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Chapter 3

कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report) कैसे पढ़ते हैं?

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3.1 – वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report) क्या होती है?

हर कंपनी साल में एक बार वार्षिक रिपोर्ट छापती है और उसे अपने शेयरधारकों और दूसरे लोगों को भेजती है। वार्षिक रिपोर्ट एक वित्तीय वर्ष के अंत में छापी जाती है और उसमें दिया गया हर डेटा 31 मार्च के दिन तक का होता है। वार्षिक रिपोर्ट कंपनी की वेबसाइट पर इन्वेस्टर सेक्शन में एक पीडीएफ डॉक्यूमेंट (PDF Document)  के तौर पर मौजूद होती है और उसे डाउनलोड किया जा सकता है। वार्षिक रिपोर्ट की किताब पाने के लिए आप कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

चूँकि वार्षिक रिपोर्ट में दी गई है जानकारी कंपनी की तरफ से दी गई होती है इसलिए इसे आधिकारिक जानकारी माना जा सकता है और इसलिए अगर उसमें कोई गलती पाई जाए तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार माना जाता है। आपकी जानकारी के लिए यहाँ बताना जरूरी है कि कंपनी में वार्षिक रिपोर्ट में दिया गया वित्तीय डाटा कंपनी के ऑडिटर द्वारा प्रमाणित किया जाता है। 


कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट खासतौर पर नए निवेशकों और पुराने शेयरधारकों के लिए छापी जाती है। इसमें निवेशक के लिए जरूरी जानकारी दी जाती है। साथ ही, इसमें  कंपनी की तरफ से एक संदेश भी होता है। किसी निवेशक के पास एक कंपनी के बारे में जानकारी के लिए सबसे अच्छा स्त्रोत कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट ही होती है। वैसे बहुत सारी बिज़नेस वेबसाइट्स कंपनी के बारे में जानकारी देने का दावा करती हैं, लेकिन निवेशक को इनसे दूर रहना चाहिए क्योंकि कंपनी के द्वारा दी गई जानकारी पर ज्यादा भरोसा किया जा सकता है।


आप सोच रहे होंगे कि दूसरी मीडिया वेबसाइट गलत जानकारी क्यों देंगी? हो सकता है वो यह जानकारी जानबूझकर गलत ना दे रही हों, लेकिन इसकी कुछ और वजह भी हो सकती हैं, उदाहरण के तौर पर कंपनी मूल्यह्रास यानी डेप्रिसिएशन को अपने प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट के एक्सपेंस (Expense) साइड में दिखाती हैं लेकिन मीडिया वेबसाइट इसको किसी और हेड के अंदर दिखा सकती है इससे कंपनी के वित्तीय स्टेटमेंट पर वैसे तो सीधा कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन इसको देखने का तरीका बदल जाएगा ।

3.2 – वार्षिक रिपोर्ट में क्या देखना चाहिए? 


वार्षिक रिपोर्ट के अलगअलग हिस्सों में ऐसी बहुत सारी जानकारी होती है जिससे कंपनी के बारे में पता चलता है। इसको बहुत ही ध्यान से पढ़ना चाहिए क्योंकि कई बार कंपनी ऐसी जानकारी देती है जो मार्केटिंग के लिए रखी जाती है जबकि आपको तथ्यों पर नजर रखनी चाहिए।

चलिए वार्षिक रिपोर्ट के विभिन्न हिस्सों पर नजर डालते हैं और यह देखने की कोशिश करते हैं कि कंपनी उसमें क्या बताती है। आप को समझाने के लिए हमने यहां पर अमारा राजा बैटरीज लिमिटेड की 2013-2014 की वार्षिक रिपोर्ट को लिया है। जैसा कि आपको पता है कि अमारा राजा बैटरीज, ऑटो सेक्टर और इंडस्ट्रीयल सेक्टर के लिए बैटरी बनाती है। अमारा राजा बैटरीज के वित्त वर्ष 2014 की वार्षिक रिपोर्ट आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं। (http://www.amararaja.co.in/annual_reports)

याद रखें कि इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य आपको ये बताना है कि वार्षिक रिपोर्ट को कैसे पढ़ा जाता है। इसलिए यहां पर वार्षिक रिपोर्ट के हर पन्ने को पढ़ना जरूरी नहीं है और ना ही यह सही तरीका होगा, लेकिन हम आपको यहां यह बताने की कोशिश जरूर करेंगे कि इस रिपोर्ट को कैसे पढ़े? कौन सी जानकारी का उपयोग करें और कौन सी जानकारी को छोड़ दें?

