Module 9   रिस्क मैनेजमेंट और ट्रेडिंग साइकॉलजीChapter 16

ट्रेडिंग पूर्वाग्रह – भाग 2

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16.1 – एंकरिंग बायस 

मैंने शेयर बाजार में अलग-अलग भूमिकाओं में 13 साल गुजारे हैं, एक ट्रेडर के तौर पर, निवेशक के तौर पर, ब्रोकर के तौर पर, मनी मैनेजर के तौर पर, एनालिस्ट के तौर पर और भी बहुत सारी भूमिकाएं मैंने अदा की हैं। मैंने खुशी वाले दिन भी देखे हैं और बुरे दिन भी देखे हैं। इस दौरान मैंने काफी कुछ सीखा है। मुझे ऐसा लगता है कि बाजार में खुशी या दुख हमेशा किसी ट्रेड के अच्छे या बुरे होने से नहीं जुड़े होते। हां, जब आप मुनाफा कमाते हैं तो आपको खुशी होती है और जब आपको नुकसान होता है तो आपको दुख होता है, लेकिन यही भावनाएं कई बार ऐसे ट्रेड से भी आती हैं जिसको आपने किया ही नहीं है। मैं आपको स्टॉक मार्केट से जुड़े अपने आजतक के सबसे बड़े दुख या पछतावे के बारे में बताता हूं। 

पिछले कुछ सालों में, अगस्त/ सितंबर 2013 का समय मेरे हिसाब से लंबे समय का पोर्टफोलियो बनाने के लिए सबसे अच्छा समय था। बहुत सारे अच्छे स्टॉक दाम पर मिल रहे थे। मैं काफी भाग्यशाली था कि मुझे यह स्थिति पता थी और मैं बाजार में था। मैं भी अपना इक्विटी पोर्टफोलियो बना रहा था। अपने पोर्टफोलियो के लिए सही स्टॉक चुनना मेरे लिए काफी मुश्किल हो रहा था क्योंकि बाजार में उस समय बहुत सारे ऐसे स्टॉक थे जिनको चुना जा सकता था। इनमें से मुझे अपने लिए अच्छा मौका चुनना था, वास्तव में बेयर मार्केट में ऐसा ही होता है आपको बहुत सारे मौके मिलते हैं।

मैंने अपने पोर्टफोलियो के लिए कुछ स्टॉक चुने, उनको खरीदा आज तक उन्हें अपने पास रखे हुआ हूं। लेकिन मैंने कुछ अच्छे स्टॉक छोड़ दिए थे जैसे MRF, बजाज फिनसर्व आदि। जिन स्टॉक को मैंने छोड़ा, उनको छोड़ने का फैसला इस आधार पर लिया कि बाकी स्टॉक में निवेश मुझे ज्यादा आकर्षक लग रहा था। उसके बाद से, MRF और बजाज फिनसर्व ने बहुत ही अच्छा परफॉर्मेंस दिया है लेकिन मैं अपने फैसले को लेकर जरा भी विचलित नहीं हूं। 

लेकिन सुंदरम क्लेयटन लिमिटेड Sundaram Clayton Limited में निवेश न करने का फैसला आज भी मुझे दुख देता है। मेरे हिसाब से ये बाजार में मेरी सबसे बड़ी गलती रही है। 

इस चार्ट पर नजर डालिए – 

मैंने इस स्टॉक पर भी अपना रिसर्च किया था और मुझे लगता था कि यह स्टॉक खरीदने लायक है। मैं जिस स्तर पर इस स्टॉक को खरीदना चाहता था उसे मैंने गोले से घेर कर दिखाया है – करीब ₹270 प्रति स्टॉक की कीमत पर। मुझे पूरा भरोसा था कि क्योंकि यह बेयर मार्केट है इसलिए मैं इसे 270 या उससे नीचे खरीद ही लूंगा। 

स्टॉक थोड़ा सा ऊपर बढ़ा और करीब 280 पर चला गया, लेकिन मैं अपने फैसले पर अड़ा रहा। मैंने इंतजार किया। स्टॉक की कीमत 290 पर पहुंच गई, मैं फिर भी इंतजार करता रहा। एक दो दिनों बाद, बाद स्टार्ट की कीमत 310 तक पहुंच गई लेकिन फिर भी मैंने अपने आप को भरोसा दिया कि स्टॉक फिर से 270 पर आएगा क्योंकि बेयर मार्केट चल रहा है। मैं जिस कीमत को अपने लिए सबसे अच्छा मानता था उस पर 15% का प्रीमियम देने को तैयार नहीं था। 

