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Chapter 13

इक्विटी रिसर्च (भाग 1)

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13.1 –  क्या उम्मीद रखें?

अब हम इक्विटी रिसर्च  करने का तरीका सीखेंगे। याद रखिए कि हमारे और आपके जैसा आम आदमी जब इक्विटी रिसर्च करता है तो उसको यह काम सीमित साधनों से करना होता है। इक्विटी रिसर्च करने के लिए साधनों में हमारे पास इंटरनेट, कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट और माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल ही होंगे। यही इक्विटी रिसर्च जब कोई कंपनी या संस्था करती है तो उसके पास इस काम  के लिए एक अलग से इंसान होता है,उसे कंपनी से मैनेजमेंट से बात करने का मौका मिलता है, कई तरीके के वित्तीय डाटा जैसे इंडस्ट्री की रिपोर्ट आदि उपलब्ध होते हैं जिसे वह ब्लूमबर्ग, रॉयटर्स या ऐसी दूसरी किसी कंपनी से पैसे देकर खरीदती है। तो हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि अपने सीमित साधनों से कैसे ज्यादा से ज्यादा बेहतर तरीके से यह काम करें और किसी कंपनी के शेयर को खरीदने का फैसला अच्छे से तरीके से कर सकें। 

हम इक्विटी रिसर्च को तीन अलग-अलग चरणों में बाटेंगे।

 

  1. बिजनेस को समझना
  2. चेक लिस्ट के हिसाब से जाँचना
  3. कंपनी की वैल्यूएशन करना जिससे शेयर की सही कीमत पता चल सके

 

इनमें से हर चरण में कई कदम होंगे जो हमें उठाने होंगे। इसके लिए कोई शॉर्टकट  नहीं है।

13.2 – शेयर की कीमत vs बिजनेस की सेहत

जिस भी कंपनी को रिसर्च के लिए चुनते हैं, तो सबसे पहले उस कंपनी के बिजनेस को जितना ज्यादा समझ सके उतना बेहतर होगा। ज्यादातर लोग सीधे कंपनी के स्टॉक की कीमत के विश्लेषण में लग जाते हैं। अगर शॉर्ट टर्म यानी कम वक्त के नज़रिए से आप सीधे स्टॉक प्राइस के विश्लेषण में घुसते हैं, तो फिर भी ठीक है लेकिन लंबे नज़रिए के हिसाब से कंपनी के बिजनेस को समझना बहुत ज़रूरी है। 

आप सोच रहे होंगे कि ये इतना ज़रूरी क्यों है? वजह बहुत साफ है, अगर आप कंपनी के करोबार के बारे में अच्छे से जानेंगे, तो बेयर मार्केट यानी मंदी के दौर में आप स्टॉक की कीमत को लेकर परेशान नहीं होंगे। याद रखिए कि मंदी के बाज़ार में कीमत बदलती है, या कह सकते हैं कि प्रतिक्रिया करती है, कंपनी का मूलभूत बिजनेस नहीं। अगर आप कंपनी और उसके बिजनेस को जानेंगे और समझेंगे तो आपके पास गिरते बाज़ार में भी स्टॉक में बने रहने की ठोस वजहें होंगी। कहते हैं बेयर मार्केट में शेयर खरीदने के मौके बनते हैं, तो अगर आप कंपनी के बारे में अच्छे से जानते हैं, कंपनी के मूलभूत कारोबार पर आपको विश्वास है तो आप गिरते बाज़ार में और स्टॉक खरीदेंगे ना कि बेचेंगे। ये कहना यहां ज़रूरी है कि इस दृष्टिकोण को सही तरह से अमल में लाने में काफी वक्त लग सकता है। 