ज्यादा अच्छे से समझने के लिए यह बेहतर होगा कि आप अमारा राजा बैटरीज की यह वार्षिक रिपोर्ट डाउनलोड कर लें और इस अध्याय में उसे हमारे साथ साथ साथ पढ़ने की कोशिश करें।

अमारा राजा बैटरीज की वार्षिक रिपोर्ट में 9 भाग हैं:

  • वित्तीय आंकड़ों का सारांश
  • मैनेजमेंट का वक्तव्य
  • मैनेजमेंट की चर्चा और समीक्षा
  • 10 साल की वित्तीय हाईलाइट 
  • कंपनी के बारे में जानकारी
  • डायरेक्टर की रिपोर्ट
  • कॉरपोरेट गवर्नेंस पर रिपोर्ट
  • वित्तीय हिस्सा
  • नोटिस

यहां पर आप ध्यान रखें कि कोई भी दो रिपोर्ट एक तरीके की नहीं होती। हर रिपोर्ट में कंपनी की जरूरतों के हिसाब से थोड़ा फेरबदल किया जाता है और कभी-कभी इंडस्ट्री के हिसाब से भी। लेकिन वार्षिक रिपोर्ट में कुछ हिस्से आमतौर पर एक जैसे होते हैं।

अमारा राजा बैटरी यानी ARBL की वार्षिक रिपोर्ट में सबसे पहला हिस्सा है-वित्तीय हाईलाइट का। वित्तीय हाईलाइट में कंपनी अपने पिछले 1 साल के कामकाज का संक्षिप्त लेखा-जोखा देती है। यह हिस्सा आमतौर पर ग्राफ़ या टेबल के जरिए दिखाया जाता है। इस हिस्से में कंपनी के कामकाज के पिछले कई सालों की तुलना भी होती है।

वित्तीय हाईलाइट कुछ ऐसा दिखता है:

वित्तीय हाईलाइट के इस भाग में आप जो भी आंकड़े देख रहे हैं, वह कंपनी के वित्तीय स्टेटमेंट से उठाए गए हैं। इसके अलावा कंपनी यहां पर कुछ वित्तीय रेश्यो भी डाल सकती है जिनकी गणना कंपनी ने खुद की होती है। मैं इसको सरसरी तौर पर देखता हूं और इसमें बहुत ज्यादा समय नहीं लगाता हूं। ऐसा मैं इसलिए करता हूं क्योंकि इन रेश्यो की गणना मैं ख़ुद अपने आप करता हूं। ऐसा करने से मुझे कंपनी के कामकाज का सही आकलन मिलता है। अगले कुछ अध्याय में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि कंपनी के वित्तीय स्टेटमेंट को कैसे पढ़ा जाता है और फाइनेंशियल रेश्यो कैसे निकाले जाते हैं?

इसके बाद के दो भाग हैं – मैनेजमेंट स्टेटमेंट और मैनेजमेंट डिस्कशन एंड एनालिसिस। यह दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मैं इन दोनों को पढ़ने में काफी समय गुजारता हूं। यहां पर आपको पता चलता है कि कंपनी अपने कामकाज के बारे में और इंडस्ट्री के बारे में क्या सोचती है और उसका क्या कहना है। एक निवेशक के तौर पर यहां कही गई हर बात आपकी लिए महत्वपूर्ण होती है। खासकर वह बातें जो हमने अध्याय 2 में कंपनी की गुणवत्ता के बारे में बताई थी।

