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Chapter 2

टेक्निकल एनालिसिस से परिचय

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2.1 -संक्षिप्त विवरण

पिछले अध्याय में हमने टेक्निकल एनालिसिस की परिभाषा को समझा। इस अध्याय में हम इसकी अवधारणाओं और इसके कुछ उपयोगिताओं को जानेंगे।

2.2- अलग अलग परिसंपत्ति यानी एसेट (Asset) में उपयोग 

टेक्निकल एनालिसिस की सब से खास उपयोगिता यह है कि किसी भी तरीके के एसेट क्लास में इसका उपयोग किया जा सकता है। शर्त सिर्फ एक है कि उस एसेट क्लास का पुराना ऐतिहासिक डाटा उपलब्ध हो। ऐतिहासिक डाटा का मतलब है कि उस ऐसेट का ओपन, हाई, लो, क्लोज (OHLC) और वॉल्यूम का डाटा मौजूद हो। 

इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। अगर आपने एक बार कार चलाना सीख लिया तो आप किसी भी तरीके की कार चला सकते हैं। इसी तरह से अगर आपने एक बार टेक्निकल एनालिसिस सीख लिया तो आप इसका इस्तेमाल शेयर ट्रेडिंग, कमोडिटी ट्रेडिंग, विदेशी मुद्रा ट्रेडिंग, फिक्स्ड इनकम प्रॉडक्ट, कहीं भी कर सकते हैं। 

किसी भी दूसरे तरीके की तकनीक के मुकाबले टेक्निकल एनालिसिस का यह सबसे बड़ा फायदा है। उदाहरण के तौर पर फंडामेंटल एनालिसिस में आपको हर शेयर का घाटा मुनाफा, बैलेंस शीट, कैश फ्लो जैसी तमाम चीजें देखनी पड़ती है जबकि कमोडिटी के एनालिसिस में इनमें से बहुत सारी चीजें काम नहीं आती। आपको नए तरीके का डाटा इस्तेमाल करना पड़ता है। 

अगर आप खेती से जुड़ी कमोडिटी जैसे कॉफी या काली मिर्च की फंडामेंटल एनालिसिस करना चाहते हैं, तो आपको मॉनसून, उपज या पैदावार, मांग, आपूर्ति, रखा हुआ माल जैसी तमाम चीजों के बारे में जानकारी जुटानी होगी। इसी तरीके से अगर धातु या मेटल के बारे में या एनर्जी से जुड़े कमोडिटी जैसे कच्चा तेल की फंडामेंटल एनालिसिस करना है, तो आपको अलग तरह का डाटा चाहिए होगा।

लेकिन हर एसेट क्लास की टेक्निकल एनालिसिस एक ही तरीके से ही की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर मूविंग एवरेज कन्वर्स डायवर्जेंस (MACD- moving average convergence divergence) या रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI-Relative Strength Index) को किसी भी ऐसेट क्लास जैसे इक्विटी कमोडिटी या करेंसी में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2.3- टेक्निकल एनालिसिस की अवधारणाएं

टेक्निकल एनालिसिस इस बात पर ध्यान नहीं देती कि कोई शेयर अंडरवैल्यूड यानी अपनी वास्तविक कीमत से सस्ता है या ओवरवैल्यूड यानी अपनी वास्तविक कीमत से महंगा है। टेक्निकल एनालिसिस में सिर्फ एक चीज का महत्व है और वह है शेयर का पुराना ट्रेडिंग डाटा और यह डाटा आगे आने वाले समय के बारे में क्या संकेत दे सकता है।

टेक्निकल एनालिसिस कुछ मूलभूत अवधारणाओं पर आधारित होती है, जिनके बारे में जानना जरूरी है:

 