अब तक आपको समझ में आ ही गया होगा कि यह शेयर वापस 270 पर कभी नहीं आया और मैं इसे कभी नहीं खरीद पाया उसके बाद इस स्टॉक में कुछ ऐसी रैली हुई –

मैंने 270 की इस कीमत को गोले से घेर कर दिखाया है, इसी जगह पर कीमत को लेकर मेरे दिमाग में उलझन बनी थी।

मैंने शायद अपनी जिंदगी के निवेश के सबसे बड़े मौके को गंवा दिया था क्योंकि मेरे दिमाग ने मेरे साथ एक खेल खेल लिया था। औपचारिक भाषा में कहें तो सुंदरम क्लेयटन लिमिटेड (sundaram-clayton ) को मेरे ना खरीद पाने की सबसे बड़ी वजह थी – ट्रेडिंग का नामी पूर्वाग्रह या बायस जिसे एंकरिंग बायस कहते हैं। 

मैंने विकीपीडिया पर जाकर एंकरिंग बायस के बारे में पढ़ा तो मुझे इसके लिए एक नया शब्द में मिला, इसे फोकलिज्म (Focalism) कहते हैं। एंकरिंग बायस कुछ पूर्वाग्रहों के एक समूह का हिस्सा है जिसे सामूहिक रूप से कॉग्निटिव बायस (Cognitive Biases) कहते हैं। कॉग्निटिव बायस हमारे सोचने की प्रणाली में एक गड़बड़ी पैदा करता है जिसकी वजह से हमारे फैसले लेने की क्षमता पर असर पड़ता है। 

एंकरिंग बायस का असर होने पर – जो सूचना हमें सबसे पहले मिलती है हम सूचना के उसी स्तर पर रुक जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, मेरे अपने मामले में मैंने जो पहली कीमत अपने टर्मिनल पर देखी थी वह 270 थी और मैं उसी पर अटक गया। इस इस तरह से, 270 मेरे लिए एक प्राइस एंकर बन गया। 

आप जरा अपनी ट्रेड में अब तक जो किया हो उस पर पर नजर डालिए, कितनी बार ऐसा हुआ है कि आपने खरीदने का कोई आर्डर या स्टॉपलॉस का कोई आर्डर सिर्फ इसलिए नहीं डाला क्योंकि आपको जो कीमत सही लगती थी वह कभी नहीं आई, जबकि आगे चलते हुए स्टॉक ने बिल्कुल उसी तरीके का परफॉर्मेंस दिया जैसी कि आपको उम्मीद थी। आमतौर पर ऐसे मामलों में, आप को जो कीमत सही लगती है और जो कीमत बाजार में उपलब्ध है उन दोनों के बीच का अंतर कुछ रुपयों का ही होता है, लेकिन हमारा दिमाग हमें इसकी अनुमति नहीं देता। 

सभी दूसरे पूर्वाग्रहों या बायस की तरह एंकरिंग बायस का भी कोई इलाज नहीं है, सिवाय इसके कि आप इसके बारे में अवगत रहें और उस हिसाब से अपनी सोच को बदलते रहें।

16.2 – फंक्शनल फिक्सेडनेस 

एक और कॉग्निटिव बायस है जिसके बारे में आपने ट्रेडिंग की दुनिया में शायद ज्यादा नहीं पढ़ा होगा, लेकिन मुझे लगता है कि यह ट्रेडर को और खासकर डेरिवेटिव ट्रेडर पर काफी ज्यादा असर डालता है। 

पहले समझते हैं कि फंक्शनल फिक्सेडनेस (Functional Fixedness) क्या है और उसके बाद ट्रेडिंग की दुनिया में इसके असर पर चर्चा करेंगे।  

मेरे ऑफिस के पास एक जूस की दुकान है। मैं वहां जूस पीने जाता हूं। एक बार मैं वहां गया और ऑरेंज जूस मांगा। लेकिन जूस वाला अपने मिक्सर के जार (Jar) को ठीक करने में व्यस्त था। उसके जार का हैंडल ढीला था उसको ठीक करने के लिए वो दुकानदार स्क्रूड्राइवर खोज रहा था।  स्क्रूड्राइवर उसे नहीं मिल पा रहा था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो आगे काम कैसे करे।

तभी उसका दूसरा साथी दुकान में आया। उसने पूरे मामले को समझा और फिर वहां पड़े हुए एक चम्मच को उठाया और उसके पिछले हिस्से से स्क्रूड्राइवर का काम लेते हुए जार को कस दिया। समस्या दूर हो गई और मुझे जूस दे दिया गया। 

