Module

Chapter 19

शुरू करने से पहले कुछ ज़रूरी जानकारी

16

19.1 – चार्टिंग सॉफ्टवेयर (The charting Software)

पिछले 18 अध्यायों में हमने टेक्निकल एनालिसिस के कई पहलुओं को सीखा है। यदि आपने सभी अध्यायों को ठीक से पढ़ा और समझा है तो आप निश्चित रूप से टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं। इस अध्याय में आपको टेक्निकल ट्रेडिंग के मौके पहचानने में मदद करेंगे।

इस अध्याय में मैंने जो सुझाव दिए हैं, वे ट्रेडिंग के मेरे अनुभव पर आधारित हैं। 

टेक्निकल एनालिसिस शुरू करने के लिए आपको एक चार्ट विज़ुअलाइज़ेशन सॉफ़्टवेयर (Chart Visualisation Software) की ज़रूरत होगी, इसे ‘चार्टिंग सॉफ़्टवेयर (Charting Software)‘ कहा जाता है। चार्टिंग सॉफ़्टवेयर आपको विभिन्न स्टॉक चार्ट को देखने और उसका विश्लेषण करने में मदद करता है। चार्टिंग सॉफ्टवेयर एक टेक्निकल एनालिस्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 

वैसे तो बाजार में कई चार्टिंग सॉफ़्टवेयर उपलब्ध हैं। लेकिन सबसे लोकप्रिय दो हैं ‘मेटास्टॉक’ (Metastock) और ‘अमीब्रोकर’ (Amibroker)। अधिकांश तकनीकी विश्लेषक इन्हीं दो चार्टिंग सॉफ़्टवेयर में से एक का उपयोग करते हैं। इसका उपयोग करने से पहले आपको इन सॉफ़्टवेयर का लाइसेंस खरीदना होगा। 

वैसे कुछ मुफ़्त चार्टिंग टूल ऑनलाइन उपलब्ध हैं जिनका आप उपयोग कर सकते है। आप इनको याहू फाइनेंस, गूगल फाइनेंस और बिजनेस मीडिया कंपनियों की तमाम वेबसाइटों पर पा सकते हैं। लेकिन मेरी सलाह है कि यदि आप एक टेक्निकल एनालिस्ट बनना चाहते हैं, तो एक अच्छा चार्टिंग सॉफ़्टवेयर ले लें। 

चार्टिंग सॉफ़्टवेयर को आप एक डीवीडी प्लेयर की तरह मान सकते हैं जहाँ आपको फिल्में देखने के लिए डीवीडी किराए पर लेना होगा। जब आपके पास एक चार्टिंग सॉफ़्टवेयर होगा, तो आपको चार्ट को देखने के लिए डेटा फीड लेना होगा। 

डेटा फीड देने वाली कई कंपनियां बाजार में हैं।  आप इनको इंटरनेट पर पा सकते हैं। आपको केवल डेटा विक्रेता को सूचित करना होगा कि आपके पास कौन सा चार्टिंग सॉफ़्टवेयर है, और वह आपको डेटा उसी रूप में प्रदान करेगा जो आपके चार्टिंग सॉफ़्टवेयर के साथ चल सके। एक बार जब आप एक डेटा का सब्सक्रिप्शन खरीद लेते हैं, तो वह आपको पहले सभी ऐतिहासिक डेटा देगा, जिसके बाद हर दिन आपको उसके सर्वर से डेटा अपडेट करना होगा। 

मेरे अनुभव से एक अच्छा चार्टिंग सॉफ्टवेयर (मेटास्टॉक या अमीब्रोकर) का नवीनतम संस्करण खरीदने पर आपको 25,000 रुपये से 30,000 रुपये के बीच का खर्च हो सकता है। डेटा फीड के लिए 15,000 से 25,000 रुपये और जोड़ें। याद रखें कि सॉफ्टवेयर का खर्च एक बार होता है, जबकि डेटा फीड के लिए सालाना फीस होती है। ध्यान दें कि चार्टिंग सॉफ़्टवेयर के पुराने संस्करण आपको बहुत कम में मिल सकते हैं। 

