19.1 –  प्वाइंट टू प्वाइंट रिटर्न 

पिछले अध्याय में हमने सीखा कि किसी दिए हुए समय अवधि के लिए रिटर्न कैसे कैलकुलेट किया जाता है। अब मैं अगर यह डेटा आपको दूं –

फंड – आदित्य बिरला फ्रंटलाइन इक्विटी 

शुरुआत की तारीख – 2 जनवरी 2013 

शुरुआती निवेश – ₹1,00,000 

शुरुआती NAV – 100.83 

निवेश बंद होने की तारीख – 2 जनवरी 2015 

बंद करने के समय का NAV – 161.83 

अब अगर आपसे पूछा जाए कि आप इसका रिटर्न निकालिए तो आप शायद आसानी से यह काम कर सकेंगे। आइए इसको निकाल कर देखते हैं –

यूनिटों की संख्या = 1,00,000/100.83

= 991.7683

निवेश की अंतिम कीमत = 991.7683 * 161.83

= 1,60,497.9

इस एकमुश्त निवेश में 2 साल में बढ़त की दर क्या रही उसको निकालने के लिए हम CAGR का फार्मूला लगाएंगे- 

= [160497.9/100000]^(1/2) – 1

=26.69%.

आप देख सकते हैं कि यहां पर बढ़त दर काफी अच्छी खासी है। तो अब मान लीजिए कि आप इस निवेश से काफी ज्यादा खुश होते हैं और इस बारे में दूसरे लोगों को भी बताना शुरू करते हैं। आपका एक दोस्त आपके पास आता है और आप उसे बहुत गर्व से बताते हैं कि 2 साल में 26.96% का रिटर्न मिला है। 

आपका दोस्त काफी प्रभावित होता है और वो भी निवेश करने का फैसला करता है। 

अब मैं आपसे एक सवाल पूछता हूं, यहां एक सबसे बड़ी मूलभूत गलती क्या है? 

क्या आपने अपने निवेश के बारे में अपने दोस्त से झूठ बोला? 

क्या आपने अपने दोस्त को निवेश से मिलने वाले रिटर्न के बारे में गलत जानकारी दी? 

तो फिर आखिर यहां गलत बात क्या है? 

वास्तव में 2 साल में 26.96% का रिटर्न मिलने की बात सबके लिए सही नहीं है यह बहुत ही गलत तरीके का सामान्यीकरण है। जब आप अपने दोस्त को यह बताते हैं तो आपके दोस्त को यह भरोसा हो जाता है कि इस तरह का रिटर्न मिलना संभव है। 

आपो भी 26.96% का रिटर्न तभी मिला जब आपने 2 जनवरी 2013 को निवेश किया और इसे 2 जनवरी 2015 को निकाल लिया और तब रिटर्न नापा। रिटर्न की यह दर इस दो निश्चित तारीखों के लिए ही है। यह एक व्यक्तिगत अनुभव है। 

अगर किसी भी दूसरी दो तारीखों के बीच के लिए दो साल का रिटर्न नापा जाएगा तो बढ़त की दर अलग निकलेगी।  

तो जब भी आप किसी भी निवेश का रिटर्न या उसके बढ़ोतरी की दर को किसी दो तारीखों के बीच नापते हैं तो आपको जो संख्या मिलती है वह सिर्फ उन्हीं दो तारीखों के लिए ही सही साबित होती है। इसीलिए ऐसे रिटर्न को प्वाइंटटू प्वाइंट (point-to-point) रिटर्न कहते हैं। 

आम तौर पर इस 2 साल में कैसा रिटर्न मिला यह जानने के लिए आपको रोलिंग रिटर्न निकालना होता है।

19.2 – रोलिंग रिटर्न 

रोलिंग रिटर्न हमें यह बताता है कि किन्ही ‘n साल के रिटर्न’ में n साल में किस तरह का बदलाव आया है। इसे समझने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। इसलिए हम एक उदाहरण लेंगे और उससे समझने की कोशिश करेंगे। अगर आप इसके गणित को समझ जाएंगे तो रोलिंग रिटर्न को समझना आपके लिए आसान होगा। 

वैसे आपको बता दूं कि बहुत सारी वेबसाइट म्यूचुअल फंड का रोलिंग रिटर्न अपनी साइट पर बताती रहती हैं। इसलिए इसे कैलकुलेट करने का तरीका याद रखना आपके लिए जरूरी नहीं है। लेकिन अगर आप जानेंगे कि रोलिंग रिटर्न कैसे निकाला जाता है तो जब आप किसी फंड का रोलिंग रिटर्न देखेंगे तो उसको समझना आपके लिए आसान होगा। 

