Module 9   रिस्क मैनेजमेंट और ट्रेडिंग साइकॉलजीChapter 15

ट्रेडिंग पूर्वाग्रह

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15.1 – दिमाग खेल खेलता है 

क्या आपने इस वीडियो को देखा है

यह एक शो है जिसमें दर्शक कॉल करके अपने स्टॉक मार्केट से जुड़े अपने सवाल करते हैं और शो का एंकर उन्हें इसके जवाब देता है। यह वीडियो उसी तरीके के एक शो का एक हिस्सा है। यहां पर एक दर्शक MRF लिमिटेड के 20000 शेयर को पेपर फॉर्म  से डीमैट में बदलने का तरीका जानना चाहता है। यह शेयर उसके दादाजी ने 90 के दशक में खरीदे थे और तब से उसके पास कागज के सर्टिफिकेट के तौर पर पड़े हैं। 

शेयरों को फिजिकल से डीमैट में बदलने का तरीका दर्शक को बताने के बाद शो का एंकर उसे इन शेयरों की आज की तारीख में कीमत बताता है। 

उस समय MRF के हर एक शेयर की कीमत करीब ₹64,000 थी। उस दर्शक के पास 20,000 शेयर है इसलिए कुल मिलाकर कीमत हुई 

20,000 * 64,000

= 1,280,000,000

यानी 128 करोड़

जरा कल्पना कीजिए 128 करोड़ रुपए 

इस वीडियो को देखने के बाद मेरे दिमाग में कई विचार उठे – 25 साल पहले किसी आदमी ने MRF के शेयर खरीदने का विचार कैसे आया होगा? क्या वह इतनी दूर तक देख सकता था? इतने सालों तक निवेशित रहने के पीछे उसकी प्रेरणा क्या थी? कभी भी उसने इन शेयरों को बेचने की कोशिश क्यों नहीं की? खासकर जबकि शेयर की कीमत शुरुआती निवेश के मुकाबले लगातार कई गुना होती जा रही थी, तब भी उसने इसको बेचा नहीं।

मेरा मानना है कि एक आम निवेशक को अगर यह पता चल जाए कि उस का शेयर 50%,  100% या 200% तक का रिटर्न दे रहा है तो अपने निवेश को तुरंत बेच देता है। लेकिन इस इंसान ने अपने शेयरों को रोक के रखा और उसे बढ़ते हुए देखा 20 गुना यानी 2000% 

यह कैसे हुआ होगा? 

जरा सोचिए, अगर हम यह समझ जाएं कि यह कैसे हुआ, तो हम भी इसी तरीके से अपने लिए संपत्ति जमा कर सकते हैं। 

मैंने इस वीडियो को बार-बार देखा और सोचा कि आखिर यह कैसे हुआ होगा। इसके के बाद मुझे जो समझ आया वो है – 

  • काफी समय पहले उसके दादाजी ने MRF के शेयर खरीदे और उसके बाद इन शेयरों की तरफ जरा भी ध्यान नहीं दिया। 
  • एक दिन उन्हें याद आया होगा कि उनके पास MRF के शेयर पड़े हुए हैं
  • बाद में उन्होंने अपने पोते यानी उस शो के उस दर्शक को इन शेयरों के बारे में बताया 
  • फिर उनके पोते ने यह इन शेयरों को डीमैट में बदलने का फैसला किया 
  • मुझे लगता है कि इन शेयरों को डीमैट फॉर्म में बदलने के बाद वो इन शेयरों को बेचेगा 

मुझे ये पूरा घटनाक्रम काफी रोचक लगती है। इस दौरान क्या और कैसे हुआ होगा, इसके बारे में मुझे जो लगता है वह है – 

  1. उसके दादाजी अपने उस निवेश के बारे में भूल गए होंगे और कहीं दूसरी जगह व्यस्त हो गए होंगे 
  • मुझे यह सही इसलिए लगता है क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो इसके बाद उन्होंने बीच में कभी इन शेयरों को डीमेट फॉर्म में बदलने की कोशिश जरूर की होती 
  1. क्योंकि वह इन शेयरों के बारे में भूल गए थे इसलिए इसकी कीमत के बढ़ने के बारे में उन्होंने कभी ध्यान ही नहीं दिया

इससे हमें क्या पता चलता है? 