खैर, किसी भी कंपनी के बिजनेस से जुड़ी जानकारी पाने का सबसे बढ़िया स्त्रोत है कंपनी की वेबसाइट और उसकी वार्षिक रिपोर्ट। हमें कम से कम पिछले 5 साल के वार्षिक रिपोर्ट को पढ़ना चाहिए, ये समझने के लिए कि कंपनी अलग अलग बिजनेस साइकिल यानी आर्थिक चक्र में किस तरह से विकसित हुई है। 

13.3 – बिजनेस या कारोबार को समझना Understanding the Business

बिजनेस को समझने के लिए हमें सबसे पहले कुछ सवालों की सूची या लिस्ट बनानी होगी, जिसका जवाब हमें ढूंढ़ना है। नोट कीजिए कि इन सारे सवाल के जवाब कंपनी की वेबसाइट और वार्षिक रिपोर्ट में मिल जाएगी। 

नीचे सवालों की सूची है जो हमें बिजनेस को समझने में मदद करेगी। हर सवाल के पीछे के तर्क को भी मैंने बताया है। 

 

क्रमांक

सवाल

सवाल का तर्क

1 कंपनी काम क्या करती है? बिजनेस की हालत को समझने के लिए
2 कंपनी के प्रमोटर्स कौन हैं और उनका बैकग्राउंड क्या है?  ये पता करने के लिए कि कोई आपराधिक रिकार्ड तो नहीं है, कोई राजनीतिक संबंध तो नहीं है
3 कंपनी क्या मैन्यूफैक्चर (उत्पाद) करती है? (अगर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है तो) कंपनी के उत्पाद को जानने से ये पता चलता है कि बाजार में माँग कितनी है और सप्लाई कितनी?
4 कंपनी के कितने कारखाने हैं और कहां-कहां हैं? इससे पता चलता है कि कंपनी किन जगहों पर मौजूद है। साथ ही, अगर कंपनी के कारखाने बहुत महंगे इलाकों में हैं तो इनकी कीमत भले ही बैलेंश शीट पर ना दिख रही हो लेकिन ये कंपनी को काफी मूल्यवान बनाने वाली जानकारी है।
5 क्या सारे कारखाने पुरी उत्पादन क्षमता के साथ काम कर रहे हैं? कामकाज की क्षमता का पता लगता है, ये भी पता चलता है कि माँग बढ़ने पर कंपनी उसे पूरा कर पाएगी या नहीं
6 उत्पादन के लिए लिए किस तरह के कच्चे माल की ज़रूरत होती है? कंपनी के कच्चे माल को सरकार नियंत्रित तो नहीं करती, कंपनी का कच्चा माल आयात तो नहीं करना होता? इससे कंपनी के करोबार पर असर पड़ सकता है।
7 कंपनी का माल कौन खरीदता है, या कंपनी के क्लायंट कौन हैं?  इससे कंपनी के बिजनेस साइकिल का पता चलता है,ये भी पता चलता है कि माल बेचने में कितना मुश्किल है।
8 कंपनी के प्रतिद्वंदी कौन हैं? अगर कई प्रतिद्वंदी हैं तो कंपनी के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। अगर कम हैं तो कंपनी का मार्जिन लंबे समय तक बना रह सकता है। 
9 कंपनी के महत्वपूर्ण शेयरहोल्डर कौन-कौन हैं? अगर कुछ बड़े और सफल निवेशकों ने कंपनी में निवेश कर रखा है तो ये अच्छा संकेत है
10 क्या कपंनी नया प्रोडक्ट लांच करने वाली है? इससे कंपनी के इरादे और नया करने की इच्छा का पता चलता है। अगर कंपनी अपनी कुशलता वाले क्षेत्र से हट कर नया उत्पाद ला रही है तो कंपनी के फोकस पर सवाल उठ सकता है
11 क्या कंपनी की विदेशों में विस्तार करने की योजना है? इससे कंपनी के इरादे और नया करने की इच्छा का पता चलता है। अगर कंपनी अपनी कुशलता वाले क्षेत्र से हट कर नया उत्पाद ला रही है तो कंपनी के फोकस पर सवाल उठ सकता है
12 कंपनी का रेवेन्यू मिक्स (revenue mix)क्या है?कौन सा प्रोडक्ट सबसे ज्यादा बिकता है? पता चलता है कि किस उत्पाद से कंपनी सबषे ज्यादा कमा रही है। इससे कंपनी के भविष्य का अंदाजा लगता है।
13 क्या कंपनी काफी ज्यादा नियंत्रण वाले कारोबार में है? ये अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। नियंत्रण अधिक होने का मतलब है कि नया प्रतिद्वंदी आसानी से नहीं आ सकता। लेकिन ज्यादा नियंत्रण कंपनी के आगे कुछ नया करने की क्षमता को कम करता है।
14 उनके बैंकर्स और ऑडिटर्स कौन हैं? इससे ये पता चलता है कि कंपनी में किसी गड़बड़ी की संभावना कितनी है।
15 कंपनी में कितने कर्मचारी है? कंपनी में श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़ी समस्या तो नहीं है?  पता चलता है कि कंपनी कर्मचारियों और उनकी कुशलता पर कितनी निर्भर है। अगर किसी खास कुशलता के कर्मचारियों की जरूरत है तो ये कंपनी के लिए एक खतरा बन सकता है।
16 इंडस्ट्री में नए खिलाड़ी के आने में क्या क्या बाधाएं या रुकावटें हैं? पता चलेगा कि कंपनी के सामने नए प्रतिद्वन्दी का आना कितना आसान या मुश्किल है
17 क्या कंपनी का प्रोडक्ट बहुत आसनी से दूसरे देशों में बनाया जा सकता है, जहाँ श्रम सस्ता हो? अगर हाँ, तो कंपनी कभी भी मुश्किल में पड़ सकती है
18 क्या कंपनी की बहुत सारी सब्सिडियरी यानी सहायक कंपनी है? यदि हाँ, तो ये सवाल जरूरी है कि इसकी जरूरत है या नहीं? कहीं कंपनी ने पैसे का घालमेल करने के लिए तो ऐसा नहीं किया है?

