Module 8   करेंसी, कमोडिटी और सरकारी सिक्योरिटीजChapter 8

सोना (भाग 2)

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8.1 – लंदन फिक्स (लंदन में कीमत निर्धारण)

पिछले अध्याय में हमने सोने के उन कॉन्ट्रैक्ट पर चर्चा की थी जो MCX पर मौजूद हैं। इस अध्याय की शुरुआत हम इस चर्चा से करते हैं कि सोने की स्पॉट कीमतें दुनिया भर में और भारत में कैसे तय होती हैं। लेकिन मैं यह साफ कर दूं कि सोने की कीमत तय करने का यह तरीका सिर्फ एक तरीका है और MCX पर होने वाली सोने की ट्रेडिंग में इसका कोई बहुत ज्यादा महत्व नहीं होता है। लेकिन फिर भी इसे जानना ज़रूरी है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत हर दिन लंदन में तय की जाती है, दिन में दो बार दो अलग-अलग सत्रों के लिए। सुबह के सत्र के लिए 10:30 AM पर जिसे AM फिक्स कहा जाता है और शाम के सत्र के लिए 3:00 PM पर जिसे PM फिक्स कहा जाता है। लंदन के सबसे बड़े बुलियन डेस्क के ट्रेडर इस कीमत को तय करते हैं और नैथन मायर राथ्सचाइल्ड एंड संस (Nathan Mayer Rothschild & Sons) इस काम में उन्हें मदद करते हैं। 

जेपी मॉर्गन, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, स्कोटियामोकाटा (स्कोटिया बैंक), सोसायटी जनरल जैसे करीब 10 से 11 पार्टिसिपेटिंग बैंक इस काम में हिस्सा लेते हैं। ध्यान दीजिए कि आम जनता को या दूसरे बैंकों को इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं है। इन बैंकों के डीलर पहले से तय समय पर निर्धारित कॉन्फ्रेंस कॉल में कॉल करते हैं और सोने की खरीद और बिक्री की कीमतें की अपनी बिड बताते हैं। वहां आई सभी बिड और ऑफर से एक औसत कीमत निकाली जाती है और फिर उस कीमत को बाजार को बता दिया जाता है जो कि सोने के लिए उस समय का बेंचमार्क भाव बनता है। इस पूरी प्रक्रिया में 10 से 15 मिनट लगते हैं। यही प्रक्रिया शाम के सत्र के लिए यानी PM सेशन के लिए फिर से दोहराई जाती है और फिर से सोने की कीमत तय करके उसे बाजार को बता दिया जाता है।

AM और PM फिक्स में जो कीमतें तय की जाती हैं वह उस कीमत के काफी करीब होती हैं जो लंदन में हो रही सोने की ट्रेडिंग में चल रही होती हैं। इस वजह से ये कीमतें किसी भी बुलियन ट्रेडर के लिए कोई नई खबर नहीं होती हैं। एक तरह से कहा जा सकता है कि इंग्लैंड में होने वाली बहुत सारी दूसरी चीजों की तरह यह भी एक तरीके की परंपरा है जिसे निभाया जा रहा है। 

भारत में भी कुछ इसी तरीके की परंपरा है लेकिन इतनी विस्तृत नहीं है। आपको पता ही है कि भारत में सोने की सबसे ज्यादा खपत होती है और भारत इसे आयात करता है। भारत में सोना निर्धारित बैंकों द्वारा आयात किया जाता है और फिर यही सोना बुलियन डीलर्स को सप्लाई किया जाता है (कुछ शुल्क लगाने के बाद)। इसके बाद बुलियन डीलर्स एसोसिएशन अपने नेटवर्क के द्वारा इस सोने के लिए बोली मंगाता है, यह बिड या बोली इस आधार पर मंगाई जाती है कि डीलर को इस कीमत पर कितना सोना खरीदना या बेचना है। इन कीमतों के आधार पर एक औसत कीमत निकाली जाती है और यही भारत में सोने की उस दिन की कीमत होती है। वास्तव में यह एक तरीके का चक्र है। डीलर सोने का भाव भेजने के पहले MCX में सोने की फ्यूचर कीमत पर नजर डालते हैं और उसके आधार पर ही अपना भाव बुलियन एसोसिएशन को भेजते हैं। इसके बाद यह कीमतें डीलर और ज्वेलर्स के नेटवर्क को भेजी जाती हैं और उस दिन की कीमत तय हो जाती है।

