Module 7   बाजार और टैक्सेशनChapter 2

मूलभूत/बुनियादी बातें

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2.1 – संदर्भ

आयकर विभाग यानी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को लेकर जो डर हमारे दिमाग में बना रहता है उससे बचने का एक ही तरीका है कि हम इनकम टैक्स से जुड़े नियम और कानून के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त करें। भारत में इनकम टैक्स की दरों में 70 के दशक से अभी तक काफी कमी आई है। 70 के दशक में जहाँ ये 90 परसेंट तक हुआ करती थी, अब 2.5 लाख तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। लेकिन इनकम टैक्स फाइल करने में बेपरवाही और टैक्स न भरने की आदत आज भी बनी हुई है। 

हमारा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट लगातार अपने आप को अपग्रेड कर रहा है और ऐसे में रिटर्न नहीं फाइल करना, गलत फाइल करना, और रिटर्न फाइल करते वक्त ज़रूरी जानकारी छिपा लेना जैसी हरकतों के अंजाम खतरनाक साबित हो सकते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास आपके सभी बैंक डीटेल्स होते हैं साथ ही वो आपके कैपिटल मार्केट में किए गए सभी ट्रांजैक्शन की भी जानकारी रखते हैं क्योंकि आपके सारे निवेश PAN (परमानेंट अकाउंट नंबर) से जुड़े हुए होते हैं। अब धीरे-धीरे आधार नंबर भी हर चीज़ से जुड़ता जा रहा है, तो वो दिन दूर नहीं जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपकी कमाई और खर्चे का कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट आपको भेजने लगेगा, ठीक वैसे ही जैसे NSDL/CSDL आपको डीमैट अकाउंट का कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट भेजता है। 

नीचे दिए गए नोटिस को देखें, जो कि एक क्लायंट को भेजा गया है 2015 में। उसने फाइनेंशियल साल 2012/13 में कमोडिटी एक्सचेंज में किए गए सौदों को डिक्लेयर नहीं किया था। नोटिस में उससे इन सौदों को ना डिक्लेयर करने के पीछे की वजह बताने को कहा गया है।.इस लिंक पर क्लिक करके आप उन कोड को देख सकते हैं जिनके तहत इनकम टैक्स विभाग आपको ये नोटिस भेजता है।  Check this link that has a list of various codes in which these notices are sent by the IT department.
हो सकता है कि टैक्स चोरी का इरादा लोगों का ना हो लेकिन बहुत सारे लोग और कई चार्टर्ड अकाउंटेट भी बाज़ार में किए गए निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े टैक्सेशन को पूरे तरीके से नहीं समझ पाते हैं, और इसलिए गलतियां कर बैठते हैं। हमने कुछ साल पहले Z-Connect पर टैक्सेशन सिम्प्लीफाइड नाम का एक ब्लॉग डाला था जिसमें बाज़ार के कारोबारियों के लिए टैक्सेशन के मुद्दे को समझाने की कोशिश की गई थी। पिछले 2 साल में उस ब्लॉग पर हमें हज़ारों सवाल मिले हैं। उनका जवाब देते हुए हमें समझ में आया कि टैक्सेशन के मुद्दे को और अच्छे से समझाने की ज़रूरत है और इसलिए इस मॉड्यूल को तैयार किया गया। 

अगर आप सिर्फ स्टॉक या म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो टैक्स रिटर्न फाइल करना ज्यादा मुश्किल नहीं होता। लेकिन जैसे ही आप इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फिर फाइनेंशियल डेरिवेटिव्स जैसे फ्यूचर्स और ऑप्शन्स में ट्रेड करने लगते हैं, रिटर्न फाइल करना मुश्किल हो जाता है। 

इस मॉड्यूल में हम सभी ज़रूरी सिद्धान्तों को छोटे-छोटे आसानी से समझ में आने वाले अध्यायों में बांटेंगे और कोशिश करेंगे कि ऐसे तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल कम से कम करे जो कि एक CA या टैक्स कंसल्टेंट करता है। इस मॉड्यूल में हम निम्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। 

  1. परिचय
  2. ज़रूरी बुनियादी बातें
  3. बाज़ार के आपके कारोबार को अलग-अलग हिस्सों में बांटना
  4. निवेशक के लिए टैक्स 
  5. ट्रेडर के लिए टैक्स
  6. टर्नओवर, बैलेंसशीट और P&L 
  7. ITR फॉर्म

2.2 इनकम टैक्स क्या है? 

भारत सरकार हर इंसान की आमदनी पर एक टैक्स लगाती है, जिसे इनकम टैक्स कहते हैं। इससे जुडे नियम कानून, इनकम टैक्स एक्ट 1961 पर आधारित होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो आप अपनी आमदनी का एक हिस्सा भारत सरकार को देते हैं। 

मैं टैक्स क्यों भरूं?