मुझे लगता है कि सबसे बड़ी बात जो समझ में आती है वह यह है कि उसके दादाजी को के पास काफी पैसे थे और इसलिए वह MRF के शेयरों के बारे में भूल गए। 

अब जरा सोचिए कि – अगर वह अपने निवेश के बारे में नहीं भूलते तो? अगर उनका कोई दोस्त या कोई ब्रोकर होता जो उन्हें हर दिन कॉल करता और बताता कि MRF के शेयरों की कीमत किधर जा रही है तो? 

आपको क्या लगता है क्या इसके बावजूद भी वह इतने सालों तक इन शेयरों को अपने पास रखते? क्या आपको नहीं लगता है कि अगर उन्हें यह पता चलता कि यह शेयर 100%, 200% या 500% तक का रिटर्न दे रहा है तो क्या वह इन शेयरों को बेच नहीं देते? 

तो इसका मतलब यह है कि वह अपने निवेश के बारे में भूल गए इसीलिए उन्होंने सालों तक निवेश अपने पास पड़ा रहने दिया और आज इसका फायदा उनको मिल रहा है। 

अगर वो इस निवेश को या शेयर को लगातार ट्रैक करते और इस शेयर के साथ हो रहे जुड़ी घटनाओं पर नजर रखते तो आपको क्या लगता है, क्या होता? जैसे दूसरे कई लोग डेटा एनालिसिस करते हैं वो भी एनालिसिस करते। जब लोग एनालिसिस करते हैं तो एनालिसिस सिर्फ डेटा तक ही सीमित नहीं होता, आप उसमें अपनी कल्पनाएं या निर्णय भी जोड़ते हैं। ये निर्णय हमारे अनुभवों पर आधारित होते हैं। इन्हीं निर्णयों को ही पूर्वाग्रह या बायस (Bias) कहते हैं। 

ट्रेडिंग और निवेश की दुनिया में आपके और आपके मुनाफे वाली P&L के बीच में जो चीज होती है वह बायस या पूर्वाग्रह ही होती है। 

इस अध्याय में हम इन्हीं आम पूर्वाग्रहों या बायस (Bias) के बारे में बात करेंगे और आपको बताएंगे कि आप इन से कैसे बच सकते हैं।

15.2 – कंट्रोल का भ्रम (इल्यूजन ऑफ कंट्रोल / Illusion of Control)

सबसे पहले उस पूर्वाग्रह को देखते हैं जो आमतौर पर हर ट्रेडर और निवेशक के दिमाग में होता है। नीचे के चार्ट पर नजर डालिए, यह एक ऐसा चार्ट है जो किसी भी टेक्निकल एनालिस्ट के कंप्यूटर में आपको दिख जाएगा। इस चार्ट में जो चीजें आपको दिखेंगी वह हैं 

  1. प्राइस एक्शन के लिए कैंडलस्टिक चार्ट (Candlestick chart)
  2. वोलैटिलिटी को देखने के लिए बॉलिंगर बैंड (Bollinger Band)
  3. रिट्रेसमेंट को देखने के लिए फिबोनाची रिट्रेसमेंट (Fibonacci Retracement)
  4. सपोर्ट और रेजिस्टेंस जानने के लिए पीवट प्वाइंट (Pivot Point)
  5. वॉल्यूम चार्ट 
  6. ATR 
  7. स्टोकैस्टिक इंडिकेटर (Stochastic Indicator)

मुझे पक्का भरोसा है कि 10 में से 8 टेक्निकल ट्रेडर के पास एनालिसिस के लिए ऐसा ही सेटअप होगा, वो चार्ट को ऐसे ही देखते होंगे। जिन लोगों को टेक्निकल एनालिसिस नहीं आती है या जिन्हें चार्ट के बारे में नहीं समझ में आता, उनको यह चार्ट डरा सकता है क्योंकि इस इस चार्ट में काफी ज्यादा चीजें हैं।


इस चार्ट का हर हिस्सा ट्रेडर को एक नई बात बताता है। लेकिन इन बातों के अलावा यह चार्ट उसके दिमाग को एक अलग स्तर पर कुछ और संकेत भी देता है। 

क्योंकि यह चार्ट काफी जटिल है और बहुत सारे लोग इसको समझ नहीं सकते हैं – इसीलिए ट्रेडर को यह लगता है कि वह एक ऐसे विषय को जानता और समझता है जो आम लोगों को समझ में नहीं आता और इसलिए वह यह मान बैठता है कि उसे स्टॉक के बारे में सब कुछ पता है क्योंकि उसके पास बहुत ज्यादा जानकारी है। 