तो आइए शुरू करते हैं –

मैंने AB फ्रंटलाइन इक्विटी फंड ग्रोथ डायरेक्ट प्लान के NAV का ऐतिहासिक डेटा निकाला है। इस डेटा की शुरुआत ही तारीख है 2 जनवरी 2013 और यह डेटा मेरे पास 2 जनवरी 2020 तक का है यानी 7 साल का डेटा है। 

यहां पर मेरा उद्देश्य यह पता करना है कि यहां पर 2 साल का रोलिंग रिटर्न कितना है। यह जानने के लिए मुझे 2015 से शुरुआत करनी होगी। 

सबसे पहले मैं 2 जनवरी 2015 का NAV लूंगा और उसके बाद उसके 2 साल पहले का NAV लूंगा यानी 2 जनवरी 2013 का। अब मैं इन दो तारीखों के बीच के मिलने वाले रिटर्न को कैलकुलेट करूंगा। इसके बाद मैं तारीख को 1 दिन आगे बढ़ा दूंगा यानी 3 जनवरी 2015 और 3 जनवरी 2013 और इन दोनों का NAV लूंगा और इन दोनों की तारीखों के बीच के रिटर्न को कैलकुलेट करूंगा। इसके बाद में तारीख को 1 दिन और बढ़ाउंगा और अब 4 जनवरी 2015 और 4 जनवरी 2013 के बीच के रिटर्न को कैलकुलेट करूंगा और इस तरह से मैं हर बार एक दिन आगे बढ़ता जाऊंगा। और इस तरह से 2 साल के रिटर्न का एक टाइम सीरीज डेटा निकाल लूंगा।

आइए यहां का सबसे पहला रोलिंग रिटर्न कैलकुलेट करते हैं –

2 जनवरी 2013 को NAV है – 100.83 

2 जनवरी 2015 को NAV है – 161.83 

अब समय 2 सालों का है इसलिए हम CAGR रिटर्न निकालेंगे – 

[161.83/100.83]^(1/2)-1

26.69%

इसके बाद इस सीरीज में दूसरा रोलिंग रिटर्न होगा –

3 जनवरी 2013 का NAV – 101.29 

3 जनवरी 2015 का NAV – 161.45 

तो रिटर्न होगा 

= [161.45/101.29]^(1/2)-1

= 26.25%

इसी तरीके से आगे का डाटा निकालेंगे। मैंने एक एक्सेल शीट में इस डेटा को लगा दिया है और एक ऐसा चार्ट बना – 

यहां पर शुरुआती तारीख है 2 जनवरी 2015 और मेरे पास अंतिम डेटा है 2 जनवरी 2020 तक का।

जैसा कि आप देख सकते हैं कि मैंने ताजा तारीख और उसके NAV को नीले रंग से दिखाया है। इसके बाद मेरे पास उससे 2 साल पहले का NAV और उसकी तारीख है जिसको मैंने पीले रंग में दिखाया हुआ है। फिर मैंने इन दोनों तारीखों के सामने उस से निकला हुआ CAGR बताया है। अब मैं अगर इस पूरे टाइम सीरीज की सभी तारीखों का CAGR निकाल लूं तो मुझे 2 साल का हर दिन का रोलिंग रिटर्न मिल जाएगा। 

अब आगे बढ़ने के पहले हम एक बार फिर से नजर डालते हैं कि मैंने रोलिंग रिटर्न के बारे में क्या कहा था रोलिंग रिटर्न हमें यह बताता है कि किन्ही n साल के रिटर्न में n साल में किस तरह का बदलाव आया है। अब आपको यह बात कुछ हद तक समझ में आ गई होगी। 

यहां पर एक छोटी सी बात आपको ध्यान रखनी चाहिए आप दूसरे नंबर के डेटा को देखिए यहां पर मैंने 5 जनवरी 2015 का NAV लिया है लेकिन 5 जनवरी 2013 के NAV के बजाय मैंने 3 जनवरी 2013 का डेटा लिया है। ऐसा इसलिए है कि शायद उस दिन वीकेंड था और बाजार बंद थे। तो मुझे लगता है कि आप इस बात को अनदेखा कर सकते हैं।

साथ ही आपको यह भी समझना होगा कि अगर हमारा उद्देश्य 1 साल का रोलिंग रिटर्न निकालने का होगा तो मेरे शुरुआती तारीख 2014 होगी और अगर मेरा उद्देश्य 3 साल का रोलिंग रिटर्न निकालने का होगा तो मैं 2016 से शुरुआत करूंगा। 