यदि आप चार्टिंग सॉफ़्टवेयर और डेटा के लिए इतना खर्च करने के मूड में नहीं हैं तो आपके लिए एक और विकल्प है ज़ेरोधा का साफ्टवेयर पाई (Pi)। 

जैसा कि आप जानते हैं, ज़ेरोधा के पास एक अपना खुद का ट्रेडिंग टर्मिनल है, जिसे Zerodha Pi कहा जाता है। पाई आपकी कई तरह से मदद करता है; मैं टेकक्निकल एनालिसिस से जुड़ी इसकी कुछ विशेषताओं पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं: 

  1. ह डबल पैकेज हैPi एक चार्टिंग सॉफ्टवेयर है और इसके साथ आपको डेटा फीड भी मुफ्त मिलता है, मतलब ये डबल पैकेज है 
  2. अच्छा विज़ुअलाइज़ेशनPi आपको इंट्राडे चार्ट के साथ साथ कई और समय सीमा वाले चार्ट की देखने में मदद करता है 
  3. आधुनिक फीचर्स Pi में आधुनिक चार्टिंग सुविधाएँ हैं। इसमें 80 टेक्निकल इंडिकेटर और 30 से अधिक ड्राइंग टूल पहले से शामिल हैं
  4. रणनीति की स्क्रिप्टिंग संभवPi में एक स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज भी है जिसमें आप तकनीकी रणनीतियों को कोड कर सकते हैं और ऐतिहासिक डेटा पर उसे टेस्ट  कर सकते हैं। जेरोधा वर्सिटी पर हम जल्द ही ट्रेडिंग रणनीतियों और स्क्रिप्टिंग पर एक मॉड्यूल शामिल करेंगे 
  5. मौके पहचानने की आसानीPi में पैटर्न रेकोगनिशन फीचर (Pattern recognition feature) हैआप स्क्रीन पर एक पैटर्न ला सकते हैं। एक बार जब पैटर्न आ जाता है, तो Pi बाज़ार में उस पैटर्न को खोज निकालेगा।  
  6. Pi से ट्रेड करना संभवPi आपको चार्ट से सीधे ट्रेड करने की सुविधा देता है (टेक्निकल ट्रेडर के लिए ये बड़ी सुविधा है
  7. ऐतिहासिक डेटा डंपPi में एक बहुतड़ा ऐतिहासिक डेटा डंप (50,000 से अधिक कैंडल) है, जिसका मतलब है कि आप अपनी रणनीति का परीक्षण आसानी से कर सकेंगे।  
  8. आपका व्यक्तिगत ट्रेडिंग सहायक Pi के ‘विशेषज्ञ सलाहकार’, आपको बाजार में बन रहे नए पैटर्न के बारे में लाइव सूचना देते हैं 
  9. सुपर एडवांस्ड फीचर्सPi में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनेटिक एल्गोरिदम हैं। ये आपको अपने ट्रेडिंग  करने में मदद करते हैं 
  10. यह मुफ़्त है – ज़ेरोधा अपने सभी ऐक्टिव ट्रेडर को Pi मुफ्त में दे रहा है 

तो आपने देखा कि काफी बड़ी लिस्ट है। इससे पहले कि आप चार्टिंग पैकेज और डेटा फीड को लेने पर कोई फैसला लेते हैं, मैं सुझाव दूंगा कि आप Pi का इस्तेमाल करके देखें। 

19.2 – किस समय सीमा को चुनना है? (Which time frame to choose?)

हमने अध्याय 3 में टाइमफ्रेम यानी समय सीमा पर चर्चा की थी। मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आप इसे एक बार दोबारा पढ़ें ताकि वो आपको याद रहे। 

ट्रेडिंग के अवसर तलाश करते समय टाइमफ्रेम का चयन करना नए निवेशक के लिए शायद सबसे बड़ी दुविधा होती है। ऐसे कई टाइमफ्रेम हैं जिन्हें आप चुन सकते हैं – 1 मिनट, 5 मिनट, 10 मिनट, 15 मिनट, EOD, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक। इतने विकल्पों को देख कर दुविधा हो सकती है। 

समय सीमा जितनी अधिक होगी, ट्रेडिंग सिग्नल उतना अधिक विश्वसनीय होगा। उदाहरण के लिए, एक बुलिश एनगल्फिंग पैटर्न 5 मिनट की जगह 15 मिनट के टाइमफ्रेम पर कहीं अधिक विश्वसनीय होगा। इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए और अपने ट्रेड की लंबाई  के हिसाब से ही हर ट्रेड के लिए समय सीमा को चुनना होगा। 

आप अपने ट्रेड की लंबाई कैसे तय करते हैं? 