इन सवालों के जरिए आपको कंपनी के बारे में समझने में मदद मिलेगी। इन सवालों को पूछते और इनका जवाब ढूंढते हुए आपके दिमाग में कई और नए सवाल आएंगे जिनका जवाब आप को ढूंढना होगा। अगर आप इनका जवाब सही तरीके से ढूंढ पाएंगे तो अब कंपनी को अच्छे से जान सकेंगे। याद रखिए यह इक्विटी रिसर्च का पहला चरण है, अगर आपको इसी चरण में खतरे के संकेत दिखाई पड़ेंगे तो उस कंपनी पर आगे काम करने की जरूरत नहीं है भले ही कंपनी कितनी भी आकर्षक क्यों ना लग रही हो। 

मैं अपने अनुभव से बता सकता हूं कि किसी भी एक कंपनी के इक्विटी रिसर्च के पहले चरण में कम से कम 15 घंटे लगते हैं। इसके बाद मैं सारी जरूरी चीजों को एक पन्ने पर लिख लेता हूं। यह जानकारी बहुत ही सोची समझी और फोकस वाली होनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो यह मान लीजिए कि कंपनी के बारे में अभी आपको पूरी जानकारी नहीं है। पहला चरण पूरा होने के बाद ही मैं इक्विटी रिसर्च के दूसरे चरण की और बढ़ता हूं। 

अब हम इक्विटी रिसर्च के दूसरे चरण की तरह बढ़ेंगे। इसको समझने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि किसी एक कंपनी को हम अपनी चेकलिस्ट के आधार पर जाँचें। 

हमने पहले अमारा राजा बैटरी के बारे में बात की है, अच्छा होगा कि हम उसी कंपनी पर अपनी चेक लिस्ट को लगाएं और जाँचें। आप यह चेक लिस्ट किसी भी कंपनी का लगाकर उस कंपनी को जाँच सकते हैं