8.2 – सोने की कीमत का अंतर

कभी कभी सोने के ट्रेडर शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज यानी CME में सोने के फ्यूचर की कीमत और यहां भारत में MCX पर सोने की फ्यूचर कीमत के अंतर को देखते हैं और उसके आधार पर यह मान लेते हैं कि यहां आर्बिट्राज का मौका बन रहा है। उन्हें यह मौका इसलिए दिखता है क्योंकि वो ये मान लेते हैं कि सोना एक अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी है और आमतौर पर दुनिया भर में इसकी कीमतें एक जैसी होना चाहिए और जब कभी ऐसा नहीं होता तो वो एक आर्बिट्राज का मौका है। उदाहरण के तौर पर अगर 995 प्योरिटी का सोना CME में $433 पर कोट (quote) हो रहा है तो MCX पर भी 10 ग्राम सोने की कीमत $430 के आस पास ही होनी चाहिए। 

लेकिन ऐसा नहीं होता है, इन दोनों कीमतों में काफी अंतर होता है और इस वजह से ही CME और MCX के फ्यूचर कीमत में हमेशा एक अंतर होता है। तो यहां सवाल यह उठता है कि दोनों जगह के फ्यूचर कान्ट्रैक्ट की कीमतों में इतना अंतर क्यों होता है?

आइए इस को समझते हैं-  

इस बात को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि भारत में सोने की स्पॉट कीमतें कैसे तय की जाती हैं। 

याद रखिए कि भारत में सोने का आयात होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में और खासकर अमेरिका में, सोने की कीमत प्रति ट्रॉय औंस (per troy ounce basis) में कोट (quote) किया जाता है। एक ट्रॉय औंस करीब-करीब 31.1035 ग्राम होता है। अब मान लीजिए कि अमेरिकी स्पॉट बाजार में सोना 1320 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस में बिक रहा है ऐसे में अगर डॉलर 65 रुपए का है तो भारत में सोने की स्पॉट कीमत क्या होनी चाहिए?

आमतौर पर लोग पहले अमेरिका में 10 ग्राम सोने की कीमत अमेरिकी डॉलर में पता कर लेते हैं और उसके बाद उसे भारत में USD-INR के रेट से गुणा करके यहां पर सोने की कीमत पता करते हैं। आइए ऐसा कर के देखते हैं 

31.1 ग्राम सोने की कीमत $1320 इसलिए 10 ग्राम सोने की कीमत $424.43 होगी। अब चूंकि USD INR 65 पर है इसलिए भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत होगी करीब 27,588 रुपए

लेकिन वास्तव में यह इतना सीधा सादा नहीं होता। भारत में जब सोना आयात होता है (बैंक इसे आयात करते हैं) तो उन्हें सोने पर ड्यूटी और टैक्स भी देना होता है। इसलिए भारत में सोने की स्पॉट कीमतों में यह शुल्क भी शामिल होना चाहिए। एक नजर डालिए की सोने के आयात में क्या-क्या शुल्क शामिल होते हैं-

  1. CIF (Cost, insurance and freight/ कीमत, बीमा और किराया भाड़ा) 
  2. कस्टम ड्यूटी
  3. सेस (Cess)
  4. बैंक का खर्च

इन सारी वजहों से भारत में सोने की वास्तविक कीमत बढ़ जाती है। इसको और अच्छे से समझने के लिए आप यहां पर ट्रेडिंग Q&A पर नजर डाल सकते हैं। this post on TradingQ&A