मैनेजमेंट का वक्तव्य (जिसको चेयरमैन का संदेश भी कहते हैं) का हिस्सा निवेशक को एक परिपेक्ष देता है जिसके आधार पर वह यह जान सकता है कि कंपनी का सबसे ऊंचा अधिकारी अपने बिजनेस के बारे में क्या सोच रहा है। यह बहुत ही आधारभूत जानकारी होती है, लेकिन यह बताती है कि कंपनी का बिजनेस किस जगह पर है और यह कहां जा सकता है। जब मैं इसको पढ़ता हूं तो मैं यह देखने की कोशिश करता हूं कि कंपनी का वक्तव्य कितना तार्किक और तर्कसंगत है? यहां यह भी पता चलता है कि कंपनी को इंडस्ट्री के हालात की सही जानकारी है भी या नहीं? कंपनी इस धंधे को ठीक से समझती है या नहीं? इसके अलावा मैं यह भी देखता हूं कि कंपनी ने जो गलतियाँ की है या जो चीजें सही की है उसको बताने में कम्पनी कितनी ईमानदारी बरत रही है।

यहां पर मुझे एक जानी मानी चाय कंपनी के चेयरमैन के संदेश की याद आती है जिसको मैंने उनकी वार्षिक रिपोर्ट में पढ़ा था। उस संदेश में चेयरमैन ने कहा था कि कंपनी की आय 10% की रफ्तार से बढ़ेगी, लेकिन उनका पूरा पिछला डेटा यह बताता था कि कंपनी की आय कभी भी 4 5% से ज्यादा नहीं रही थी, ऐसे  में 10% की रफ्तार से आमदनी बढ़ने का दावा करना, एक हवाई दावा था। यह साफ था कि कंपनी के सबसे बड़े अधिकारी को बाजार की सही स्थिति की जानकारी नहीं थी। इसलिए मैंने उस कंपनी में निवेश न करने का फैसला किया। बाद में , मैंने जब अपने इस फैसले की समीक्षा की तो मुझे लगा कि मेरा फैसला सही था।

अब नीचे अमारा राजा बैटरीज लिमिटेड के वार्षिक रिपोर्ट पर मैनेजमेंट के संदेश पर नजर डालिए।  मैंने एक हिस्से को हाईलाइट किया है जो मुझे बहुत ही रोचक लगता है। आप इस पूरे मैसेज को पढ़िए:

इसके बाद अगला हिस्सा आता है वह मैनेजमेंट डिस्कशन एंड एनालिसिस (Management Discussion and Analysis) यानी मैनेजमेंट की चर्चा और समीक्षा का । मेरे हिसाब से वार्षिक रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही होता है। आमतौर पर कंपनियां इस हिस्से की शुरुआत अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालात से करती हैं। वो बताती हैं कि देश में आर्थिक कारोबार कैसा चल रहा है बिजनेस का माहौल कैसा है और कंपनियां किस तरीके से सोच रही हैं? अगर कंपनी का कारोबार एक्सपोर्ट से जुड़ा है तो कंपनियां कई बार विश्व की अर्थव्यवस्था और कारोबार के माहौल की भी चर्चा करती हैं।

क्योंकि ARBL का कामकाज घरेलू बाजार के साथ-साथ एक्सपोर्ट से भी जुड़ा हुआ है इसलिए कंपनी ने इन दोनों ही दृष्टिकोण की चर्चा अपनी वार्षिक रिपोर्ट में की है। कृपया नीचे का चित्र देखिए:

भारतीय अर्थव्यवस्था पर ARBL की राय:

इसके बाद कंपनी आमतौर पर इंडस्ट्री के ट्रेंड की चर्चा करती है और यह बताने की कोशिश करती है कि कंपनी को आगे का भविष्य कैसा दिख रहा है। यहां हमें यह पता चलता है कि कंपनी को आने वाले समय में क्या-क्या मौके दिख रहे हैं और क्या खतरे नजर आ रहे हैं। मैं इसको बहुत ध्यान से पढ़ता हूं और फिर इसकी तुलना कंपनी का मुकाबला कर रही दूसरी कंपनियों से करता हूं। इससे मुझे यह पता चलता है कि कंपनी अपने विरोधियों के मुकाबले मजबूत है या कमजोर है।

उदाहरण के तौर पर अगर अमारा राजा बैटरी में मेरा निवेश है या में निवेश करना चाहता हूं तो मैं इस हिस्से को ध्यान से पढ़ूँगा और इसके साथ-साथ एक्साइड बैटरीज लिमिटेड के वार्षिक रिपोर्ट में भी इसी हिस्से को पढ़ कर दोनों की तुलना करूंगा।