 बस याद रखिए कि हम यहां ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे कि चर्चा और बातचीत ARBL के इर्द-गिर्द रहेगी, ताकि हमें इस कंपनी को अच्छे से समझ सकें। कंपनी अच्छी है या बुरी, यहाँ ये मुद्दा नहीं है, बल्कि आपको उस ढांचे से अवगत कराना है जिसके ज़रिए आप इक्विटी रिसर्च की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी कर सकते हैं।

13.4 – चेकलिस्ट का उपयोग

इक्विटी रिसर्च का पहला चरण हमें किसी भी कारोबार का कैसे, क्या, कौन और क्यों समझने में मदद करता है। इस तरह हम कंपनी के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए एक संपूर्ण नजरिया बना पाएंगे। लेकिन इसके बाद जितना कारोबार आकर्षित लगता हो, कारोबार के नंबर्स भी उतने ही आकर्षक लगने चाहिए। 

इक्विटी रिसर्च के दूसरे चरण का उद्देश्य कि हमें नंबर्स को समझने में मदद मिले और हम ये आंक या जांच सके कि कंपनी जिस तरह का काम करती है और उसका फाइनेंशियल परफॉरमेंस दोनों एक दूसरे के पूरक है या नहीं।  अगर ये एक दूसरे के पूरक नहीं हैं तो हम मानेंगे कि कंपनी में निवेश करने के लिए जो गुण चाहिए, वो नहीं है। 

हमने पिछले अध्याय में चेकलिस्ट को देखा था। उसे एक बार फिर से देखते हैं। 

क्रम सं कौन सा आंकड़ा टिप्पणी क्या बताता है
1 नेट प्रॉफिट में बढत  कुल या ग्रॉस प्रॉफिट से मेल खाती हुई  आमदनी में भी प्रॉफिट के साथ बढत
2 EPS नेट प्रॉफिट के साथ EPS भी बढ़ना चाहिए अगर कंपनी अपने इक्विटी शेयर बढ़ा रही है तो ये शेयरधारकों लिए अच्छा नहीं है।
3 ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन (GPM) > 20% ज्यादा बड़ा मारजिन बताता है कि कंपनी के पास एक अच्छा खासा मोट (खाई) है
4 कर्ज का स्तर कंपनी कर्ज में डूबी नहीं होनी चाहिए अधिक कर्ज का मतलब है कि कंपनी अच्छी हालत में नहीं है फाइनेंस कॉस्ट भी ऊपर होगा और इससे कंपनी की कमाई कम होगी।
5 इन्वेंटरी मैन्यूफैक्चरिंग करने वाली कंपनियों के लिए इन्वेंटरी और PAT का साथ में बढ़ना अच्छा संकेत है। इन्वेंटरी नंबर ऑफ डेज जरूर चेक करें
6 सेल्स Vs रिसीवेबल्स रिसीवेबल्स के रास्ते बिक्री बढ़ना अच्छा नहीं है इससे पता चलता है कि कंपनी सिर्फ कमाई दिखाने के लिए जबरदस्ती बिक्री बढा रही है
7 ऑपरेशन से कैश फ्लो पॉजिटिव होना चाहिए अगर कंपनी के ऑपरेशन यानी करोबार से कैश नहीं आ रहा तो ये ऑपरेशन पर दबाव का संकेत है
8 रिटर्न ऑन इक्विटी >25% ROE, जितना ऊपर होगा निवेशक के लिए उतना बेहतर होगा लेकिन कर्ज का स्तर चेक कर लें

अब हम चेकलिस्ट के सारे बिन्दुओं को अमारा राजा बैटरीज लिमिटेड के संदर्भ में जांचेंगे। सबसे पहले देखते हैं P&L आइटम – ग्रास प्रॉफिट, नेट प्रॉफिट और कंपनी का EPS 