तो उदाहरण के तौर पर अगर अमेरिका में सोने की स्पॉट कीमत $422 प्रति 10 ग्राम है तो भारत में बाकी सारे खर्चों को जोड़ने के बाद स्पॉट की कीमत काफी ऊपर होगी। उदाहरण के तौर पर आप मान सकते हैं कि भारत में यह कीमत $435 के आसपास होगी और इस तरह से दोनों जगहों पर यह अंतर करीब करीब $15 का होगा।

तो यह तो हुई स्पॉट कीमतों में अंतर की बात लेकिन फ्यूचर की कीमतों के बारे में क्या, याद रखिए कि फ्यूचर की कीमत हमेशा स्पॉट की कीमत से ही निकलती है। फ्यूचर कीमत को स्पॉट कीमत से जोड़ने वाला फार्मूला है –

F = S*e(rt)

आप फ्यूचर कीमत के बारे में और यहां पर पढ़ सकते हैं  futures pricing.

तो जहां अमेरिकी बाजार में सोने की फ्यूचर कीमत वहां के स्पॉट की कीमत के आधार पर तय होती है यानी ऊपर के उदाहरण में $420 के अनुसार, वहीं भारत में सोने की फ्यूचर की कीमत यहां के स्पॉट बाजार के आधार पर तय होगी जो कि उदाहरण में $435 के करीब है। इसी वजह से CME और MCX की फ्यूचर कीमतों में अंतर होता है, और इसे आर्बिट्राज का मौका नहीं समझना चाहिए।

8.3 – सोने की कीमत पर किन बातों का असर पड़ता है

दुनिया भर के निवेशकों की एक खास आदत है वो सोने में तब जरूर निवेश करते हैं जब दुनिया के आर्थिक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल होता है। सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है और यह माना जाता है कि किसी भी तरीके की आर्थिक मंदी में सोना उनके निवेश को बचाकर रखेगा। 

उदाहरण के तौर पर जून 2016 में BREXIT की घटना हो रही थी, जिसने दुनिया भर के बाजारों को हिला कर रख दिया था तो इस वजह से सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा, इसे आप नीचे के चार्ट में देख सकते हैं 

घटना के दौरान और घटना के बाद सोने की कीमतों में तेजी आई थी और इस चार्ट पर आपको जो बड़े कैंडल दिख रहे हैं वह 24 जून के बाद के हैं, जिस दिन ब्रेक्सिट का फैसला आ गया था। मतलब यह कि ब्रेक्सिट का फैसला आने के बाद सोने में और तेजी आई थी। तो होता यह है कि जब भी दुनिया में किसी भी तरीके का अनिश्चितता का माहौल बनता है तो निवेशक सोना खरीदने लगते हैं क्योंकि सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है। 

इतिहास में जितनी भी बड़ी घटनाएं हुई हैं, उनका सोने की कीमतों पर असर पड़ा है। जैसे कच्चा तेल संकट, मध्य एशिया संकट, इजरायल फिलीस्तीन, यूरोपियन यूनियन शरणार्थी संकट, ग्रीस का आर्थिक संकट, यूरो संकट हो या फिर लेहमैन ब्रदर्स संकट। यह याद रखने की बात है कि जब भी दुनिया में कोई बड़ी घटना होती है तो सोने की कीमतों पर असर पड़ता है। 

इसके आधार पर हम एक बड़ा निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि अनिश्चितता में सोने की कीमत बढ़ती है। वास्तव में, आर्थिक अनिश्चितता के समय में रिस्की निवेश जैसे इक्विटी में निवेश कम हो जाता है और सोने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले ऐसेट में निवेश बढ़ जाता है।