आमतौर पर इसे इल्यूजन ऑफ कंट्रोल कहा जाता है। टेक्निकल ट्रेडर के लिए ये सबसे ज्यादा बड़ा ट्रेडिंग पूर्वाग्रह होता है। आपको भी यह दिखता होगा, जब आप किसी ट्रेडर को यह कहते हुए सुनते हैं कि यह स्टॉक 500 के ऊपर तो बिल्कुल भी नहीं जाएगा।  कई बार आप उन्हें यह कहते हुए भी सुनते हैं कि इस स्टॉक में पुट खरीदना चाहिए और जब आप पूछेंगे कि क्यों, तो वह कहते हैं कि बस मैं कह रहा हूं ना आप बस खरीदिए 

वो ऐसा क्यों करते हैं 

क्योंकि ट्रेडर तकनीकी रूप से मुश्किल चीजों की तरफ आकर्षित होते हैं जब वो मुश्किल चार्ट को देखते हैं और उसका अर्थ समझ पाते हैं तो उन्हें काफी अच्छा लगता है। उन्हें एकदम वैसे ही लगता है जैसे आग से खेलना और सुरक्षित बचना। बाजार काफी जटिल होते हैं और ये माना जाता है कि इस जटिल चीज से जीतने के लिए जटिल एनालिसिस जरूरी है। साथ ही, जब ये पता हो कि इसे सिर्फ आप ही समझ सकते हैं तो और भी अच्छा लगता है। 

इसी व्यवहार को इल्यूजन ऑफ कंट्रोल कहा जाता है। 

याद रखिए कि आपको चार्ट से कितने भी संकेत मिल रहे हों, आप कितने भी अच्छे से भी डेटा एनालिसिस कर रहे हों, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि सभी नतीजे आपके कंट्रोल में हों। अंत में बहुत सारे ऐसे नतीजे आएंगे जिनके बारे में शायद आपने कभी सोचा भी ना हो। जिन पर आपका कंट्रोल ना हो। 

इस व्यवहार से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है, आप नतीजों और आंकड़ों पर ही नजर रखें। अगर आप ट्रेडिंग स्ट्रैटजी बना रहे हैं तो आपको यह जानना है कि अगले ट्रेड में मुनाफा होने की कितनी संभावना है। जब आप बाजार को इस नजरिए से देखने लगेंगे तो आप अपने आप सच्चाई का सामना कर रहे होंगे। हर तरफ से आने वाली तरह-तरह की सलाह और एनालिसिस का आप पर असर नहीं पड़ेगा। 

वैसे आपको एक बात पता होनी चाहिए सबसे अच्छी एनालिसिस वह होती है जहां पर चीजें सबसे सरल और आसान हों। जटिलता कभी भी अच्छा होने की गारंटी नहीं है। एक ट्रेडर के तौर पर आपको हमेशा यह बात याद रखनी चाहिए और हमेशा डेटा के आधार पर अपनी रणनीति बनानी चाहिए।

15.3 – ताजेपन का पूर्वाग्रह (रीसेंसी बायस / Recency Bias)

एक और पूर्वाग्रह जिससे सभी ट्रेडर्स ग्रसित होते हैं, चाहे उन्होंने बाजार में कितना भी समय गुजारा हो, लेकिन कभी ना कभी इसमें फंस ही जाते हैं। इसको एक ताजा उदाहरण से समझते हैं। 

अगर आपने कैफे कॉफी डे इंटरप्राइजेज (CCD) को ट्रैक किया है तो आपको पता होगा कि कंपनी में क्या चल रहा है और उसी कीमत कैसे चल रही है। कंपनी पर इनकम टैक्स विभाग की नजर है कंपनी पर टैक्स चोरी और अपनी आमदनी छुपाने का आरोप है। कुछ दिनों पहले इकोनॉमिक टाइम्स में एक खबर छपी थी जिसकी हेडलाइन थी 

मैं एक बात हमेशा मानता हूं कि अगर किसी कंपनी का कॉरपोरेट गवर्नेंस का रिकॉर्ड अच्छा ना हो तो उस कंपनी में लंबे समय का निवेश करने से बचना चाहिए, चाहे कंपनी में निवेश कितना भी आकर्षक लग रहा हो। इतिहास हमें बताता है कि ऐसा निवेश हमेशा ही नुकसान करता है। अपनी इस राय की वजह से और CCD में हो रही घटनाओं की वजह से मैं CCD में निवेश करने से बचूंगा। 

लेकिन अगर आपने उसने पहले से निवेश किया हुआ है और यह खबर आती है तो? अगर यह मान लिया जाए कि यह खबर सच है तो पहली चीज तो यह होगी कि मैं इस निवेश में से बाहर निकल जाउंगा, चाहे उस कंपनी में कितने भी पैसे लगे हुए हैं और उस पर कितना भी मुनाफा या नुकसान हो रहा हो। 