अब अगर मेरे पास 2015 से शुरू होने वाले रोलिंग रिटर्न की टाइम सीरीज है तो मैं कुछ काम आसानी से कर सकता हूं। सबसे पहले तो मैं इस टाइम सीरीज का रिटर्न की रेंज निकाल सकता हूं। रेंज निकालने के लिए एक बहुत आसान काम करना होता है हमें सबसे अधिक और सबसे कम यानी न्यूनतम और अधिकतम रिटर्न को देखना होता है। 

तो अधिकतम रिटर्न है –

न्यूनतम रिटर्न है –

इसका मतलब यह है कि अगर किन्हीं दो लोगों ने AB फ्रंटलाइन इक्विटी फंड में निवेश किया तो उसमें से भाग्यशाली व्यक्ति ने 19 अगस्त 2013 को निवेश किया और अपना निवेश 19 अगस्त 2015 को निकाल लिया। ऐसे में उस व्यक्ति ने 37.76% का रिटर्न कमाया। 

लेकिन जिस व्यक्ति कि किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी उसने अपना निवेश 19 सितंबर 2017 को शुरू किया और 19 सितंबर 2019 तक वह निवेशित रहा। इस व्यक्ति ने कमाई नहीं की बल्कि पैसे गंवाए। 

तो मैं यह कहने की कोशिश कर रहा हूं कि 2 साल का रिटर्न हमेशा एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तारीख को निवेश किया और आपने निवेश की हुई रकम को कब निकाला। 

2015 से शुरू होने वाले 2 साल के रोलिंग रिटर्न का ग्राफ देखिए –

जैसा कि आप देख सकते हैं कि 2 साल का रिटर्न 37% से लेकर -1% तक का है। अगर आपने इन 2 साल के लिए निवेश किया तो आपका रिटर्न इनके बीच में से कुछ भी हो सकता है। 

यह जानने के लिए कि 2 साल का संभावित रिटर्न कितना हो सकता है आपको इन रोलिंग रिटर्न का एक एवरेज यानी औसत निकालना होगा। इसे रोलिंग रिटर्न एवरेज कहते हैं। 

यह औसत यहां 15.35% है। 

तो जैसा आप देख सकते हैं कि रोलिंग रिटर्न हमें प्वाइंट टू प्वाइंट रिटर्न के मुकाबले ज्यादा अच्छे से जानकारी दे सकता है। 

अगली बार अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो उसकी एनालिसिस के लिए यह दो काम जरूर कीजिएगा 

  1. अपने निवेश की अवधि तय कीजिए और यह देखिए कि उस निश्चित अवधि के लिए ऐतिहासिक रोलिंग रिटर्न का कैसा रहा है 
  2. उस अवधि के ऐतिहासिक रोलिंग रिटर्न में न्यूनतम रिटर्न कितना था, अधिकतम रिटर्न और औसत कितना था यह पता कर लीजिए 

उदाहरण के तौर पर अगर मैं लार्ज कैप इक्विटी फंड में 7 साल के लिए निवेश कर रहा हूं तो मैं उसका 7 साल का ऐतिहासिक रोलिंग रिटर्न जरूर देखूंगा। ऐसा करने से मुझे यह पता चल जाएगा कि ऐतिहासिक तौर पर उस फंड के रिटर्न का रेंज कैसा रहा है और उस का औसत कितना रहा है। 

मेरी राय में प्वाइंट टू प्वाइंट रिटर्न के मुकाबले यह ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी तरीका है। बजाय इसके कि आप किन्हीं दो तारीखों के बीच का रिटर्न देखें। यहां ध्यान रखिए कि मैंने 2 साल का रोलिंग रिटर्न सिर्फ एक उदाहरण के तौर पर लिया है। अगर आप इक्विटी फंड में निवेश करना चाहते हैं तो कम से कम 5 साल का या उससे अधिक का रोलिंग रिटर्न देखें। 

अगले अध्याय में हम म्यूचुअल फंड से जुड़े कुछ और मापदंडों पर नजर डालेंगे।

इस अध्याय की मुख्य बातें 

  • प्वाइंट टू प्वाइंट रिटर्न हमें किन्हीं दो तारीखों के बीच के रिटर्न को बताता है 
  • प्वाइंट टू प्वाइंट रिटर्न को कभी भी एक सामान्य रिटर्न के तौर पर नहीं देखना चाहिए 
  • रिटर्न को बेहतर समझने के लिए हमेशा रोलिंग रिटर्न को नजर डालना चाहिए 
  • रोलिंग रिटर्न का औसत आपको यह ज्यादा बेहतर तरीके से बता सकता है कि आपको कितने रिटर्न की उम्मीद करनी चाहिए



1 comment

  1. Kamlesh says:

    Sir.
    Please guide that if I invest in ETF nifty fifty. And dividend paid by company. What ETF will do with this dividend.

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