  1. बाजार हर जरूरी चीज को कीमत में शामिल कर लेता है (Markets discount everything)-  ये अवधारणा हमें बताती है कि किसी शेयर से जुड़ी हर सूचना या जानकारी उस शेयर की बाजार कीमत में शामिल हो जाती है। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति अगर किसी शेयर को चुपचाप बाजार से खरीद रहा है क्योंकि शायद उसे पता है कि कंपनी का अगला तिमाही नतीजा अच्छा आने वाला है तब शेयर से मुनाफा होगा। वह व्यक्ति भले ही ये छुपा कर कर रहा हो लेकिन शेयर की कीमतों में इसका असर दिखने लगता है। एक अच्छा टेक्निकल एनालिस्ट शेयर के चार्ट पर इसको पहचान लेता है और वह इस शेयर को खरीदने के लिए उपयुक्त मानता है।
  2. “क्यों” से ज्यादा जरूरी है “क्या”यह अवधारणा पहली अवधारणा से ही मिली हुई है। हमारे पिछले उदाहरण में ही अगर देखें तो एक अच्छा टेक्निकल एनालिस्ट यह नहीं जानना चाहेगा कि उस व्यक्ति ने यह शेयर क्यों खरीदा? टेक्निकल एनालिस्ट का पूरा ध्यान इस बात पर होगा कि उस व्यक्ति के छुपा कर की गई खरीदारी से शेयर की कीमतों पर क्या असर हो रहा है और आगे क्या होगा?
  3. कीमत में एक चलन दिखता है (Price moves in trend)टेक्निकल एनालिसिस के मुताबिक कीमत में हर बदलाव एक खास ट्रेंड या चलन को बताता है। उदाहरण के तौर पर- निफ़्टी का 6400 से बढ़कर 7700 तक पहुंचना- एक दिन में नहीं हुआ। यह चलन 11 महीने पहले शुरू हुआ था। इसी से जुड़ी हुई एक दूसरी अवधारणा यह है कि जब एक तरफ की चाल शुरू होती है तो शेयर की कीमत भी उसी दिशा में बढ़ती जाती हैं, कभी उपर की तरफ तो कभी नीचे की तरफ।
  4. इतिहास अपने को दोहराता हैटेक्निकल एनालिसिस के मुताबिक कीमत का चलन अपने आप को दोहराता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बाजार के भागीदार एक तरीके की घटना पर हर बार एक ही तरीके की प्रतिक्रिया देते हैं। इसीलिए शेयर की कीमत एक ही तरीके से चलती हैं। उदाहरण के तौर पर ऊपर जा रहे बाजार में बाजार का हर खिलाड़ी किसी भी कीमत पर शेयर खरीदना चाहता है भले ही वह शेयर कितना भी महंगा हो। इसी तरीके से गिरते हुए बाजार में वह किसी भी कीमत पर बेचना चाहते हैं भले ही शेयर की कीमत अपनी वास्तविक कीमत से बहुत सस्ती हो। इंसान की इसी आदत की वजह से इतिहास अपने को दोहराता है।

2.4- बाजार पर नजर रखने का तरीका (The Trade Summary)

भारतीय शेयर बाजार सुबह 9:15 से 3:30 बजे तक खुले रहते हैं। इन 6.15 घंटों में लाखों ट्रेड होते हैं। किसी एक शेयर में भी हर मिनट कोई ना कोई सौदा हो रहा होता है। सवाल यह उठता है कि बाजार के भागीदार के तौर पर क्या हमें हर सौदे पर नजर रखनी चाहिए?

