Module 8   करेंसी, कमोडिटी और सरकारी सिक्योरिटीजChapter 17

कमोडिटी ऑप्शन

View chapters →

17.1 – अंतत: कमोडिटी ऑप्शन

कमोडिटी में मेरा पहला ट्रेड काली मिर्च फ्यूचर का था, 2005 के अंत में किसी समय या 2006 की शुरुआत में। उसके बाद से, मैं लगातार कमोडिटी बाजार और कमोडिटी एक्सचेंज पर नजर रखे हुए हूं। MCX ने इस दौरान कमोडिटी बाजार को बढ़ाने के लिए काफी काम किया है। नए कॉन्ट्रैक्ट जारी हुए, बाजार में कारोबार बढ़ा और लिक्विडिटी भी। अगर मुझे ठीक से याद है तो करीब 2009 में किसी समय कमोडिटी मार्केट में भी ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू करने की कोशिश की गई थी। जिसे सुनकर मैं काफी खुश हो गया था और मुझे लगा कि ऑप्शन ट्रेडिंग का एक नया अवसर मिलेगा। 

लेकिन दुर्भाग्यवश यह कोशिश पूरी नहीं हो पाई और कमोडिटी मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग नहीं शुरू हो सकी। उसके बाद से कई बार इस पर चर्चा हुई लेकिन यह हमेशा एक अफवाह बनकर ही रह गया। 

लेकिन लगता है अब कमोडिटी बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू हो सकेगी। जून 2017 में सेबी ने कमोडिटी ऑप्शन के लिए मंजूरी दे दी है।

आप इस समाचार को यहां पढ़ सकते हैं  here.

इसके बाद से ही कमोडिटी एक्सचेंज इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि कमोडिटी ऑप्शन के लिए एक ढांचा तैयार किया जा सके और ट्रेडिंग जल्दी से जल्दी शुरू हो सके। इसीलिए मुझे यह जरूरी लगा कि आपको बता दिया जाए कि कमोडिटी ऑप्शन बाजार में आपको किस तरह की ट्रेडिंग की उम्मीद करनी चाहिए। 

जो लोग ऑप्शन ट्रेडिंग के बारे में नहीं जानते हैं मेरी उनको सलाह यह होगी कि ऑप्शन पर हमारे मॉड्यूल को आप यहां पढ़ें। 

फ्यूचर्स की तरह ही ऑप्शन के सिद्धांत भी कमोडिटी के लिए भी वैसे ही रहेंगे। आपको बस इसके बारे में कुछ जरूरी बातें जाननी होगी और इस अध्याय में उन्हीं बातों को बताया जाएगा।

17.2 – ब्लैक 76 

कमोडिटी ऑप्शंस में जो सबसे जरूरी बात आपको जाननी चाहिए वह यह है कि कमोडिटी के ऑप्शन फ्यूचर्स के ऑप्शन होते हैं स्पॉट मार्केट के ऑप्शन नहीं होते। उदाहरण के तौर पर, अगर आप शेयर बाजार में बायोकॉन का कॉल ऑप्शन खरीदेंगे तो इस ऑप्शन के लिए अंडरलाइंग होगा बायोकॉन की स्पॉट कीमत, इसी तरह से अगर आप निफ़्टी ऑप्शन खरीदते हैं तो उसका अंडरलाइंग निफ्टी की स्पॉट कीमत होगी। लेकिन अगर आप कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल का ऑप्शन खरीदेंगे तो यहां पर अंडरलाइंग क्रूड ऑयल की स्पॉट कीमत नहीं होगी, क्योंकि आपको पता ही है कि क्रूड आयल का यानी कच्चे तेल का यहां पर कोई स्पॉट बाजार नहीं है। वास्तव में हमारे यहां किसी भी कमोडिटी का स्पॉट बाजार नहीं है लेकिन सारी कमोडिटी का फ्यूचर बाजार बहुत अच्छे से चलता है। इसलिए कमोडिटी ऑप्शन हमेशा कमोडिटी फ्यूचर पर आधारित होते हैं। 