मेरे एक पारिवारिक मित्र ने CCD में निवेश किया था। इस समाचार से आने के कुछ दिनों बाद उसने मुझे कॉल किया और मुझसे मेरी राय पूछी। तब तक इस खबर को आए हुए 2 से 3 दिन हो चुके थे और इससे मची हुई हलचल कुछ कम हो गई थी। उसने जब पूछा तो मैंने उसे सलाह दी कि इस निवेश में से निकल जाना चाहिए। तब उसने CCD का चार्ट निकाला और मुझे उसे देखने को कहा –


जैसा कि आप देख सकते हैं तेज गिरावट के बाद इसमें हरे रंग का कैंडल बना है जिससे यह लगता है कि वहां पर कुछ खरीदारी आ रही है। शायद कुछ ट्रेडर और निवेशक इस कम दाम पर इसे खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। 

लेकिन अगर कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दे पर आप इस निवेश से निकलना चाहते हैं, तो आपको निकल जाना चाहिए। लेकिन मेरे मित्र ने मुझसे कहा कि क्या यह बेहतर नहीं होगा कि मैं कुछ समय के लिए इस स्टॉक में रुका रहूं, शायद मुझे पहले से बेहतर कीमत मिल जाए। 

इसके बाद मैंने उसे और समझाने की कोशिश नहीं की। 

लेकिन आपको क्या लगता है, मेरे मित्र के दिमाग में क्या चल रहा था, वह क्यों स्टॉक में रुकना चाहता था, क्या हरे रंग का ताजा कैंडल इस बात से बड़ा था कि इस कंपनी ने अपनी आमदनी को छुपाया और क्या इस कैंडल से कंपनी को कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मामले में क्लीन चिट मिल गयी थी। 

मुझे ऐसा नहीं लगता।  

लेकिन यह कैंडल एक काम करता है, वो एक ऐसा पूर्वाग्रह पैदा करता है जिसे रीसेंसी बायस कहते हैं। रीसेंसी बायस आपको ताजा घटनाओं और सूचनाओं पर भरोसा करने का पूर्वाग्रह पैदा करता है और पुरानी घटनाओं की और सच्चाई की तरफ देखने से रोकता है। मेरे दोस्त के साथ एकदम यही हो रहा था, कुछ हरे कैंडल उसको तेजी का भरोसा दिला रहे थे। हो सकता है कि वहां पर थोड़ी सी तेजी बने भी, लेकिन कॉरपोरेट गवर्नेंस का मुद्दा ना तो खत्म हुआ था और ना ही स्टॉक अब निवेश के लायक रह गया था। 

लेकिन रीसेंसी बायस आपके निर्णय करने की क्षमता को कमजोर कर देता है। यह आपको ताजा घटनाओं को ज्यादा महत्व देने के लिए कहता है जो कि शायद सही नहीं है। 

इस पूर्वाग्रह से बचने का सिर्फ एक ही तरीका होता है कि आप बड़ी तस्वीर को देखें यानी घटनाओं को पूरी पृष्ठभूमि के साथ देखें ना कि सिर्फ एक टुकड़े को देखें।

इस अध्याय की मुख्य बातें

  1. बाजार जटिल होते हैं लेकिन उसकी एनालिसिस भी जटिल हो यह जरूरी नहीं है। 
  2. ट्रेडर कई बार आपने चार्ट को ज्यादा जटिल बना देते हैं। इससे उन्हें यह लगता है कि अब उन्हें कोई हरा नहीं सकता। उन्हें एक कंट्रोल की अनुभूति होती है। 
  3. इल्यूजन ऑफ कंट्रोल की वजह से आप घंटों डेटा निकाल सकते हैं जबकि उसकी कोई जरूरत नहीं होती। 
  4. अधिक डेटा का मतलब हमेशा अधिक सूचना नहीं होता है।
  5. रीसेंसी बायस आपको पिछली घटनाओं को देखने से रोकता है जबकि उनका बाजार पर काफी असर हो सकता है।
  6. घटनाओं की बड़ी तस्वीर को पूरी पृष्ठभूमि के साथ देख कर आप रीसेंसी बायस का शिकार होने से बच सकते हैं।

3 comments

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  1. sunil says:

    dhanywad team zerodha

  2. AJAY SURYAVANSHI says:

    sir aapko nhi lagta vo call fake hogi

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