अनिश्चितता वाली घटनाओं के अलावा भी, दैनिक तौर पर भी निवेशक सोने में निवेश इसलिए करते हैं क्योंकि इसे मुद्रास्फीति यानी इन्फ्लेशन से बचाने वाले निवेश के तौर पर देखा जाता है। यह माना जाता है कि लंबे समय में सोना लगातार बढ़ता रहेगा अगर आप सोने के काफी लंबे समय के चार्ट को देखेंगे तो यह विचार सही भी दिखेगा –

Source: http://www.lbma.org.uk/pricing-and-statistics

एक नजर ऊपर के चार्ट पर डालिए। 1970 में सोना करीब $35 का था और 2016 में, आज सोना $1360 का है। मतलब इसने करीब 37 गुना रिटर्न दिया है। लेकिन जब आप इसे CAGR के हिसाब से देखेंगे, तो यह साल दर साल करीब 8% की वृद्धि दिखा रहा है। आमतौर पर इस दौरान दुनिया में मुद्रास्फीति की दर करीब 5 से 6% की रही है। इसका मतलब है अगर आपने सोने में निवेश किया था तो आपने करीब 8% की कमाई की लेकिन दूसरी तरफ आपने मुद्रास्फीति की वजह से 6% गंवा दिया। इस तरह आपने कुल 2% की कमाई की। लेकिन, खासकर भारत जैसे देशों में जहां पर मुद्रास्फीति की दर ज्यादा है वहां पर तो सोने ने कोई कमाई कर के नहीं दी है।

8.4 – सोना, डॉलर, रूपया और ब्याज दर

सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव इस बात से भी प्रभावित होते हैं कि करेंसी के बाजार में क्या चल रहा है और अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें किस तरफ जा रही हैं। तो अगर आप सोने के ट्रेडर हैं तो आपको दुनिया की अर्थव्यवस्था पर नजर रखनी होती है, साथ ही यह भी देखना होता है कि करेंसी के बाजार में और मुद्रा बाजार में ब्याज दरों में क्या बदलाव हो रहे हैं। इन सबके बीच में आपसी संबंध काफी सीधे होते हैं। सबसे पहले डॉलर पर नजर डालते हैं। 

नीचे के ग्राफ को देखिए

Source: https://fred.stlouisfed.org/graph/?g=33vD

ये सोने और अमेरिकी डॉलर का ग्राफ है। इन दोनों के बीच विपरीत संबंध हैं जो कि इस ग्राफ में साफ नजर आ रहे हैं,एक ऊपर होता है तो दूसरा नीचे होता है। इस तरह के संबंध की दो खास वजहें है 

  1. जब डॉलर की कीमत किसी करेंसी के मुकाबले कम होती है, तो दूसरी करेंसी की कीमत बढ़ती है। उस करेंसी की कीमत में आई इस बढ़ोतरी की वजह से सोने जैसी कमोडिटी की मांग में भी तेजी आती है। जब सोने की मांग बढ़ती है तो फिर कीमतें बढ़ती हैं। 
  2. USD में आ रही गिरावट की वजह से निवेशकों की रूचि इसमें कम हो जाती है और इन्वेस्टर अपने पैसे को सुरक्षित निवेश यानी सोने में लगाने लगते हैं। 

लेकिन यह हमेशा सच नहीं होता, कई बार ऐसा भी होता है कि सोना और अमेरिकी डॉलर दोनों बढ़ते हैं। उदाहरण के तौर पर जब सऊदी अरब में संकट हुआ था तो वहां के घरेलू निवेशक सऊदी में निवेश नहीं करना चाहते थे और अपने पैसे को सोने या अमेरिकी डॉलर जैसे सुरक्षित ऐसेट में लगाना चाहते थे। इस वजह से इन दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। 

इससे एक बात तो साफ हो गई है कि सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की कीमत में हो रहे बदलाव का असर पड़ता है। लेकिन सोने पर बाकी दूसरी चीजों का क्या असर पड़ता है और वास्तव में कोई असर पड़ता है या नहीं-यह देखते हैं। उदाहरण के तौर पर अमेरिका के फेडरल रेट में आई बढ़ोतरी की वजह से यूएस डॉलर मजबूत होता है। तो इसकी वजह से, सोने की कीमत में गिरावट आनी चाहिए लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता और अगर मैं सही हूं तो सोने और फेडरल रेट के बीच कोरिलेशन संबंध सिर्फ 0.3 का है।