यदि आप नए ट्रेडर हैं या यदि आप एक अनुभवी ट्रेडर नहीं हैं, तो मैं आपको दिन के ट्रेड यानी डे ट्रेडिंग से बचने का सुझाव दूंगा। आप ट्रेड करें तो ये सोच कर कि कुछ दिन के लिए पोजीशन होल्ड करेंगे। इसे ‘पोजीशनल ट्रेड’ या ‘स्विंग ट्रेडिंग’ कहा जाता है। एक स्विंग ट्रेडर आमतौर पर कुछ दिनों के लिए अपनी पोजीशन को ओपन रखता है। स्विंग ट्रेडर के लिए सबसे अच्छा लुक बैक पीरियड 6 महीने से एक साल का होता है। 

दूसरी ओर, एक स्कैल्पर एक अनुभवी ट्रेडर होता है; आम तौर पर वह 1 मिनट या 5 मिनट के टाइमफ्रेम का इस्तेमाल करता है। 

एक बार जब आप कुछ दिनों वाले ट्रेड ठीक से करने लगें तो  आप को ’डे ट्रेडिंग’ की तरफ धीरे धीरे बढ़ सकते हैं। मेरा मानना है कि इसमें आपको कुछ समय लगेगा। आप जितने अनुशासन में रहेंगे ये समय उतना ही कम होगा।

19.3 – लुक बैक पीरियड (Look back period)

लुक बैक पीरियड का मतलब है कि ट्रेडिंग का निर्णय लेने से पहले आप पिछले कितने समय के कैंडल को देखना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, 3 महीने के लुक बैक पीरियड का मतलब है कि आप आज के किसी कैंडल को कम से कम पिछले 3 महीनों के डेटा की पृष्ठभूमि में देख रहे हैं। ऐसा करके आप पिछले 3 महीने से कीमत में आ रहे फेरबदल को ठीक से समझ सकेंगे और आज सही फैसला ले सकेंगे।  

स्विंग ट्रेडिंग के लिए सही लुक बैक पीरियड क्या है? मैं सुझाव दूंगा कि एक स्विंग ट्रेडर को कम से कम 6 महीने से एक साल के डेटा को देखना चाहिए। इसी तरह एक स्कैल्पर के लिए पिछले 5 दिनों के डेटा को देखना बेहतर होगा। 

S&R लेवल निकालते वक्त समय आपको लुक बैक पीरियड को कम से कम 2 साल तक बढ़ाना चाहिए।

19.4 – किन स्टॉक्स में ट्रेड करें (The opportunity universe)

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई – BSE) में लगभग 6000 स्टॉक लिस्टेड हैं और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई – NSE) में लगभग 2000 स्टॉक लिस्टेड हैं। क्या आप हर दिन इन हजारों शेयरों में से अपने लिए सही अवसर तलाश सकते हैं? नहीं ना! इसके लिए आपको ऐसे स्टॉक चुनने होंगे जिनमें आप आसानी से ट्रेड कर सकेंस्टॉक का यह समूह ही आपके लिए वह दुनिया या यूनिवर्स होगा जिसमें से आप अपने लिए हर दिन अवसर तलाश सकेंगे

 लेकिन यह स्टॉक्स आप चुनेंगे कैसे? इसके लिए आपको कुछ सिद्धांत बताते हैं:

  1. सबसे पहले देखें कि स्टॉक में पर्याप्त लिक्विडिटी हो। इसको देखने के लिए आप एक बार बिड (bid) और स्क (ask) की गिनती देखें। अगर बिड (bid) और स्क (ask)  के बीच में अंतर कम है तो इसका मतलब है कि स्टॉक लिक्विड है
  1. आप चाहें तो इसके बदले वॉल्यूम का भी पैमाना बना सकते हैं, बस तय कर लें कि कम से कम इतना वॉल्यूम होगा तभी ट्रेड करूंगा। उदाहरण के तौर पर आप केवल उन स्टॉक्स में ट्रेड करने का फैसला कर सकते हैं जिनमें कम से कम 500000 शेयर का वॉल्यूम हो
  1.  यह भी सुनिश्चित कीजिए कि स्टॉक ई क्यू (EQ) सेगमेंट में हो, ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि केवल क्यू (EQ) सेगमेंट के स्टॉक में ही डे ट्रेडिंग करने की अनुमति है। यानी इन्हीं में डे ट्रेडिंग हो सकती हैहालांकि मैंने नए लोगों को डे ट्रेडिंग ना करने की सलाह दी है लेकिन आपने अगर कोई पोजीशन ली है और आपका टारगेट उसी दिन जाता है तो अपनी पोजीशन क्लोज कर लेने और उस स्टॉक से निकल जाने में कोई बुराई नहीं है
  2. आप कोशिश करें कि यह भी सुनिश्चित हो जाए कि यह स्टॉक वैसा नहीं हो जिसे ऑपरेटर चलाते हैं। हालांकि ये पता करना थोड़ा मुश्किल काम है कि ऑपरेटर वाला स्टॉक कौन सा है? इसे जानने का कोई सीधा तरीका नहीं है, यह सिर्फ अनुभव से सकता है

अगर ऐसे स्टॉक्स चुनने में दिक्कत हो रही है जो ऊपर दी ग शर्तों को पूरा करते हो, तो मैं आपको सलाह दूंगा कि आप निफ्टी 50 या सेंसेक्स 30 के स्टॉक में ही बने रहें इंडेक्स स्टॉक्स के नाम से जाने वाले ये स्टॉक खुद स्टॉक एक्सचेंज द्वारा चुने जाते हैं और इनके चुने जाने की प्रक्रिया काफी अच्छी होती है। साथ ही, इनमें ऊपर दी गयी शर्तों का भी पालन होता है 

स्विंग ट्रेडर और स्कैलपर के लिए भी निफ़्टी 50 के स्टॉक्स में ही ट्रेड करना एक अच्छा आईडिया है

19.5 – मौके तलाशना (The Scout)

आइए अब देखते हैं कि उन स्टॉक्स का चुनाव कैसे किया जाए जिनमें हम ट्रेडिंग कर सकते हैं  इसके लिए हम एक प्रक्रिया बनाने की कोशिश करते हैं, जिसको देख कर आप अपने लिए सही ट्रेडिंग के मौके चुन सकते हैं खासकर स्विंग ट्रेडर के लिए यह एक बहुत अच्छा तरीका होगा

अभी तक हमने चार बहुत महत्वपूर्ण चीजों को समझा है:

  1. चार्टिंग सॉफ्टवेयर जिसमें हम ने सलाह दी है कि आप जेरोधा Pi का इस्तेमाल करें 
  2. टाइमफ्रे दिन के अंत के डाटा का इस्तेमाल करें। 
  3. अपॉर्च्यूनिटी यूनिवर्स- निफ़्टी 50 के शेयर 
  4. ट्रेड का तरीका पोजीशनल ट्रेड करें लेकिन जिसमें दिन में ही टारगेट पूरा होने पर पोजीशन बंद करने का रास्ता खुला हुआ हो
  5. लुक बैक पीरियड- कम से कम 6 महीने से 1 साल का डेटा और अगर S&R पर काम कर रहे हैं तो डेटा को 2 साल तक के लिए बढ़ा दें।

इन महत्वपूर्ण चीजों को पूरा करना बहुत जरूरी है। इसके बाद अब मैं बताता हूं कि मैं अपने लिए ट्रेड के मौके कैसे तलाशता हूं। इसे मैनें दो हिस्सों में बाँटा है।

भाग 1 मौके का चुनाव (The shortlisting process)