भारत में सोशल सिक्योरिटी और मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं दी जाती जैसे कि कई विकसित देशों में दी जाती है। लेकिन सरकार को और बहुत सारे काम करने होते हैं जैसे सरकारी अस्पताल, शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास। इन सबके लिए पैसों की ज़रूरत होती है और टैक्स से ही इस रकम को जुटाया जाता है।

इनकम टैक्स किसे देना होता है?

हर वो इंसान जो एक निश्चित सीमा से अधिक कमाता है, उसे इनकम टैक्स देना होता है। ये सीमा सरकार तय करती है। इनकम टैक्स केवल इंसानों को ही नहीं बल्कि कंपनियों और संस्थानों को भी देना पड़ता है। 

भारत की 130 करोड़ जनता में सिर्फ 5 प्रतिशत जनसंख्या ही इनकम टैक्स देती है जबकि USA जैसे विकसित देश में 45 परसेंट लोग टैक्स देते हैं। इसकी एक वजह तो ये है कि बहुत सारे भारतीय इतना कमाते ही नहीं है कि उन्हें टैक्स देना पड़े। लेकिन एक और वजह ये है कि हमारे देश में टैक्स कल्चर ही नहीं है। 

आप हर वित्त वर्ष में जितनी कमाई करते हैं उसके आधार पर आपको टैक्स देना होता है। भारत में वित्त वर्ष 1 अप्रैल को शुरू होता है और 31 मार्च को खत्म होता है। हर साल को या तो फाइनेंशियल ईयर यानी वित्त वर्ष के तौर पर देखा जाता है या फिर असेसमेंट ईयर यानी आकलन वर्ष के तौर पर।

वित्त वर्ष यानि FY ये बताता है कि आमदानी किस साल में हुई और किसके लिए आप टैक्स दे रहे हैं। इस तरह से FY2019-20 का मतलब है 1 अप्रैल 2019 से शुरू होने वाला साल जो 31 मार्च 2020 को खत्म होगा। 

AY यानी असेसमेंट ईयर (आकलन वर्ष) उस साल को बताता है जब आप इस टैक्स को फाइल करेंगे। मतलब AY2020-21वो साल है जिसमें आप FY2019-20 की आमदनी पर टैक्स फाइल करेंगे। मतलब ये हुआ कि AY2020-21 और FY2019-20 एक ही हैं। तो आप AY2020-21 वाले ITR को इस्तेमाल करेंगे ताकि आप अप्रैल 1 2019 से 31 मार्च 2020 तक के वित्त वर्ष की आमदनी पर टैक्स दे सकें। 

2.3 वित्त वर्ष 2017-18 के लिए भारत में इनकम टैक्स स्लैब

सभी भारतियों को नीचे दिए गए टैक्स स्लैब के आधार पर अपनी हर साल की आमदनी पर टैक्स देना होता है। अगर आप नौकरी करते हैं तो आपको नौकरी देने वाला आपकी तरफ से पहले ही टैक्स सरकार को दे देता है और आपको फॉर्म 16 जारी करता है जो कि इस बात की जानकारी देता है कि आपका टैक्स अदा किया जा चुका है। लेकिन आपको नौकरी देने वाला आपके आमदनी के दूसरे स्त्रोतों को जैसे बैंक से मिला ब्याज, कैपिटल गेन्स यानी पूंजीगत लाभ, किराए से आने वाली आमदनी और दूसरी चीजों को नहीं जानता। इसलिए आपको फॉर्म 16 का इस्तेमाल करने के साथ आपने बाकी सभी आमदनी को जोड़ना होता है और जो भी अतिरिक्त टैक्स हो, उसे इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाना और अदा करना होता है। एक व्यक्ति के लिए (FY20/21) टैक्स स्लैब नीचे दिखाई गई है। 

व्यक्ति (60 साल से कम आयु)

आय सीमा टैक्स रेट/कर दर/आयकर की दरें
0-2.5 लाख रुपये शून्य
2.5 लाख- 5 लाख रुपये 2.5 लाख रुपये के ऊपर की रकम पर 5%
5 लाख -10 लाख रुपये 12,500 रुपये+ 5 लाख से ऊपर की रकम का 20%
10 लाख से ऊपर 112,500 रुपये+ 10 लाख से ऊपर की रकम का 30%

सरचार्ज: इनकम टैक्स का 10% अगर आय 50 लाख से 1 करोड़ के बीच है। 15% अगर आय 1 करोड़ से ज्यादा है।

सीनियर सिटीजन/वरिष्ठ नागरिक (60 साल से 80 साल की आयु)