मुझे पता है कि मैंने पहले कहा था कि अगर डॉलर मजबूत होता है तो सोने की कीमतें नीचे जाती है, और ये सब उसके उलट हो रहा है। लेकिन जो चीजें यूएस डॉलर की कीमतों पर असर डालती है वह वास्तव में सोने पर बहुत ज्यादा असर नहीं डालतीं। 

यह सब थोड़ा उलझन वाला लग सकता है। तो, ऐसे में सोने में ट्रेड कैसे किया जाए, सोने में ट्रेड करने का सबसे अच्छा तरीका यह होता है कि उसकी मांग और सप्लाई पर नजर रखी जाए। वैसे डिमांड और सप्लाई को प्रभावित करने वाली चीजें बहुत सारी होती हैं और उन सब को समझना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन यही एक चीज है जो सोने की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर डालती है और चार्ट में भी ये दिखता है। और चार्ट के आधार पर ही आप टेक्निकल एनालिसिस करके सोने में निवेश कर सकते हैं। 

जब आप इक्विटी में निवेश करते हैं तो फंडामेंटल एनालिसिस बहुत ज्यादा काम आती है लेकिन जब कमोडिटी और करेंसी की बात हो तो टेक्निकल एनालिसिस अच्छा होता है।

8.5 – सोने पर टेक्निकल एनालिसिस

अगर आप टेक्निकल एनालिसिस के बारे में नहीं जानते हैं तो मेरी सलाह होगी कि टेक्निकल एनालिसिस पर हमारे मॉड्यूल को पढ़ें। 

टेक्निकल एनालिसिस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी भी ऐसेट के लिए उसका इस्तेमाल किया जा सकता है- चाहे वह करेंसी हो या कमोडिटी। अब टेक्निकल एनालिसिस का सोने पर इस्तेमाल करते हैं और देखते हैं कि यह कैसे काम करता है। 

जब मैं सोने में ट्रेड करता हूं तो मेरा इरादा बहुत साफ होता है कि यह छोटे समय का ट्रेड रेट है और इस ट्रेड को कुछ दिनों से अधिक मैं अपने पास होल्ड करने वाला नहीं हूं। 

जब भी मैं ट्रेड को चुनना चाहता हूं तो सबसे पहले एक लंबे समय के चार्ट पर नजर डालता हूं। लंबे समय से मेरा मतलब है कि 2 साल या उससे लंबा चार्ट। यहां पर भी मैं वही करूंगा। मैं गोल्ड BEES (ETF) के दो साल के एन्ड ऑफ द डे चार्ट (End of the day) पर नजर डालूंगा जिससे मुझे गोल्ड यानी सोने के बारे में एक मुख्य ट्रेंड के बारे में पता चल सके। साथ में एक महत्वपूर्ण प्राइस प्वाइंट यानी कीमत बिंदु का भी पता चल सके।

ऊपर के चार्ट से मुझे पता चला कि 

  1. सोना 2013 के अंत से गिरना शुरू हुआ और 2015 के अंत तक गिरता ही रहा 
  2. 2015 के अंतिम कुछ महीनों में कीमत एक तरीके से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई थी 
  3. सोने में सितंबर 2015 से दिसंबर 2015 के बीच में एक तरीके का डबल बॉटम बना था 
  4. 2016 की शुरुआत से सोने की कीमतें ऊपर जाने लगी थी 
  5. 2016 की शुरुआत से ही हर गिरावट पर ट्रेडर्स सोने को खरीद रहे हैं 
  6. साफ है कि सोने में मंदी अब नहीं रही है और यह इस बात से नजर आता है कि सोना 2013 की ऊंचाइयों तक वापस पहुंच गया है 