यह घटना अपने आप में फंक्शनल फिक्सेडनेस (Functional Fixedness) को पूरी तरीके से बताती है। यह एक तरीके का कॉग्निटिव बायस है। यह किसी भी इंसान को किसी वस्तु का सिर्फ वही एक इस्तेमाल करने तक के लिए रोकता है, जो इस्तेमाल हमेशा होता आया है। हम किसी चीज का इस्तेमाल तय कर लेते हैं और पूरी जिंदगी उसी तरीके से गुजार देते हैं। जैसे कि हमें लगता है कि किसी स्क्रू को टाइट करने के लिए सिर्फ स्क्रूड्राइवर की ही जरूरत होती है और उसके बिना यह काम नहीं किया जा सकता। जबकि एक साधारण चम्मच से यह काम आसानी से किया जा सकता है। बस समस्याओं के समाधान के लिए नए तरीके ढूंढने की जरूरत है। 

ट्रेडिंग में भी इसी तरह से कई बार फंक्शनल फिक्सेडनेस (Functional Fixedness) हमारी सोच को एक दायरे में बांध देती है। आइए एक उदाहरण पर नजर डालते हैं। 

मान लीजिए आपके ट्रेडिंग अकाउंट में ₹100,000 हैं। आपको निफ्टी में ट्रेडिंग का एक शानदार मौका दिखाई दे रहा है। निफ्टी के इस सौदे को आप 2 से 3 दिनों तक होल्ड करना चाहते हैं। अब अगर इस सौदे को आप दो या तीन दिन तक होल्ड करना चाहते हैं तो आपको प्रोडक्ट टाइप NRML भरना होगा। इस ट्रेड के लिए आपका कुल ₹65,000 का मार्जिन ब्लॉक हो जाएगा।

तो अगर आपने शाम के 3:20 के पास ये ट्रेड किया और अपनी पोजीशन को कैरी फॉरवर्ड किया, तो आपके ₹65,000 ब्लॉक हो जाएंगे और आपके ऊपर अकाउंट में ₹35,000 का बैलेंस बचेगा, जिसको आप अगले दिन किसी और ट्रेड के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। 

अगले दिन जब बाजार खुलता है तो निफ्टी ऊपर की तरफ चढ़ने लगता है, जिधर आप चाहते थे। आपको फायदा होता है और आप खुश होते हैं। 

 मान लीजिए तभी आपको इंट्राडे ट्रेडिंग का एक और बड़ा मौका दिखाई देता है। TCS के स्टॉक फ्यूचर में जिसके लिए आपको 60,000 का MIS मार्जिन देना पड़ेगा। अब आप क्या करेंगे? आपको ₹25,000 की कमी पड़ेगी क्योंकि आपके पास ₹35,000 का ही मार्जिन बचा हुआ है। ऐसे में आप TCS का वह इंट्राडे ट्रेड नहीं ले पाएंगे। 

लेकिन यहां पर असली गुनहगार फंक्शनल फिक्सेडनेस (Functional Fixedness) है।  हम मान लेते हैं कि ओवरनाइट पोजीशन के लिए ब्लॉक NRML मार्जिन अब पूरी तरह से ब्लॉक है और उसका इस्तेमाल नहीं हो सकता, हम यह नहीं समझते कि जब तक यह पोजीशन स्क्वेयर ऑफ नहीं की जाए तब तक वो पूंजी हमारी पूंजी ही है। 

अगर हम यहां थोड़ा नए तरीके से सोचें और कुछ मेहनत करें, तो, हम आसानी से उस ओवरनाइट पोजीशन को भी रख सकते हैं और यह इंट्राडे मौका भी ले सकते हैं। यह ऐसे काम करेगा –

  1. दिन की शुरुआत में आपके पास 35,000 की मार्जिन है और नए इंट्राडे सौदे के लिए आपको 25,000 की कमी पड़ रही है 
  2. आपको अपने NRML निफ्टी की पोजीशन को MIS पोजीशन में बदलना होगा, जब आप यह करेंगे तो आपकी ब्लॉक मार्जिन 65,000 के बजाए सिर्फ 26,000 की मार्जिन ही रह जाएगी। बाकी ₹39,000 वापस खुल जाएंगे 
  3. अब आपके पास 35,000 और 39,000 की दो मार्जिन मिलाकर करीब दिन के लिए 74,000 के पूंजी बचेगी 
  4. 74,000 में से आप आसानी से 60,000 की MIS मार्जिन दे करके अपना इंट्राडे ट्रेड ले सकेंगे और उसके बावजूद आपके पास 14,000 की मार्जिन बची रहेगी। 
  5. दिन खत्म होने के पहले आप आसानी से अपना TCS वाला MIS ट्रेड यानी इंट्राडे ट्रेड को स्क्वेयर ऑफ करेंगे। 
  6. अब वापस सारे पैसे आपको मिल जाएंगे इस तरह से आपके अकाउंट से वापस 74,000 बचेंगे 
  7. अब बस सिर्फ यह करना है कि निफ्टी ट्रेड को वापस MIS से NRML में कन्वर्ट करना है और उस पोजीशन को कैरी फॉरवर्ड करना है। 