आय सीमा टैक्स रेट/कर दर/आयकर की दरें
0 – 3 लाख रुपये शून्य
3 लाख- 5 लाख रुपये 3 लाख रुपये के ऊपर की रकम पर 5%
5 लाख -10 लाख रुपये 10,000 रुपये+ 5 लाख से ऊपर की रकम का 20%
10 लाख से ऊपर 110,000 रुपये+ 10 लाख से ऊपर की रकम का 30%

अति वरिष्ठ नागरिक/ सुपर सीनियर सिटीजन (80 साल और उसके ऊपर की आयु)

आय सीमा टैक्स रेट/कर दर/आयकर की दरें
0 – 5 लाख रुपये शून्य
5 लाख -10 लाख रुपये 5 लाख से ऊपर की रकम का 20%
10 लाख से ऊपर 100,000 रुपये+ 10 लाख से ऊपर की रकम का 30%

यदि कुल आय 2.5 से 5 लाख रुपये के बीच है, तो आप 5% कर छूट और प्रभावी रूप से शून्य कर का भुगतान करने का दावा कर सकते हैं।

उपरोक्त सभी आयु समूहों के लिए अधिभार: आयकर का 10% यदि आय 50 करोड़ रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच है। 15% अगर 1 करोड़ रुपये से 2 करोड़ रुपये के बीच आय। 25% अगर 2 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये के बीच आय। 5% से अधिक होने पर 37%।

बजट 2020 ने एक नई कर व्यवस्था शुरू की है, जहां करदाता के पास विभिन्न कटौतियों का दावा करने वाले उपरोक्त स्लैब के अनुसार करों का भुगतान करने का विकल्प होता है (उदाहरण के लिए, ईएलएसएस में निवेश, मकान किराया भत्ता, आदि) या सभी कटौती और विकल्प को छोड़ दें। नीचे दिए गए टैक्स स्लैब के लिए। ऊपर लागू अधिभार।

0 – Rs 2.5lks NIL
Rs 2.5lks – Rs 5lks राशि का 5% जिसके द्वारा आय 2.5lks से अधिक है।
Rs 5lks – Rs 7.5lks
12,500 + 10% राशि जिसके द्वारा आय 5l ks से अधिक है
Rs 7.5lks – Rs 10lks Rs. 37,500 + 15% राशि जिसके द्वारा आय 7.5 lks से अधिक है
Rs 10lks- Rs 12.5lks Rs. 75,000 + 20% राशि जिसके द्वारा आय 10 lks से अधिक है
Rs 12.5lks- Rs 15lks Rs. 1,25,000 + 25% राशि जिसके द्वारा आय 12.5 lks से अधिक है
15lks से अधिक Rs. 187,500 + 30% राशि जिसके द्वारा आय 15 lks से अधिक है

 

इस अध्याय की मुख्य बातें

  1. सही इनकम टैक्स फाइल करना हर भारतीय का दायित्व है। 
  2. आयकर विभाग के पास बाज़ार में आपके किए गए हर कारोबार की जानकारी होती है। 
  3. केवल 5 प्रतिशत भारतीय ही टैक्स देते हैं। 
  4. वित्त वर्ष यानी FY वो वर्ष है जिसमें आमदनी हुई है। असेसमेंट साल-AY वो साल है जिसमें आप इस आमदनी पर टैक्स चुकाते हैं। 
  5. वित्त वर्ष 1 अप्रैल को शुरू होता है और अगले साल की 31 मार्च को खत्म होता है। 
  6. आपका इनकम टैक्स कितना होगा ये तय करने के लिए इनकम टैक्स स्लैब बनाए गए हैं। 
  7. आपकी उम्र के हिसाब से इनकम टैक्स स्लैब में भी बदलाव होता है। 

 

डिसक्लेमर– अपना रिटर्न फाइल करने के पहले एक चार्टर्ड अकाउंटेट की सलाह ज़रूर लें। ऊपर दी गई जानकारियां सिर्फ आपको समझाने के लिए हैं। 

10 comments

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  1. Bhavesh sharma says:

    Sir yeah 2020 me no income tax slabs me jo change huya h wo isme aa gaya h kya

    • Kulsum Khan says:

      हां, यह अध्याय 2020 के नए टैक्स नियमों के अनुसार अपडेट किया गया है।

  2. Brij meena says:

    Plz arrange pdf in hindi

  3. Amar nath says:

    Plz update income tax details according to FY 2020-21

  4. VINOD KUMAR RAWAT says:

    केन्द्रीय कर्मचारी भी ITR-3 भर सकते है कि नही

  5. Amar says:

    Any income tax book in hindi you suggest for better knowledge regarding stock market income

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