इन सारी बातों के आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि सोने में अब लॉन्ग ट्रेड लिया जा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं सोने में शॉर्ट नहीं करूंगा, जब मुझे एक शॉर्ट करने में फायदा नजर आएगा तो मैं यह जरूर करूंगा। लेकिन जब मैं शॉर्ट करूंगा तो मुझे पता होना चाहिए कि ट्रेडर इस गिरावट का इस्तेमाल खरीद करने के लिए करेंगे क्योंकि वो हर गिरावट पर खरीद रहे हैं। ऐसे में, मैं अपनी शॉर्ट पोजीशन को जल्दी से कवर कर लूंगा। ध्यान दीजिए कि अभी तक मैंने सिर्फ एक मोटा मोटी नजरिया बनाया है लेकिन मैं अभी किसी निश्चित कीमत स्तर को नहीं चुना है। 

अब मैं सोने के छोटी अवधि के चार्ट पर नजर डालूंगा, जिससे मैं ट्रेड करने के सही मौके को चुन सकूं। नीचे के चार्ट पर नजर डालिए। वैसे तो ट्रेडिंग के मौके मुझे चार्ट के दाहिने हिस्से में मिलेंगे लेकिन अभी थोड़ा समय चार्ट के बाएं तरफ पर फोकस कीजिए – 

यह चार्ट 2015 के अंतिम कुछ महीनों से शुरू हुआ है और 2016 की जून तक इसमें बहुत कम चाल दिख रही है। आप कीमत देखें या वॉल्यूम दोनों में आपको यह बात नजर आएगी। कुछ भी वॉल्यूम नहीं है और कीमतें बस गैप अप या गैप डाउन हो रही हैं। क्या आप बता सकते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है? 

सोने के कॉन्ट्रैक्ट 1 साल पहले जारी किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर अक्टूबर 2016 का कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर 2015 में जारी किया गया होगा। लेकिन इस कॉन्ट्रैक्ट में तब तक कोई लिक्विडिटी नहीं आती है जब तक ये अपने एक्सपायरी के पास ना पहुंच जाए यानी अक्टूबर 2016 के करीब ना पहुंच जाए। हां अगर बाजारों में बहुत ज्यादा लिक्विडिटी हो तब शायद इस कॉन्ट्रैक्ट में भी कुछ लिक्विडिटी पहले भी आ सकती है। 

अब चार्ट के बाएं हिस्से पर नजर डालते हैं और ट्रेडिंग के लिए मौके ढूंढते हैं। मैं इस चार्ट को री-पोस्ट करूंगा जिससे मुझे पिछले कुछ समय के कैंडल नजर आ सकें। मैंने 9 और 21 दिन एक्स्पोनेंशियल मूविंग एवरेज को यहां ओवरले किया है।

  1. मौजूदा कीमत इन दोनों शॉर्ट टर्म एवरेज से भी नीचे है। 
  2. पिछले कुछ समय में 30956 के आस-पास 3 प्राइस एक्शन जोन बने हैं (मैंने इन्हें नीले रंग से घेर दिया है)। अभी की मौजूदा कीमत इस स्तर के नीचे है इसलिए 30956 एक रेजिस्टेंस बन जाता है। 
  3. पिछले कुछ समय में हमने एक बेयरिश मारूबोझू (काले रंग से घेर कर दिखाया गया) बनते देखा है जिस ने अच्छा काम किया और ट्रेडर्स में इस पर मुनाफा कमाया होगा।

इन बातों को ध्यान में रखते हुए अब मैं सोने में खरीद के मौके देखूंगा जैसे ही सोना अपने रेजिस्टेंस लेवल 30956 को पार करेगा मैं उसे खरीदूंगा। ध्यान रखिए कि यह दोनों शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज के साथ भी मिलता है। इस वजह से मुझे लॉन्ग पोजीशन बनाने में कोई दिक्कत नजर नहीं आ रही है। लेकिन, अगर सोने की कीमत रेजिस्टेंस के नीचे रहती है तो मैंने ऊपर जो कारण बताए हैं उस वजह से  मुझे शॉर्ट करने का भरोसा नहीं रहेगा। तो ऐसे में मेरा ट्रेड कुछ इस तरह से बनेगा 