वार्षिक रिपोर्ट के इस हिस्से यानी मैनेजमेंट डिस्कशन और एनालिसिस के हिस्से तक कंपनी एक व्यापक नजरिया बता रही होती है। इसके बाद कंपनी अपने धंधे के बारे में बात करती है। वो बताती है कि कारोबार कैसा चल रहा है, अलग-अलग हिस्से कंपनी के लिए क्या काम कर रहे हैं, पिछले साल की तुलना में उनका कामकाज कैसा चल रहा है। कंपनी इस हिस्से में आंकड़े भी देती है। 

एक नजर डालिए:

कुछ कंपनियां अपने अलग अलग हिस्सों के लिए आने वाले साल के लिए रणनीति और दिशानिर्देश पर भी यहाँ चर्चा करती हैं । नीचे नज़र डालिए:

कंपनी की चर्चा और समीक्षा के बाद वार्षिक रिपोर्ट में कई और छोटी-छोटी रिपोर्ट होती हैं, जैसे ह्यूमन रिसोर्स रिपोर्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट रिपोर्ट, टेक्नोलॉजी रिपोर्ट (Human resource report, Research and development report, Technology report) आदि। कंपनी जिस इंडस्ट्री में काम कर रही होती है उसके लिहाज से यह सारी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती हैं। उदाहरण के तौर पर अगर मैं एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ रहा हूं तो ह्यूमन रिसोर्स रिपोर्ट में मुझे यह जानने को मिलेगा कि कंपनी में लेबर को लेकर कोई समस्या तो नहीं है। यदि ऐसी कोई भी समस्या है तो ये कंपनी के कारखाने यानी फैक्ट्री को बंद करा सकती है और ये कंपनी के निवेशकों के लिए अच्छी खबर नहीं होगी।

3.3 –वित्तीय स्टेटमेंट

वार्षिक रिपोर्ट का अंतिम हिस्सा कंपनी के वित्तीय स्टेटमेंट होता है। आप शायद समझते ही होंगे कि वित्तीय स्टेटमेंट ही वार्षिक रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। वित्तीय स्टेटमेंट के तीन भाग होते हैं।

  1. प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट (The profit and loss statement)
  2. बैलेंस शीट (The Balance Sheet)
  3. कैश फ्लो स्टेटमेंट (The Cash flow statement)

हम अगले कुछ अध्ययनों में इन तीनों को विस्तार से समझेंगे लेकिन यहां यह जानना जरूरी है कि वित्तीय स्टेटमेंट दो तरीके से पेश किए जाते हैं 

  1. स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट या स्टैंडअलोन आंकड़े (Standalone financial statement)
  2. कन्सॉलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट या कंसोलिडेटेड आंकड़े (Consolidated financial statement)

स्टैंडअलोन आंकड़ों और कंसोलिडेटेड आंकड़ों का अंतर समझने के लिए हमें कंपनी के ढांचे को समझना होगा। 

एक अच्छी और बड़ी कंपनी के बहुत सारे छोटे-छोटे सब्सिडियरी या डिवीजन हो सकते हैं। कई बार कंपनियां दूसरी कंपनियों की होल्डिंग कंपनी के तौर पर भी काम करती हैं। इसको ठीक से समझाने के लिए मैं क्रिसिल लिमिटेड के शेयर होल्डिंग ढांचे पर नजर डालता हूं। यह आपको क्रिसिल की वार्षिक रिपोर्ट में भी मिल जाएगा। शायद आपको पता ही हो कि क्रिसिल एक भारतीय कंपनी है जो दूसरी कंपनियों को क्रेडिट रेटिंग देने के धंधे में है।

जैसा कि आप शेयर होल्डिंग पैटर्न में ऊपर देख सकते हैं:

  1. अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग कंपनी स्टैंडर्ड एंड पुअर (Standard and Poor- S&P) के पास क्रिसिल के 51% शेयर हैं। इस तरह यहां S&P एक होल्डिंग कंपनी या प्रमोटर है। 
  2. बाकी बचा हुआ 49% हिस्सा पब्लिक या दूसरे वित्तीय संस्थानों के पास है।
  3. लेकिन  S&P ख़ुद एक दूसरी कंपनी McGraw-Hill कंपनीज की 100% सब्सिडियरी है।
    1. इसका मतलब यह हुआ कि  S&P का मालिकाना McGraw-Hill  के पास है और क्रिसिल का 51% प्रतिशत हिस्सा S&P के पास है 
  4. क्रिसिल ख़ुद एक कंपनी इरेवना (Irevna) की मालिक है (100% हिस्सेदारी है)