रेवेन्यू और PAT ग्रोथ – Revenue & Pat Growth

किसी भी कंपनी के निवेश योग्य होने के कस का सबसे पहला संकेत होता है कि वह कंपनी बढ़ रही है यानी उसमें ग्रोथ हो रही है। यहां पर बढ़ने का मतलब यह होता है कि कंपनी की आमदनी बढ़ रही है और उसका PAT भी बढ़ रहा है। इसको हम दो नजरिए से देखते हैं – 

  1. साल दर साल बढ़त (Year on Year Growth)- इससे हमें पता चलता है कि कंपनी में हर साल कितनी बढ़त हो रही है। कई बार कंपनी किसी बिजनेस साइकिल की वजह से भी नहीं बढ़ पाती है। इसलिए आपको यह देखना है कि कंपनी में किस तरह की बढ़त हो रही है। कई बार कंपनी की बढ़ोतरी बहुत कम होती है या साल दर साल बढ़ती नहीं है। ऐसे में आप यह जरूर चेक करें कि कंपनी के बाकी प्रतिद्वंदी या इंडस्ट्री में किस तरीके की बढ़ोतरी हो रही है अगर वहां भी ऐसी ही बढ़ोतरी है तो कंपनी की बढ़ोतरी सही मानी जाएगी।
  2. कम्पॉउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (Compounded Annual Growth Rate-CAGR) – इससे हमें पता चलता है कि कंपनी बिजनेस साइकिल नीचे होने के बावजूद भी बढ़ पा रही है या नहीं। बिजनेस साइकिल नीचे होने के बावजूद बढ़ने वाली कंपनी निवेश के योग्य सबसे अच्छी कंपनियों में से मानी जाती है। यह बढ़त CAGR में दिखाई देती है।

व्यक्तिगत तौर पर मैं ऐसी कंपनियों में निवेश करना पसंद करता हूं जिनकी आमदनी और PAT 15% CAGR की रफ्तार से बढ़ती है। 

एक बार नजर डालते हैं  कि ARBL कैसा कर रही है …

FY 09 -10 FY 10-11 FY 11-12 FY 12 -13 FY 13 – 14
रेवेन्यू/आमदनी (करोड़ रु.) 1481 1769 2392 3005 3482
आमदनी में बढ़त (Revenue Growth) 19.4% 35.3% 25.6% 15.9%
PAT (करोड़ रु) 167 148 215 287 367
PAT में बढ़त  (11.3%) 45.2% 33.3% 27.8

5 साल की आमदनी में CAGR 18.6% और 5 साल की PAT में CAGR 17.01% की बढ़त दिख रही है। यह आंकड़े बहुत अच्छे दिख रहे हैं। लेकिन इनको हमें अपनी चेक लिस्ट के दूसरे पैमानों पर भी चेक करना होगा। 

प्रति शेयर कमाई – Earnings per Share (EPS)

अर्निंग पर शेयर या अर्निंग प्रति शेयर हमें बताता है कि कंपनी हर शेयर पर कितना  मुनाफा कमा रही है। अगर EPS और PAT एक रफ्तार से बढ़ रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि कंपनी ने अपने शेयरों की संख्या नहीं बढ़ा दी है जो कि एक अच्छी बात है। इससे यह पता चलता है कि कंपनी का मैनेजमेंट अच्छा है।

FV Rs.1 FY 09 -10 FY 10-11 FY 11-12 FY 12 -13 FY 13 – 14
EPS (रुपये) 19.56 17.34 12.59 16.78 21.51
शेयर कैपिटल (करोड़ रुपये) 17.08 17.08 17.08 17.08 17.08
EPS ग्रोथ/बढ़त   – -11.35%  – 27.39% 33.28% 28.18%

 

 5 साल का EPS 1.90% CAGR से बढ़ रहा है। 

ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन – Gross Profit margins

ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन हमेशा प्रतिशत में दिखाया जाता है। इसको निकालने का फार्मूला है 