इसे काईट (Kite) में कैसे किया जा सकता है इसका चित्र हम नीचे दिखा रहे हैं

16.3 – कन्फर्मेशन बायस

नीचे दिखाए गए टाटा मोटर्स के चार्ट पर नजर डालिए – 

मैंने इस चार्ट में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को दिखाया है

  1. स्टॉक अभी 430 पर है 
  2. 430 वास्तव में एक प्राइस एक्शन जोन है क्योंकि यहां इस कीमत पर पिछले दिनों कुछ प्रतिक्रियाएं हुई हैं 
  3. अगस्त की शुरुआत में कीमत टूट कर 430 से टूटकर 370 तक पहुंच गई थी 
  4. स्टॉक की कीमत वापस 370 पर जाकर स्थिर हुई जो कि वहां पर बन रहे डबल और ट्रिपल बॉटम से दिख रहा है 
  5. 370 पर जाने के बाद कीमत लगातार वापस चढ़ती रही है और वापस 430 तक आ गयी है। अभी भी कीमत 430 के आसपास है 

इन सब बातों को ध्यान देने पर ये लगता है कि अब स्टॉक ऊपर चलने के लिए तैयार है। 

अगर ऊपर की इस एनालिसिस को ध्यान में रखें और फिर अभी अभी आई इस खबर पर नजर डालें

इस बात की काफी संभावना है कि आप इस खबर को स्टॉक के लिए ऊपर की तरफ चलने का एक ट्रिगर मान लें और फिर ये मानें कि स्टॉक को खरीदने का आपका फैसला सही है। लेकिन, वास्तविकता में, कोई फंडामेंटल खबर स्टॉक के ऊपर चलने के लिए शायद एक अच्छा ट्रिगर ना हो। लेकिन आपका मन इसे सच मानता है क्योंकि वो ऐसी सूचनाओं की तलाश कर रहा होता है, जो आपकी राय को सही साबित कर सकें। दूसरे शब्दों में कहें तो, जब आप ट्रेड के लिए कोई राय बना लेते हैं तो फिर आप उसको समर्थन देने वाले समाचार और सूचनाओं को खोजने लगते हैं। आपका दिमाग उन घटनाओं या सूचनाओं की तरफ नहीं जाता जो कि आपकी राय से अलग हों। 

इस पूर्वाग्रह या बायस को कन्फर्मेशन बायस कहते हैं। 

इससे बचने का तरीका यही है कि आपको अपने फैसलों को एक आलोचक की नजर से देखें।

16.4 – एट्रीब्यूशन बायस 

कभी ना कभी ऐसा जरूरू हुआ होगा कि जब आपकी कोई एनालिसिस सही साबित हुई और आपको ट्रेड में फायदा हुआ तो आपको अपने आप पर गर्व महसूस हुआ हो। जैसे आपने कोई ऑप्शन खरीदा और वह 100% बढ़ गया या आपने कोई स्टॉक खरीदा और उसको कई गुना बढ़ते देखा। 

हर बार जब आप मुनाफा कमाते हैं तो आपको लगता है कि यह आपके स्मार्ट ट्रेडिंग आइडिया की वजह से हुआ है और आप अपनी पीठ ठोकते हैं। लेकिन जब आप नुकसान उठाते हैं, तो क्या होता है? तब आप क्या करते हैं? 

स्टॉक ब्रोकिंग के अपने अनुभव से मैं बता सकता हूं कि जब लोग नुकसान करते हैं तो वह इसके लिए ब्रोकर को या किसी दूसरे को दोषी ठहराते हैं। अपने आप को कभी दोषी नहीं मानते। हर ट्रेडर अपने किसी गलत सौदे के लिए किसी और को दोषी ठहराता है- कभी ब्रोकर को, कभी ब्रोकर के सिस्टम को, कभी चार्ट के ठीक से लोड ना होने को, कभी ऑर्डर के धीमा होने को। 

कारण कोई भी हो हर बार गलती किसी और की ही होती है, इसकी नहीं कि एनालिसिस ठीक नहीं थी। 