अब इस पर दी गई जानकारी के आधार पर एक स्थिति की कल्पना करते हैं। मान लीजिए वित्त वर्ष 2014 में क्रिसिल ने 1000 करोड़ का नुकसान किया और इसकी 100% सब्सिडियरी इरेवना ने 700 करोड़ का फायदा किया। अब क्रिसिल का कुल मुनाफा कितना हुआ?

बहुत आसान है क्रिसिल ने 1000 करोड़ का नुकसान किया जबकि इसकी सब्सिडी इरेवना ने 700 करोड़ का फायदा किया यानी क्रिसिल का कुल P&L (-1000 करोड़) + 700 करोड़ = 300 करोड़

आपने देखा कि अपनी कंपनी के सब्सिडियरी के मुनाफे की वजह से क्रिसिल का कुल घाटा सिर्फ 300 करोड़ रह गया जबकि उसे 1000 करोड़ का नुकसान हो रहा था। इसी को अगर आप स्टैंडअलोन बेसिस पर देखेंगे तो क्रिसिल को 1000 करोड़ का नुकसान हुआ जबकि कंसोलिडेटेड बेसिस पर क्रिसिल का नुकसान सिर्फ़ 300 करोड़ का ही हुआ।

इसका मतलब यह है कि इस स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट में कंपनी के अपने नतीजे ही दिखाए जाते हैं। इसमें इसकी सब्सिडी के आंकड़े नहीं होते जबकि कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट में कंपनी के सारे नतीजे, उसकी सब्सिडियरी सहित दिखाए जाते हैं। 

मुझे कंपनी के कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट को देखना बेहतर लगता है क्योंकि यह कंपनी की पूरी वित्तीय हालत को सही-सही बताता है।

3.4 – फाइनेंशियल स्टेटमेंट का शेड्यूल/ सूची/ कार्यक्रम सारणी

जब कंपनी अपना फाइनेंशियल स्टेटमेंट देती है तो वह शुरू में संक्षिप्त स्टेटमेंट देती है और बाद में उसका पूरा विस्तार दिया जाता है।

यहां आप ARBL का फाइनेंशियल स्टेटमेंट (बैलेंस शीट) देख सकते हैं :

फाइनेंशियल स्टेटमेंट की हर अलग-अलग जानकारी को लाइन आइटम कहते हैं। उदाहरण के तौर पर बैलेंस शीट (इक्विटी और लायबलिटी के तहत) में पहला लाइन आइटम शेयर कैपिटल (हरे रंग के तीर से दिखाया गया) है। आप को दिख रहा होगा कि यहां पर एक नोट नंबर शेयर कैपिटल से जोड़ा गया है इसको शेड्यूल कहते हैं जो फाइनेंशियल स्टेटमेंट से जुड़े होते हैं । ARBL के स्टेटमेंट को देखने के बाद शेयर कैपिटल 17.081 करोड़ दिख रहा है। एक निवेशक के तौर पर मैं जानना चाहूंगा कि ARBL ने 17.081 करोड़ की गणना कैसे की ? इसे जानने के लिए मुझे कंपनी के एसोसिएटेड शेड्यूल नोट नंबर 2 में देखना होगा। नीचे का चित्र देखिए:

अगर आप नए हैं तो आपको फाइनेंशियल स्टेटमेंट की कई चीजें जैसे शेयर कैपिटल का मतलब नहीं समझ में आएगा। लेकिन वैसे फाइनेंशियल स्टेटमेंट को समझना काफी आसान होता है। अगले कुछ अध्याय में हम इसको समझने और इसको पढ़ने की तरीका बताएंगे। अभी सिर्फ यह याद रखिए कि फाइनेंशियल स्टेटमेंट आपको एक संक्षिप्त विवरण देता है जबकि एसोसिएटेड शेड्यूल आपको उसकी विस्तृत जानकारी देता है।