इसपर गहराई से नजर डालने के लिए हम एक काल्पनिक शेयर की बात करते हैं। नीचे के चित्र पर नजर डालिए, हर बिंदु एक ट्रेड को दिखलाता है। अगर हम हर सेकंड होने वाले वाले हर सौदे को इस ग्राफ पर दिखाएंगे तो इस ग्राफ में कुछ भी नहीं दिखेगा। इसलिए यहां केवल कुछ महत्वपूर्ण बिंदु ही दिखाए जा रहे हैं।

Daily Trade Pattern: दैनिक ट्रेड पैटर्न

बाजार सुबह 9 :15 बजे खुला और शाम के 3:30 बजे बंद हुआ। बाजार का रूख समझने के लिए, इस दौरान जितने भी ट्रेड हुए उन सब को देखने के बजाय उनका एक संक्षिप्त विवरण देख लेना ही काफी होगा।

अगर हम बाजार में ओपन यानी खुलने की कीमत, हाई यानी सबसे ऊंची कीमत,  लो यानी सबसे नीची कीमत और क्लोज यानी अंतिम कीमत को देखें तो हमें बाजार का एक मोटा-मोटी सार मिल जाएगा।

ओपन कीमत यानी खुलने के समय की कीमत: जब बाजार खुलता है तो उस समय होने वाले पहले ट्रेड या सौदे की कीमत ओपन कीमत होती है।

हाई यानी सबसे ऊँची कीमत: उस दिन जिस की सबसे ऊँची कीमत जिस पर कोई सौदा हुआ।

सबसे नीची कीमत यानी लो : दिन की वो सबसे नीची कीमत जिस पर सौदा हुआ।

बंद के समय कीमत यानी क्लोज: दिन के आखिरी सौदे में जो कीमत रही। ये कीमत काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे पता चलता है कि दिन में शेयर कितना मजबूत रहा। अगर बंद कीमत ऊपर है खुलने वाली कीमत से तो तेजी का दिन माना जाता है। इसी तरह अगर बंद के समय की कीमत अगर खुलने के समय की कीमत से नीचे रहे तो उसे मंदी का दिन माना जाता है।

क्लोज या बंद कीमत को अगले दिन के लिए संकेत के तौर पर भी देखा जाता है और इससे बाजार का मूड आंका जाता है। इसीलिए OHLC में C यानी क्लोज (Close) सबसे महत्वपूर्ण होता है।

टेक्निकल एनालिसिस में इन चारों कीमतों को देखा जाता है। इनको एक चार्ट पर डाल कर एनालिसिस की जाती है।

 


इस अध्याय की खास बातें

  1. टेक्निकल एनालिसिस में कोई बंधन नहीं है, इस का इस्तेमाल किसी भी एसेट क्लास में किया जा सकता है। 
  2. TA में कुछ खास अवधारणाएं होती हैं।
    1. बाजार की कीमत में सब जानकारियां शामिल होती हैं।
    2. “क्यों” से ज्यादा महत्वपूर्ण है “क्या”
    3. कीमत एक चलन का पालन करती है।
    4. इतिहास अपने को दोहराता है।
  3. दिन के कारोबार को संक्षेप में देखने के लिए OHLC अच्छा तरीका है।

 

11 comments

  1. Laxman kanojiya says:

    Sir bahot bahot dhanyawad
    Sir baki ke sare module hindi me uplabadh karaiye

  2. Vikas Tiwari says:

    Sir kya varsity se ta sikh. Intraday trading ker skte hai

  3. Vikas Tiwari says:

    Answer me sir please

    • Kulsum Khan says:

      Hi Vikas, हमने अपने वर्सिटी चैप्टर में हर संभव चीजों को कवर करने की कोशिश की है, यह अधिक उपयोगी होगा यदि आप वर्सिटी के सभी मॉड्यूल को पढ़ें। लेकिन ट्रेडिंग अप्रत्याशित हो सकती है, इसलिए बेहतर होगा कि आप एक निवेशक के रूप में अपना उचित परिश्रम करें।

  4. Deepak uppal says:

    Thanks ….very useful sir

  5. Abhilash Chandra says:

    Sir , Kripya pdf me sare module uplabdh karwayen..

    • Kulsum Khan says:

      हम उस पर काम कर रहे हैं, वह भी जल्द ही उपलब्ध होगा।

  6. Atulesh Kumar Sinha says:

    In english we only read, but in hindi we learn.
    A big thanks zerodha varsity hindi module team for educate me trading in stock market.

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