  1. मैं अपॉर्च्यूनिटी यूनिवर्स के शेयरों के चार्ट को देखता हूं।
  2. इन शेयरों के चार्ट में मैं केवल हाल के 3 या 4 कैंडल पर ही नजर रखता हूं
  3. इन 3 या 4 कैंडल पर नजर रखते समय मैं कोई पहचाना हुआ कैंडलस्टिक पैटर्न तलाशता हूं। 
  4. अगर मुझे कोई पहचाना हुआ कैंडलस्टिक पैटर्न दिख जाता है तो मैं उस स्टॉक को और गहराई से देखता हूं। 

भाग 2 – मौके को परखना (The Evaluation process)

ये सब करने के बाद आमतौर पर मुझे 4 से 5 शेयर मिल जाते हैं जो कि मेरे 50 शेयरों के अपॉर्च्यूनिटी यूनिवर्स का ही हिस्सा होते हैं। अब मैं इन 4-5 स्टॉक को गहराई से जाँचता हूं। आमतौर पर हर स्टॉक के चार्ट पर मैं 15 से 20 मिनट का समय लगाता हूं और देखता हूं कि: 

  1. जो पैटर्न दिख रहा है वो कितना ज्यादा मजबूत है। खासकर मैं यह देखने की भी कोशिश करता हूं कि क्या मुझे पैटर्न के मामले में थोड़ा फ्लेक्सिबल होने की जरूरत है?
    • उदाहरण के तौर पर अगर एक बुलिश मारूबोजू में शैडो है तो मैं ये जानने की कोशिश करता हूं कि इस शैडो की लंबाई उस रेंज के मुकाबले में कैसी है? 
  2. फिर मैं पिछले ट्रेंड पर नजर डालता हूं। बुलिश ट्रेंड के पहले का ट्रेंड नीचे की तरफ यानी डाउनट्रेंड होगा इसी तरह, बेयरिश ट्रेंड में पहले का ट्रेंड ऊपर की तरफ यानी अपट्रेंड होना चाहिए।  
  3. एक पहचाना हुआ पैटर्न मिलने और पिछला ट्रेंड सही दिशा में देख लेने के बाद मैं स्टॉक को और ज्यादा जांचने की कोशिश शुरू करता हूं। 
  4. इसके बाद मैं वॉल्यूम पर नजर डालता हूं वॉल्यूम कम से कम पिछले 10 दिन के एवरेज के बराबर या उससे ज्यादा होना चाहिए। 
  5. कैंडलस्टिक पैटर्न और वॉल्यूम की पुष्टि होने के बाद मैं सपोर्ट (लांग ट्रेड में) और रेजिस्टेंस (शॉर्ट ट्रेड में) को पहचानने की कोशिश करता हूं
    • जहाँ तक संभव हो S&R स्तर ट्रेड के स्टॉपलॉस (कैंडलस्टिक आधारित) के साथ मेल खाना चाहिए। 
    • यदि स्टॉपलॉस से S&R स्तर 4% से अधिक दूर है, तो मैं चार्ट का आगे मूल्यांकन करना बंद कर देता हूं और अगले चार्ट पर चला जाता हूं। 
  6. अब मैं डॉउ पैटर्न की तलाश करता हूं – विशेष रूप से डबल और ट्रिपल टॉप और बॉटम फॉर्मेशन, फ्लैग फॉर्मेशन और रेंज ब्रेकआउट की संभावना के लिए।
    • साथ ही, मैं प्राइमरी और सेकंडरी ट्रेंड भी देख लेता हूं।
  7. यदि अब तक सब सही चलता है यानी ऊपर के 1 से 5 तक सब कुछ संतोषजनक हैं, तो मैं RRR देखना शुरू करता हूं।  
    • RRR पता करने के लिए, रेजिस्टेंस या सपोर्ट के आधार पर अपना टारगेट तय करता हूं।
    • RRR कम से कम 1.5 होना चाहिए।
  8. अंत में मैं  MACD और RSI इंडिकेटर को देखता हूं, अगर वे पुष्टि करते हैं और अगर मेरे पास पैसे हैं तो मैं अपने सौदे का साइज बढ़ा देता हूं।