इस अध्याय की मुख्य बातें

    1. कंपनी अपने निवेशकों से संवाद करने के लिए वार्षिक रिपोर्ट जारी करती है।
    2. कंपनी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा स्त्रोत वार्षिक रिपोर्ट होता है इसलिए हर निवेशक को सबसे पहले इसे पढ़ना चाहिए।
    3. वार्षिक रिपोर्ट में कई हिस्से होते हैं जो बिजनेस से जुड़ी  अलग-अलग चीज के बारे में बात कर रहे होते हैं। 
    4. कंपनी की गुणवत्ता के बारे में जानने के लिए वार्षिक रिपोर्ट एक बहुत अच्छा स्रोत होता है।  
    5. मैनेजमेंट डिस्कशन एंड एनालिसिस यानी मैनेजमेंट की चर्चा और समीक्षा कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें देश की अर्थव्यवस्था के बारे में मैनेजमेंट का नज़रिया, इंडस्ट्री कैसा करेगी और आगे आने वाला समय कैसा रहेगा – ये सारी बातें होती हैं। साथ ही इसमें ये भी बताया जाता है कि कंपनी ने क्या गलत किया और क्या सही।
    6. वार्षिक रिपोर्ट में 3 फाइनेंशियल स्टेटमेंट होते हैं प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट, बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट।
    7. स्टैंडअलोन स्टेटमेंट में सिर्फ कंपनी के वित्तीय आंकड़े दिखाई देते हैं जबकि कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट में कंपनी और इसकी सभी सब्सिडियरी के आंकड़े होते हैं।

14 comments

  1. Rohit Bhalerao says:

    I want to manual in hindi related with share markets i.e. how to interpret share up and down status

  2. Gogy singh says:

    Superb sir

  3. VINOD RAWAT says:

    माननीय महोदय, आपने बहुत सरल ढंग से बहुत ही बढ़िया नोट उप्लब्ध कराये है, इसके लिये दिल से धन्यवाद।

  4. Avinash Padale says:

    गलत: “आज”
    3.3 –वित्तीय स्टेटमेंट
    वार्षिक रिपोर्ट का अंतिम हिस्सा कंपनी के वित्तीय स्टेटमेंट होता है। “आज” शायद समझते ही होंगे कि वित्तीय स्टेटमेंट ही वार्षिक रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

    सही: “आप”
    3.3 –वित्तीय स्टेटमेंट
    वार्षिक रिपोर्ट का अंतिम हिस्सा कंपनी के वित्तीय स्टेटमेंट होता है। “आप” शायद समझते ही होंगे कि वित्तीय स्टेटमेंट ही वार्षिक रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

    • Kulsum Khan says:

      सूचित करने के लिए धन्यवाद। हमने इसको सही करदिया है।

  5. Vijay Singh says:

    Very very informative this article, but 😔 Companies do not release reports in Hindi।

  6. Fazil says:

    जैसे कि जी एस टी रिटर्न फाइल करने की आख़िरी तारीख़ हर महीने की बीस तारीख़ होती है
    क्या उसी तरीके से हर कंपनी को भी अपना तिमाही रिटर्न सेबी को देने की भी कोई आखिरी डेट होती है
    जिससे किसी को भी यह पता चल सके कि कब कम्पनी का तिमाही रिटर्न आने वाला है।

    • Kulsum Khan says:

      हाँ कंपनी के लिए भी लास्ट डेट रेतुर्न फाइल करने का होता है लेकिन यह पब्लिक को बताया नहीं जाता रिटर्न्स या किसी भी कॉर्पोरेट एक्शन का पब्लिक में कंपनी अपने हिसाब से पब्लिक के लिए ऐलान करती हैः।

  7. Nitish Chandra says:

    बहुत अच्छा जानकारी मिला मुझे सभी चैप्टर का हिंदी वर्शन चाहिए

    • Kulsum Khan says:

      आपका धन्यवाद बाकि के मोड्यूल्स भी जल्द ही उपलब्ध कराये जाएंगे।

  8. Arbaz khan says:

    Mam apne jo isme link diya hai amara raja us per click karne ke baad annual reports khulta hi nahi

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