 90 प्रतिशत लोगों से बेहतर है। इन सीधे सवालों का जवाब देने के लिए आपको थोड़ा गहराई में जाना होगा।

इस अध्याय की मुख्य बातें

  1. शार्ट स्ट्रैडल में आपको ATM कॉल और पुट ऑप्शन को साथ-साथ बेचना होता है, ये ऑप्शन एक ही अंडरलाइंग के, एक स्ट्राइक वाले और एक ही एक्सपायरी के होने चाहिए। 
  2. कॉल और पुट ऑप्शन को बेच कर ट्रेडर इस बात पर पैसे लगा रहा होता है कि बाजार एक दायरे में रहेगा और ज्यादा नहीं चलेगा। 
  3. अधिकतम फायदा कुल दिए गए प्रीमियम के बराबर होता है और यह उस स्ट्राइक पर होता है जहां पर शॉर्ट स्ट्रैडल की शुरुआत की गई है। 
  4. ऊपर का ब्रेक डाउन स्ट्राइक + नेट प्रीमियम के बराबर होता है, नीचे का ब्रेक डाउन स्ट्राइक नेट प्रीमियम के बराबर होता है। 
  5. शॉर्ट स्ट्रैडल का कुल डेल्टा जीरो होता है।
  6. स्ट्रैटेजी को काम में लाते समय वोलैटटिलिटी को ऊपर होना चाहिए। 
  7. जब आप पोजीशन होल्ड कर रहे हो यानी होल्डिंग पीरियड में वोलैटिलिटी को नीचे आना चाहिए। 
  8. शॉर्ट स्ट्रैडल बनाने को समय बाजार की किसी बड़ी घटना के पास बनाना चाहिए, जब वोलैटिलिटी प्रीमियम को ऊपर ले जाएगी और घटना का नतीजा आने के तुरंत बाद वोलैटिलिटी नीचे आएगी और प्रीमियम भी बाजार के आम उम्मीद से काफी अलग होना चाहिए।

6 comments

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  1. ANSAR KHAN says:

    Thanks for understand very Easy way
    but correction this lines 1140 PE ₹47 पर ट्रेड कर रहा था इंप्लाइड वोलैटिलिटी 8% थी।
    8% jaga par 48% hoga I think

  2. Devendra Saini says:

    Sir plz clarify whether delta will netrul or not after straddle and why

  3. Rajat Chauhan says:

    एक उदाहरण देखते हैं, मान लें कि निफ्टी 7859 पर है, तो अब 7600 ATM स्ट्राइक होगा। ऑप्शन का प्रीमियम होगा.

    I think nifty CMP should be 7559 not 7859 plz check

    • Kulsum Khan says:

      सूचित करने के लिए धन्यवाद हम इसको सही करदेंगे।

  4. Sarvanand Tiwari says:

    जैसे आपने लॉन्ग स्ट्रैडल में बताया था की इसे तब लेना चाहिए जब एक्सपायरी में काफी समय हो. उसी तरह शार्ट स्ट्रैडल कब बनाना चाहिए. एक्सपायरी के नजदीक या एक्सपायरी में काफी समय हो तब.

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