– पोजीशन : लॉन्ग 

– कीमत : 30956 के ऊपर 

– टारगेट : 31418 (एक छोटी नीली रेखा बनाई है)

– स्टॉपलॉस : 30700 (मौजूदा कीमत)

– रिवार्ड टू रिस्क जब मैं 30956 पर लॉन्ग हूं : 1:

– एन्ट्री से प्रतिशत चाल – 1.5

रिस्क रिवार्ड के हिसाब से यह एक अच्छा ट्रेड दिख रहा है और चूंकि मुझे 1.5%  की ही चाल चाहिए इसलिए यह 1 दिन में पूरी हो सकती है। 

इस तरह से आपने देखा कि टेक्निकल एनालिसिस का इस्तेमाल सोने जैसी कमोडिटी में भी आसानी से किया जा सकता है। 

पिछले 2 अध्यायों में मैंने आपको सोने के बारे में काफी जानकारी दी है मुझे लगता है कि इसके बाद आप सोने में ट्रेडिंग की शुरुआत कर सकते हैं। 

अब आगे हम चांदी की बात करेंगे।

इस अध्याय की मुख्य बातें 

  1. सोने की कीमतें दिन में दो बार AM और PM सत्र के लिए लंदन में तय की जाती है।
  2. लंदन में कीमत के इस निर्धारण में केवल कुछ निश्चित बैंक ही हिस्सा ले सकते हैं। 
  3. लंदन में कीमत निर्धारण की तरह ही भारत में भी कीमत निर्धारण की एक प्रक्रिया होती है, लेकिन भारतीय ट्रेडर के लिए यह एक चक्र का हिस्सा भर ही होता है क्योंकि इसके लिए भी वह MCX कीमत की ओर देखता है। 
  4. भारत और अमेरिका में सोने की स्पॉट कीमतों में जो अंतर दिखाई देता है वह मुख्य तौर पर ड्यूटी, टैक्स और दूसरे तरीके के शुल्कों की वजह से होता है।
  5. क्योंकि स्पॉट की कीमतें बदलती रहती हैं इसलिए फ्यूचर की कीमतों में भी बदलाव होता है।
  6. डॉलर और सोने में विपरीत संबंध होता है।
  7. कमोडिटी के फंडामेंटल थोड़े मुश्किल होते हैं इसलिए आमतौर पर ट्रेडर्स डिमांड और सप्लाई को देखते हैं। 
  8. डिमांड और सप्लाई मौजूदा कीमतों में नजर आते हैं और साथ ही चार्ट पर भी ये दिखते है। 
  9. आप सोने तथा दूसरी कमोडिटी में टेक्निकल एनालिसिस का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

5 comments

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  1. super learner says:

    sir apke sare module ek no1 h mene tin tin baar pade h plz sir प्राइस एक्शन pe bhi ek module add kr dijiye bahot help milega

  2. Basant Mittal says:

    Thanks sir, for very helpful material…
    Kindly upload Pdf file for all modules.

    I already got 4 certificate in varsity app, but by mistake I seen answers of technical analysis model so can’t attempt certificate exm.
    Can reset it?

    Thanks again

  3. Krishnrao Dhote says:

    आपके द्वारा प्रत्येक अध्याय को जो हिन्दी अनुवाद किया है वह अत्यंत प्रशंसनीय है । इसे पढ़ लेने के बाद हिन्दी भाषीयों के लिए न समझने जैसी कोई बात ही नही है । ज्ञानवर्धन के लिए धन्यवाद ।

    • Kulsum Khan says:

      ऐसे हे पढ़ते रहिये और हमें सपोर्ट करते रहिय। 🙂

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