ग्रॉस प्रॉफिट / नेट सेल्स

यहाँ ग्रॉस प्रॉफिट = नेट सेल्स –  बेची गई वस्तुओं की कीमत – तैयार वस्तुओं की कीमत 

Gross Profits = [Net Sales – Cost of Goods Sold]

असल में तैयार वस्तुओं की कीमत वह रकम है जो कंपनी के उत्पाद बनाने में खर्च हुई है। इसको निकालने का तरीका हमे इन्वेंटरी टर्नओवर रेश्यो निकालने के समय देखा था। आइए देखते हैं कि ARBL का ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन कैसा रहा है।

करोड़ रुपये में FY 09-10 FY 10-11 FY 11-12 FY 12 -13 FY 13 – 14
नेट सेल्स 1464 1757 2359 2944 3404
COGS 1014 1266 1682 2159 2450
ग्रॉस प्रॉफिट 450 491 677 785 954
ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन 30.7% 27.9% 28.7% 26.7% 28.0%

यहां पर कंपनी का ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन बहुत अच्छा दिख रहा है। हमारी चेकलिस्ट के हिसाब से कंपनी का ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन कम से कम 20% होना चाहिए।  ARBL का ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन इससे काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि 

  1. ARBL के प्रतिद्वंदी काफी कम है इसलिए कंपनी का मार्जिन काफी ऊपर है। 
  2. कंपनी काफी अच्छे से काम कर रही है  और मैनेजमेंट भी काफी अच्छे से काम कर रहा है जिसकी वजह से कंपनी का मार्जिन ऊपर है। 

कर्ज का लेवल – बैलेंस शीट चेक (Debt level – Balance Sheet check)

चेकलिस्ट के पहले तीन बिंदु कंपनी के प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट से जुड़े हुए थे। अब हम ऐसी बिंदुओं पर नजर डालेंगे जो बैलेंस शीट से जुड़े हुए हैं। बैलेंस शीट में देखने वाली सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक होती है – कंपनी का कर्ज़। यह जितना ज्यादा होगा कंपनी के लिए उतनी ही बड़ी मुश्किल होगी। अगर एक कंपनी अपनी बढ़त के लिए ज्यादा कर्ज ले रही हो तो ये खतरनाक हो सकता है। ज्यादा कर्ज का मतलब है कि कंपनी का फाइनेंस कॉस्ट काफी ऊपर होगा जिससे कंपनी की रिटेन्ड अर्निंग कम हो जाएगी

ARBL का कर्ज –

कर्ज/Debt 91.19 95.04 84.07 87.17 84.28
EBIT 261 223 321 431 541
Debt/EBIT (%) 35% 42.61% 26.19% 20.22% 15.57%

कंपनी का कर्ज़ 85 करोड़ के आसपास है। अच्छी बात यह है कि कंपनी का कर्ज 2009-10 के मुकाबले नीचे आया है। इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो चेक करने के बाद मैं व्यक्तिगत तौर पर कंपनी के कर्ज को अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्सेस (EBIT) के प्रतिशत के रूप में चेक करना चाहता हूं। इससे पता चलता है कि कंपनी अपनी वित्तीय हालत कितने अच्छे से संभालती है। हम देख सकते हैं कि कंपनी का debt/ EBIT लगातार घट रहा है इसका मतलब है कि ARBL ने इस मामले में अच्छा काम किया है। 

Inventory Check इन्वेंटरी चेक

अगर कंपनी मैन्युफैक्चरिंग करती है यानी उत्पाद बनाती है तो इन्वेंटरी डेटा चेक करना चाहिए। इससे हमें कई बातें पता चलती है: 

  1. इन्वेंटरी बढ़ना और साथ में PAT का बढ़ना बताता है कि कंपनी बढ़ रही है 
  2. इन्वेंटरी नंबर ऑफ डेज का स्थिर रहना हमें बताता है कि कंपनी अपने कारोबार को ठीक ढंग से चला रही है।