तो अगर आपको क्रूड ऑयल का ऑप्शन खरीदना है तो आपको याद रखना होगा कि 

  1. इस क्रूड ऑयल ऑप्शन का अंडरलाइंग क्रूड ऑयल की फ्यूचर कीमत है 
  2. क्रूड ऑयल फ्यूचर का अंडरलाइंग है NYMEX (नायमैक्स) पर क्रूड ऑयल की कीमत 

तो इस तरह से इसे एक डेरिवेटिव का डेरिवेटिव माना जा सकता है। लेकिन ट्रेड करने वाले के लिए इस बात का कोई महत्व नहीं है इसलिए आप पर इसका कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। इस ऑप्शन में और स्पॉट बाजार के अंडरलाइंग वाले ऑप्शन में केवल एक तकनीकी अंतर है, और वह है प्रीमियम निकालने का तरीका। आम तरीके के ऑप्शन के लिए प्रीमियम ब्लैक एंड स्कॉल्स मॉडल (Black & Scholes model) से निकाला जाता है जबकि इस तरह के कमोडिटी ऑप्शन में ब्लैक 76 नाम के एक मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। 

इन दोनों मॉडल के बीच में अंतर बस ये है कि दोनो में कंटीन्यूअस कंपाउंडेड रिस्क फ्री रेट (continuous compounded risk free rate) को अलग-अलग तरह से देखा जाता है। मैं यहां पर इसके विस्तार में नहीं जा रहा हूं। लेकिन ये याद रखिए कि आपको कई तरीके के ऑनलाइन ब्लैक एंड स्कॉल्स कैलकुलेटर मिलेंगे लेकिन अगर आपने उसमें कमोडिटी के आंकड़े भी डाले और प्रीमियम और ग्रीक्स निकालना चाहा तो भी आपको सही परिणाम नहीं मिलेगा, क्योंकि ये वहां काम नहीं करता।

17.3 – कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी जानकारी 

हमें अभी तक यह नहीं पता है कि एक्सचेंज इस तरह के ऑप्शन के लिए किस तरह का ढांचा बनाएंगे। लेकिन मैंने एक आदर्श ढांचा बनाने की कोशिश की है और मुझे उम्मीद है कि एक्सचेंज जो ढांचा बनाएंगे वह इससे बहुत अलग नहीं होगा। 

शुरुआत में एक्सचेंज केवल सोने का यानी गोल्ड ऑप्शन शुरू कर सकते हैं, फिर और धीरे-धीरे करके बाकी दूसरी कमोडिटी के ऑप्शन भी शुरू किए जाएंगे। ऑप्शन कैसे होंगे – 

ऑप्शन का प्रकार – कॉल और पुट 

लॉट साइज – क्योंकि यह ऑप्शन फ्यूचर पर आधारित हैं इसलिए इनका लॉट साइज फ्यूचर के लॉट साइज की तरह होगा 

ऑर्डर के प्रकार – हर तरह के ऑर्डर के लिए अनुमति होगी (IOC,SL,SLM, रेगुलर और लिमिट) 

एक्सरसाइज का स्टाइल – उम्मीद है कि ऑप्शन यूरोपियन होंगे 

मार्जिन – ऑप्शन बेचने (राइटिंग) के लिए एक्सपोजर मार्जिन + SPAN देना होगा जबकि ऑप्शन खरीदने के लिए पूरा प्रीमियम अदा करना होगा। डेविलमेंट मार्जिन (Devilment Margin) नाम की एक नई चीज भी आएगी जिस पर मैं आगे चर्चा करूंगा।

अंतिम ट्रेडिंग दिन (सोना/ गोल्ड के लिए) – अंतिम टेंडर दिन के 3 दिन पहले 

स्ट्राइक – एक ऐट द मनी स्ट्राइक (एटीएम/ATM) के अलावा 15 स्ट्राइक उसके ऊपर और 15 स्ट्राइक उसके नीचे। इस तरह से एक सीरीज में कुल 31 स्ट्राइक होंगी।