आमतौर पर 4-5 शॉर्टलिस्ट किए गए स्टॉक में से 1 या 2 ट्रेड के लायक होते हैं। कभी-कभी ट्रेड का एक भी अवसर नहीं होता हैं। ट्रेड ना करने का ये फैसला भी अपने आप में एक बड़ा निर्णय है। याद रखें कि यह एक काफी कड़ी चेकलिस्ट है, अगर कोई स्टॉक चेकलिस्ट की पुष्टि करता है, तो उस ट्रेड के लिए मेरा विश्वास बहुत अधिक बढ़ जाता है। 

एक बात जो मैंने इस मॉड्यूल में कई बार कही है, उसको यहाँ फिर दोहराता हूं – एक बार जब आप कोई ट्रेड करते हैं, तो तब तक कुछ भी न करें जब तक कि आपका टारगेट हासिल न हो जाए या स्टॉपलॉस शुरू न हो जाए। हाँ, आप अपने स्टॉपलॉस को ट्रेल जरूर कर सकते हैं। अगर आपका ट्रेड चेकलिस्ट का पालन करता है तो इसके सफल होने की संभावना अधिक है। 

19.5 स्कैल्पर (The Scalper)

एक अनुभवी स्विंग ट्रेडर के लिए दूसरा विकल्प है स्कैल्पिंग। स्कैल्पिंग करने वाला ट्रेडर बड़ा ट्रेड करता है लेकिन सिर्फ कुछ मिनटों के लिए। कुछ मिनट बाद ही वो इस ट्रेड से निकल जाता है।

ट्रेड का पहला हिस्सा ट्रेड का दूसरा हिस्सा
समय- 10:15 बजे समय- 10:25 बजे
शेयर-इन्फोसिस शेयर-इन्फोसिस
कीमत- 3980 कीमत- 3976
बेचा खरीदा
मात्रा- 1000शेयर मात्रा- 1000 शेयर

 

शुल्क के बाद कुल मुनाफा = 2644 रुपये

ध्यान दें, कुल मुनाफे की ये गणना यह मान कर की गयी है कि आप ज़ेरोधा Pi पर ट्रेड कर रहे हैं, अगर आप एक महंगी ब्रोकरेज दर पर स्कैल्पिंग कर रहे हैं तो मुनाफा कम हो सकता है। स्कैल्पिंग में  मुनाफे के लिए ट्रांजैक्शन चार्ज कम होना बेहद जरूरी है।   

स्कैल्पर एक ऐसा ट्रेडर होता है जिसका सारा फोकस कीमत पर होता है। वो 1 मिनट और 5 मिनट के टाइम फ्रेम वाले चार्ट के आधार पर अपने  ट्रेड का फैसला लेता है। स्कैल्पर दिन में कई ट्रेड करता है। उसकी लक्ष्य साफ होता है – दिन में कई छोटे-छोटे ट्रेड करो और कुछ मिनट तक ही उनको अपने पास रखो। उसको स्टॉक में आने वाले छोटे से मूव से भी फायदा मिल सकता है और वो इसी की कोशिश करता है।

अगर आपको स्कैल्पर बनना है तो आपके लिए कुछ दिशा-निर्देश दे रहा हूं-

    1. हमारे द्वारा ऊपर बताई गई चेकलिस्ट को याद रखें, लेकिन चेकलिस्ट के सभी बिन्दुओं के अनुपालन की उम्मीद न करें क्योंकि ट्रेड की अवधि बहुत कम होती है। 
    2. अगर मुझे स्कैल्पिंग के लिए चेकलिस्ट में सिर्फ 1 या 2 महत्वपूर्ण बिंदु बताने हों तो मैं कैंडलस्टिक पैटर्न और वॉल्यूम को चुनुंगा। 
    3. स्कैल्पिंग करते समय भी 0.5 से 0.75 का RRR ठीक माना जाता है।
    4. स्कैलपिंग केवल लिक्विड स्टॉक में ही किया जाना चाहिए। 
    5. अच्छा रिस्क मैनेजमेंट रखें – जरूरत पड़ने पर फौरन लॉस बुक करने के लिए तैयार रहें।
    6. यह देखने के लिए कि वॉल्यूम कैसे हो रहे  हैं आप बिड और आस्क के अनुपात पर नजर रखें।  
    7. दुनिया के दूसरे बाजारों पर भी नज़र रखें – उदाहरण के लिए अगर हैंग सेंग (हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज) में अचानक गिरावट आई है, तो घरेलू बाजारों में भी अचानक गिरावट आ सकती है।
    8. अपनी लागत कम करने के लिए कम लागत वाला ब्रोकर चुनें।
    9. मार्जिन का प्रभावी ढंग से उपयोग करें, अधिक लीवरेज न लें।
    10. एक विश्वसनीय इंट्राडे चार्टिंग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करें।
    11. यदि आपको लगता है कि दिन अच्छा नहीं जा रहा है, तो ट्रेड करना बंद कर दें और अपने टर्मिनल से दूर चले जाएं।