इस पूर्वाग्रह को एट्रीब्यूशन बायस (Attribution Bias) कहते हैं। इसका शिकार होकर लोग अपनी गलतियों का दोष किसी और के ऊपर मढ़ते हैं। इससे बचने का तरीका यह है कि हर बार जब आप ट्रेड का फैसला करें तो एक डायरी में उसके बारे में नोट करें कि आपने यह फैसला क्यों किया और आप यह ट्रेड क्यों ले रहे हैं। इसी तरह से जब ट्रेड बंद करें तब भी लिखें कि आपने ये फैसला क्यों किया। इसको पढ़कर धीरे-धीरे आपको पता चलने लगेगा कि आप अपने ट्रेडिंग के फैसले किस तरह से करते हैं।

16.5 – समाप्ति

ऐसे और बहुत सारे बायस हैं और इनकी सूची इतनी लंबी है कि सबको यहां पर डालना और उनके बारे में बात करना मुश्किल है। लेकिन हम यह कर सकते हैं कि जब भी किसी नए बायस के बारे में पता चले तो उस के बारे में मैं यहां पर लिखता रहूं। 

इसके साथ ही मैं रिस्क और ट्रेडिंग साइकॉलजी के इस मॉड्यूल को यहीं खत्म करता हूं। 

इस अध्याय की मुख्य बातें 

  1. एंकरिंग बायस काफी आम है – इस के असर में ट्रेडर और इन्वेस्टर सबसे पहले मिलने वाली सूचना से एक तरह से चिपक जाते हैं और उसी के हिसाब से फैसले करने लगते हैं। 
  2. एंकरिंग बायस की वजह से आप अच्छे मौके गंवा सकते हैं।
  3. फंक्शनल फिक्सेडनेस किसी भी टूल के इस्तेमाल के बारे में आपकी राय को सीमित कर देता है और आपको उसके बारे में नई कल्पना नहीं करने देता।
  4. फंक्शनल फिक्सेडनेस से बचने का एक ही तरीका है कि आप हमेशा नए-नए रास्ते तलाशते रहें। 
  5. कन्फर्मेशन बायस आपको उन सूचनाओं को खोजने या तलाश करने की ओर धकेलता है जो आपकी राय को समर्थन दे रहे हों। 
  6. ट्रेडिंग की दुनिया में ट्रेडर आमतौर पर अपनी गलती किसी दूसरी वजह पर डालते हैं और अपनी एनालसिस को कभी गलत नहीं मानते इसे एट्रीब्यूशन बायस कहते हैं।
  7. एट्रीब्यूशन बायस से बचने के लिए आप एक ट्रेडिंग जर्नल बना सकते हैं।

15 comments

  1. super learner says:

    DIL SE ABHAR ZERODHA TEAM GOD BLESS YOU AGE KE MODULE BHI JALDI HINDI ME LAIYE AB TOH LOCKDOWN BHI KHUL GAYAY H

    • Kulsum Khan says:

      हम उस पर काम कर रहे हैं, वह भी जल्द ही उपलब्ध कराया जायेगा ।

  2. raghvendra says:

    sir news source ke bare me batae market newss ke liye kya kare kon se newspaper pade kon si magzine pade and paid news souece kya hote he inko kese prapt kar sakte he
    sir me bahut choti si city se belong karta hu to online and offline dono source bataye kuyi ki jyada news paper hamare yaha nahi aate he

  3. raghvendra says:

    sir reliable paid and unpaid news source kon se hote he ,online and ofline dono tarah ke bare me bataye
    sir please reply soon

    • Kulsum Khan says:

      यह तोह आपको ऑनलाइन रिसर्च करना पड़ेगा, लेकिन फिनशॉट्स एक कमाल का एप्प और वेबसाइट है जहाँ सही मार्किट से जुडी न्यूज़ हर दिन पब्लिश की जाती है। इसका लिंक यहाँ पर है: https://finshots.in/

  4. Naresh says:

    Thx Zerodha…. For informative module provide in hindi….. Deep knowledge….. Next module hindi m kab tak a jayenge Sr

    • Kulsum Khan says:

      हम उस पर काम कर रहे हैं वह भी जल्द ही उपलब्ध कराया जायेगा।

  5. Rajkumar says:

    Thanks to team zerodha

  6. VINOD KUMAR RAWAT says:

    बहुत 2 धन्यवाद, अब मुझे पता चल गया कि मैं Gambler’s fallacy का शिकार था,

  7. adarsh says:

    great work. I am in a learning mode and this module helps me to work on risk management. thanks to all

  8. Manish says:

    Thanks you so much. Zerodha.

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