ARBL के इन्वेंटरी के डेटा को देखते हैं

FY 09-10 FY 10-11 FY 11-12 FY 12 -13 FY 13 – 14
इन्वेंटरी ( करोड़ रु) 217.6 284.7 266.6 292.9 335.0
इन्वेंटरी डेज 68 72 60 47 47
PAT (करोड़ रु) 167 148 215 287 367

कंपनी का इन्वेंटरी नंबर ऑफ डेज स्थिर है। वास्तव में यह थोड़ा नीचे भी जा रहा है। इन्वेंटरी नंबर ऑफ डेज को निकालना हमने पिछले अध्याय में सीखा था। कंपनी इन्वेंटरी और PAT साथ में बढ़ रहे हैं जो कि एक अच्छा संकेत है ।

सेल्स vs रिसीवेबल्स Sales vs Receivables

अब हम कंपनी के बिक्री के आंकड़ों को देखेंगे। इन आंकड़ों को से रिसीवेबल्स के साथ देखा जाएगा। कंपनी के सेल्स यानी बिक्री अगर रिसीवेबल्स के साथ बढ़ रही है तो यह अच्छा संकेत नहीं है। इसका मतलब है कि कंपनी अपना माल क्रेडिट पर बेच रही है और जिसकी वजह से कई सवाल उठ सकते हैं। कंपनी के कर्मचारी जबरदस्ती माल तो नहीं बेच रहे हैं? कंपनी कहीं मुफ्त में क्रेडिट तो नहीं दे रही है?

FY 09-10 FY 10-11 FY 11-12 FY 12-13 FY 13-14
कुल बिक्री 1464 1758 2360 2944 3403
रिसीवेबल 242.3 305.7 319.7 380.7 452.6
रिसीवेबल – प्रतिशत में 16.5% 17.4% 13.5% 12.9% 13.3%

कंपनी का ये आंकड़ा भी स्थिर दिख रहा है। ऊपर के चार्ट को देखने से पता चलता है कि कंपनी की ज्यादातर बिक्री रिसीवेबल्स की वजह से नहीं है। वास्तव में इन्वेंटरी नंबर ऑफ डेज की तरह रिसीवेबल्स भी नेट सेल्स के प्रतिशत के तौर पर गिर रहा है जो कि अच्छी बात है। 

कारोबार से नकद या कैश फ्लो Cash flow from Operations

किसी कंपनी में निवेश करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज जो देखनी होती है वह है ऑपरेशंस यानी कारोबार से आने वाला कैश फ्लो। कंपनी को अपने ऑपरेशन से अच्छा कैश फ्लो बनाना चाहिए। जो कंपनी अपने ऑपरेशंस में कैश गंवा रही हो वह एक बहुत ही बुरी हालत में है।

करोड़ रुपये में FY 09-10 FY 10-11 FY 11-12 FY 12-13 FY 13-14
ऑपरेशन से कैश फ्लो 214.2 86.1 298.4 335.4 278.7

यहां कैश फ्लो थोड़ा सा ऊपर नीचे होता दिख रहा है फिर भी यह पिछले 5 साल में लगातार पॉजिटिव बना हुआ है। मतलब कंपनी का बिजनेस ठीक-ठाक चल रहा है और कैश पैदा कर रहा है यानी कंपनी सफल है

रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity- ROE)

हमने इसी मॉड्यूल के अध्याय 9 में रिटर्न ऑन इक्विटी पर विस्तार से बात की है। मैं चाहूंगा कि आप एक बार फिर से उसे पढ़ लें। ROE बताता है कि कंपनी ने शेयरधारकों के लिहाज से कितना प्रतिशत मुनाफा कमा कर दिया है। एक तरह से ये बताता है कि प्रमोटर्स ने अपना पैसा लगा कर कितना कमाया है। 