एक डे ट्रेडिंग तकनीक के रूप में स्कैल्पिंग का इस्तेमाल करने के लिए तेज फैसले और मशीन जैसे काम करने की आदत होनी चाहिए। एक सफल स्कैल्पर बाजार की उठापटक से घबराता नहीं है बल्कि उसको पसंद करता है।


इस अध्याय की मुख्य बातें 

    1. अगर आपको अच्छा टेक्निकल ट्रेडर बनना है तो आपको एक अच्छे चार्टिंग सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ेगी इसमें मेरी पसंद होगी जीरोधा पाई। 
    2. डे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग के लिए दिन के अंत का चार्ट यानी EOD चार्ट का इस्तेमाल करें।
    3. अगर आप स्कैल्पिंग कर रहे हैं तो इंट्राडे चार्ट का इस्तेमाल करें।
    4. स्विंग ट्रेडिंग के लिए कम से कम 6 महीने से 1 साल के लुक बैक पीरियड का इस्तेमाल करें।
    5. शुरुआत करने के लिए निफ्टी 50 को अपॉर्च्यूनिटी यूनिवर्स के तौर पर इस्तेमाल करें।
    6. अवसर की तलाश 2 हिस्सों में करें।
    7. पहले हिस्से में अपने अपॉर्च्यूनिटी यूनिवर्स में से सभी चार्ट को देखें और कुछ स्टॉक को शॉर्टलिस्ट करें। 
    8. दूसरे हिस्से के लिए शॉर्टलिस्ट किए हुए स्टॉक्स के चार्ट को और गहराई से देखें और सही मौका चुने।
    9. स्कैल्पिंग उन लोगों के लिए होती है जो अच्छे या पुराने स्विंग ट्रेडर होते हैं।

16 comments

  1. Rahul raj says:

    मैं अपॉर्च्यूनिटी यूनिवर्स के शेयरों के चार्ट को देखता हूं
    Sirji iska matlab?

    • Mohit Mehra says:

      Hi राहुल, अपॉर्च्यूनिटी यूनिवर्स के शेयरों का मतलब है वह शेयर जिनमे मौका मिलने पर ट्रेड करने के लिए हम तैयार रहेंगे। सारे शेयरों पर ध्यान रखना मुमकिन नहीं है। इस लिए आप कुछ शेयर लिक्विडिटी, वॉल्यूम और सेगमेंट को ध्यान में रखते हुए हम छान सकते हैं।

  2. Laxman kanojiya says:

    यदि स्टॉपलॉस से S&R स्तर 4% से अधिक दूर है, तो मैं चार्ट का आगे मूल्यांकन करना बंद कर देता हूं और अगले चार्ट पर चला जाता हूं।
    Sir example dete samjaye?

  3. SUNIL says:

    I want to know which globel market effected indian stock market most and how.

  4. PRABHASHANKAR KUMAR says:

    Unbelievable study material in Hindi .Good work done by Team zerodha .

  5. gyanendra tiwari says:

    new in this stock market and not know any thing about trading ..can anyone help me to learn .

    • Kulsum Khan says:

      Please read our Modules from the beginning, we also have a mobile application and at the end of each module there is a certification test and quiz, you can download the app.

  6. PRABIR KOLEY says:

    sir please samjhaye with example interday chart and EOD CHART.

  7. Piyush says:

    why there is no bo/co calculator on zerodha???

  8. PRABIR KOLEY says:

    ANEK ANEK DHANYABAD , SIR

  9. Shriram kumar says:

    Zerodha pi chart play store main kab ayegA

Post a comment