इसके बाद कुछ बदलाव मिलेंगे। इक्विटी में ऑप्शन ट्रेड करने वाले ट्रेडर एक खास तरीके की ऑप्शन मनीनेस प्रक्रिया के तहत काम करते हैं-  

  1. एट द मनी (ATM) ऑप्शन – ये तब होता है जब स्ट्राइक स्पॉट के आसपास होती है। किसी भी सीरीज में केवल एक स्ट्राइक को ही ATM माना जाता है 
  2. इन द मनी (ITM) –  ATM के नीचे के सभी कॉल ऑप्शन स्ट्राइक और ATM के ऊपर के सभी पुट ऑप्शन स्ट्राइक ITM ऑप्शन माने जाते हैं 
  3. आउट ऑफ द मनी (OTM) – ATM के ऊपर के सभी कॉल ऑप्शन स्ट्राइक और ATM के नीचे के सभी पुट ऑप्शन स्ट्राइक को OTM ऑप्शन माना जाता है 

लेकिन कमोडिटी के मनीनेस में एक नया नाम सामने आएगा क्लोज टू मनी (CTM), यह इस तरह से काम करेगा – 

  1. ATM- सेटलमेंट कीमत के सबसे करीब की स्ट्राइक को ATM माना जाएगा 
  2. CTM – ATM से दो स्ट्राइक नीचे और ATM से दो स्ट्राइक ऊपर को CTM माना जाएगा 
  3. OTM और ITM इक्विटी के जैसे ही होंगे 

सेटलमेंट – फ्यूचर बाजार के M2M सेटेलमेंट के लिए एक्सचेंज उस दिन उस कमोडिटी के सेटेलमेंट कीमत को यानी डेली सेटेलमेंट प्राइस (DSP) को आधार मानता है। इसीलिए एक्सपायरी के दिन के कमोडिटी के DSP को ऑप्शन सीरीज के लिए भी आधार माना जाएगा। 

एक बार देखते हैं कि सेटलमेंट काम कैसे करता है। इस उदाहरण पर नजर डालिए – मान लीजिए किसी कमोडिटी का DSP 100 है और मान लीजिए कि इस कमोडिटी में हर 10 प्वाइंट पर एक स्ट्राइक है यानी स्ट्राइक इंटरवल 10 का है। इस स्थिति में इसकी स्ट्राइक की मनीनेस को देखते हैं –

  1.  ATM = 100
  2. CTM = 80, 90, 100, 110 और 120, ध्यान दें कि यहां हमने ATM के नीचे की दो स्ट्राइक और ऊपर की दो स्ट्राइक को शामिल किया है। 
  3. OTM = 100 के ऊपर के सभी कॉल ऑप्शन और 100 के नीचे के सभी पुट ऑप्शन OTM माने जाएंगे इसलिए इनकी कोई कीमत नहीं होगी ये वर्थलेस होंगे। 
  4. ITM = 100 के नीचे के सभी कॉल ऑप्शन (CTM वाले 80 और 90 के स्ट्राइक भी शामिल हैं) ITM होंगे, इसी तरीके से 100 के ऊपर के सभी पुट ऑप्शन (जिसमें 110 और 120 के CTM भी शामिल हैं) वह भी ITM होंगे

लॉन्ग ऑप्शन वाले वह सभी लोग जो CTM हैं, उनको एक खास तरीके का निर्देश देना होगा जिसे एक्सप्लिसिट इंस्ट्रक्शन (Explicit Instruction) कहा जाएगा, जिसके आधार पर ऑप्शन, फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में बदल जाएगा। फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में यह बदलाव स्ट्राइक पर होगा। उदाहरण के लिए अगर मैं 80 कॉल ऑप्शन होल्ड कर रहा हूं तब मेरे एक्सप्लिसिट इंस्ट्रक्शन पर मेरा कॉल ऑप्शन 80 पर लॉन्ग फ्यूचर पोजीशन में बदल जाएगा। मुझे लगता है कि यह एक्सप्लिसिट इंस्ट्रक्शन ट्रेडिंग टर्मिनल के जरिए दिया जाएगा। 

यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आपने एक्सप्लिसिट इंस्ट्रक्शन नहीं दिया है ताकि आपका CTM ऑप्शन फ्यूचर में बदल जाए तो फिर आप का ऑप्शन वर्थलेस हो जाएगा। 

CTM के अलावा और सभी ITM ऑप्शन अपने आप सेटल हो जाएंगे। आपको यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि ऑप्शन बाजार में सेटलमेंट का मतलब होता है कि वह ऑप्शन अपने आप फ्यूचर पोजीशन में बदल जाते हैं। अगर आप कोई ऐसी पोजीशन होल्ड कर रहे हैं जो CTM नहीं है, ITM ऑप्शन है और आप यह नहीं चाहते हैं कि वह अपने आप सेटल हो जाए तब आपको कॉन्ट्रेरी इंस्ट्रक्शन (Contrary Instruction) देना होगा। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो कॉन्ट्रैक्ट अपने आप सेटल हो जाएगा, मतलब फ्यूचर में बदल जाएगा। 

ऐसे में, आपके दिमाग में एक सवाल उठ सकता है कि ITM ऑप्शन को एक्सरसाइज क्यों नहीं करेंगे? 

ऐसा तब होता है जब ITM ऑप्शन को एक्सरसाइज करने के समय पर आपको जितना टैक्स और दूसरे शुल्क देना पड़े उसकी वजह से आपको कुछ भी पैसा ना मिल रहा हो, ऐसी स्थिति में आपके लिए बेहतर यही है कि आप अपना ITM ऑप्शन एक्सरसाइज नहीं करें और तब आप कॉन्ट्रेरी इंस्ट्रक्शन देंगे जिसके आधार पर आपका ITM ऑप्शन एक्सरसाइज नहीं किया जाएगा।

17.4 – ऑप्शन का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव 

तो मान लीजिए कि आपके पास ITM ऑप्शन (CTM सहित) है और एक्सपायरी पर यह फ्यूचर की पोजीशन में बदल जाएगा। हम सबको पता है कि फ्यूचर की पोजीशन के लिए आपको ब्रोकर के पास मार्जिन जमा करना होता है, तो यह कैसे होगा? मतलब ये कि जब मैं ऑप्शन पर लॉन्ग जाता हूं तो मुझे सिर्फ प्रीमियम देना होता है, मतलब जब मैं ऑप्शन खरीद रहा होता हूं तो मैं उसके साथ अलग से मार्जिन नहीं देता हूं क्योंकि मैं यह उम्मीद कर नहीं करता हूं कि मेरा ऑप्शन, फ्यूचर पोजीशन में बदल जाएगा। 

ऐसी स्थिति से बचने के लिए एक अलग तरह की प्रक्रिया है जिसे डिवॉल्वमेंट मार्जिन (Devolvement margin) कहा जाता है। यहां पर क्या होगा और कैसे होगा मैं आपको बताता हूं –

  1. कमोडिटी ऑप्शन की एक्सपायरी फ्यूचर ऑप्शन के पहले टेंडर तारीख के कुछ दिन पहले होती है। इसका मतलब यह है कि फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपायर होने और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के एक्सपायर होने के बीच में कुछ दिनों का अंतर होगा।
  2. ऑप्शन के एक्सपायर होने के कुछ दिन पहले एक्सचेंज एक जांच करेगा जिसे व्हाट इफ सेनारियो (What If Scenario) कहते हैं और उसके आधार पर एक सेंसटिविटी रिपोर्ट (Sensitivity Report) बनाएगा जिससे यह पता चलेगा कि कौन सी स्ट्राइक हैं जो ITM या CTM हो सकती हैं। 
  3. एक बार इन ऑप्शन की पहचान हो जाए तो एक्सचेंज की तरफ से इन सभी ऑप्शन के लिए एक डिवॉल्वमेंट मार्जिन तय कर दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि इसके बाद ये पता चल जाएगा कि आपको अपने अकाउंट में मार्जिन के लिए कितने पैसे रखने होंगे, जिससे यह पोजीशन फ्यूचर में कैरी फॉरवर्ड हो सके। इस मार्जिन की आधी रकम एक्सपायरी के 1 दिन पहले और बाकी बची हुई आधी रकम एक्सपायरी के दिन अकाउंट में होनी चाहिए तभी यह पोजीशन फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में बदलेगी।