ABRL के पिछल पांच साल के ROE को नीचे दिखाया गया है- 

करोड़ रुपये में FY 09-10 FY 10-11 FY 11-12 FY 12-13 FY 13-14
PAT 167 148 215 287 367
शेयरहोल्डर इक्विटी 543.6 645.7 823.5 1059.8 1362.7
ROE 30.7% 22.9% 26.1% 27.1% 27.0%

ऊपर दिए गए ROE के नंबर काफी अच्छे हैं। मैं खुद उन कंपनियों में निवेश करना पसंद करता हूं जिनका ROE 20 परसेंट से ऊपर हो। 

निष्कर्ष

याद रखिए कि हम इक्विटी रिसर्च के दूसरे चरण में हैं। ARBL दूसरे चरण में ज़रूरत के सभी मापदंडों पर खरा उतरा है। अब एक इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर आपको दूसरे चरण के आउटपुट को पहले चरण में जुटाई गई जानकारी के संदर्भ में रख कर देखना है। दोनों चरणों के बाद अगर आप तथ्यों के आधार पर कंपनी के बारे में पॉजिटिव राय बना पा रहे हैं, तो कंपनी में वो गुण मौजूद है जो इसे निवेश करने के लायक बनाती है। 

हालांकि स्टॉक खरीदने से पहले ये चेक कर लें कि कीमत सही है। और हम यही काम इक्विटी रिसर्च के तीसरे चरण में करते हैं। 

इस अध्याय की मुख्य बातें

  1. इक्विटी रिसर्च “लिमिटेड रिसोर्स” 3 चरणों में किया जा सकता है

    1. कारोबार को समझना
    2. चेकलिस्ट के ऐप्लिकेशन से
    3. वैल्युएशन 
  2. पहले चरण का उद्देश्य है – कंपनी के बिजनेस को समझना और उसके लिए ज़रूरी जानकारी जुटाना। और इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है- Q&A तरीका यानी सवाल-जवाब का तरीका। 
  3. Q&A तरीके में, हम सरल और स्पष्ट सवालों से शुरूआत करते हैं और उसके जवाब ढूंढ़ते हैं। 
  4. पहले चरण के अंत तक हमारे पास कारोबार से जुड़ी सभी जानकारी होनी चाहिए। 
  5. पहले चरण में जितने भी जवाब की हमें तलाश होती है, उसमें से ज्यादातर कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट और वेबसाइट पर मिल जाएगी। 
  6. पहले चरण में ही अगर कभी भी किसी जानकारी पर आपको संदेह हो, या फिर यकीन ना हो तो रिसर्च वहीं पर रोक देना बेहतर होगा। 
  7. पहले चरण में बहुत ज़रूरी है कि आपकी जुटाई हुई जानकारी से आपका कंपनी के ऊपर दृढ़ विश्वास हो। यही विश्वास आपको मंदी के वक्त स्टॉक में बने रहने की वजह देगा। 
  8. इक्विटी रिसर्च के दूसरे चरण में  आपको कंपनी के परफॉरमेंस को अलग-अलग मापदंडो पर जांचना है। 
  9. और ज़ाहिर सी बात है कि पहले दो चरण को पूरा करने के बाद ही आप तीसरे चरण की तरफ बढ़ पाएंगे।

4 comments

  1. Ranjeet dey says:

    GIVE STUDY MATERIAL OF OPTION IN HINDI

  2. VINOD RAWAT says:

    क्या सारे कारखाने पुरी उत्पादन क्षमता के साथ काम कर रहे हैं?
    अब हम इक्विटी रिसर्च के दूसरे चरण की तरह बढ़ेंगे।

    तो उस कंपनी को पर आगे काम करने की जरूरत नहीं है भले ही कंपनी कितनी भी आकर्षक क्यों ना लग रही हो।
    सर ऊपर दिए गये वाक्यो में क्रमशः पूरी व तरफ एवं को की कोई आवश्यकता नही पड़ रही है।

    • Kulsum Khan says:

      सूचित करने के लिए धन्यवाद, हमने इसे सही कर दिया है।

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