        उदाहरण के तौर पर, गोल्ड ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी 28 नवंबर 2017 को है और फ्यूचर का कॉन्ट्रैक्ट 5 दिसंबर को एक्सपायर हो रहा है। तो ऐसे में, मार्जिन की आधी रकम 27 नवंबर को और बाकी आधी रकम 28 नवंबर को जमा करनी होगी।

  1. अगर आप एक डीप ITM ऑप्शन होल्ड कर रहे हैं तो इससे होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा आपकी मार्जिन की रकम के तौर पर रख लिया जाएगा।
  2. तो आपकी पोजीशन जितनी ज्यादा डीप होगी, आपके लिए अलग से मार्जिन की जरूरत उतनी ही कम होगी। इसका ये भी मतलब है कि CTM ऑप्शन के लिए मार्जिन की जरूरत ज्यादा होगी।
  3. सीधे शब्दों में कहें तो, अगर आप कमोडिटी ऑप्शन होल्ड कर रहे हैं और इसके ITM एक्सपायर होने की संभावना है और आप इसे एक्सपायरी तक रखना चाहते हैं तो आपको एक्सपायरी के पहले मार्जिन की रकम का इंतजाम करना होगा।
  4. ये रकम कितनी होगी, ये कमोडिटी, उसकी एक्सपायरी और टेंडर की तारीख के आधार पर तय होगा।

ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट कैसे प्यूचर में बदलता है इस पर एक नजर डालिए

ऑप्शन पोजीशन बदलाव के बाद
लॉन्ग कॉल लॉन्ग फ्यूचर्स
शॉर्ट कॉल शॉर्ट फ्यूचर्स
लॉन्ग पुट शॉर्ट फ्यूचर्स
शॉर्ट  पुट लॉन्ग फ्यूचर्स

 मुझे उम्मीद है कि जब भी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट जारी होंगे तब हमें ये ढाँचा ज्यादा अच्छे से समझ आएगा। और जानकारी मिलने पर मैं इस अध्याय को अपडेट करूंगा।

इस अध्याय की मुख्य बातें

  1. कमोडिटी ऑप्शन में अंडरलाइंग के तौर पर कमोडिटी का फ्यूचर होगा।
  2. इसके प्रीमियम और ग्रीक्स को निकालने के लिए ब्लैक एंड स्कॉल्स कैलकुलेटर काम नहीं आएगा।
  3. इसकी गणना के लिए ब्लैक 76 मॉडल का इस्तेमाल करना होगा।
  4. ऑप्शन एक्सरसाइज करने पर ये ऑप्शन फ्यूचर की पोजीशन में बदल जाएगा। 
  5. ATM से दो स्ट्राइक नीचे और दो स्ट्राइक ऊपर CTM होगा।
  6. अगर किसी CTM स्ट्राइक वाले ने एक्सप्लिसिट इंस्ट्रक्शन नहीं दिया तो ऑप्शन वर्थलेस हो जाएगा।
  7. ITM ऑप्शन को होल्ड करने वाले को अगर ऑप्शन एकसरसाइज नहीं करना हो तो उसे कॉन्ट्रेरी इंस्ट्रक्शन (Contrary Instruction) देना होगा। आप ऐसा तब करेंगे जब आपको पता हो कि टैक्स और शुल्कों की वजह से आपको कोई मुनाफा नहीं होने वाला है।

 

3 comments

View all comments →
  1. Jay Ram Singh says:

    thanks

  2. Manish says:

    Thank you

View all comments →
Post a comment