Module

Chapter 8

शेयर बाज़ार में प्रयोग होने वाले शब्द

53

इस चैप्टर में आपको उन शब्दों का मतलब समझाया जाएगा जिनका इस्तेमाल शेयर बाज़ार के जानकार लोग लगातार करतें हैं। 

बुल मार्केट (तेजी): अगर किसी को लगता है कि बाजार ऊपर जाएगा और शेयरों की कीमत बढ़ेगी तो कहा जाता है कि वो तेजी में है। अगर एक तय समय में बाजार लगातार ऊपर की तरफ जाता रहता है तो कहा जाता है कि बाजार बुल मार्केट में है, या फिर बाज़ार में तेजी का माहौल है।  

बेयर मार्केट (मंदी):  तेजी के माहौल का ठीक उल्टा मंदी का माहौल होता है। अगर आपको लगता है कि आने वाले समय में बाजार नीचे की तरफ जाएगा तो कहा जाता है कि आप उस स्टॉक को लेकर बेयरिश (Bearish) हैं। इसी तरह जब एक लंबे समय तक बाजार नीचे की तरफ जा रहा होता है तो कहा जाता है कि बाजार बेयर मार्केट में है।

ट्रेंड:  बाजार की दिशा और उस दिशा की ताकत को ट्रेंड कहा जाता है । उदाहरण के लिए, अगर बाजार  तेजी से नीचे जा रहा है तो कहते हैं कि बाजार में गिरावट का ट्रेंड है या अगर बाजार ना उपर जा रहा है ना अधिक नीचे तो उसे “साइडवेज” या दिशाहीन ट्रेंड कहा जाता है। 

शेयर की फेस वैल्यू: किसी शेयर की तय कीमत को फेसवैल्यू या “पार वैल्यू” कहते हैं। इसे कंपनी तय करती है और ये उनके कॉरपोरेट फैसलों के लिए महत्वपूर्ण होता है, जैसे डिविडेंड देने या स्टॉक स्प्लिट करने के समय कंपनी शेयर की फेस वैल्यू को ही आधार बनाती है। उदाहरण के लिए, अगर इन्फोसिस के शेयर की फेस वैल्यू 5 रूपए है और कंपनी ने 65 रूपए का सालाना डिविडेंड दिया तो इसका मतलब है कि कंपनी ने 1260% डिविडेंड दिया। (65÷5)

52 हफ्तों की ऊँचाई/निचाई (52 week high/low) :  52 हफ्ते की ऊँचाई का मतलब है कि स्टॉक की पिछले 52 हफ्तों में सबसे ऊँची कीमत। इसी तरह 52 हफ्तों  की निचाई मतलब सबसे निचली कीमत 52 हफ्तों में। 52 हफ्तों की ऊँची या नीची कीमत स्टॉक की कीमत का दायरा बताता है। जब कोई स्टॉक अपने 52 हफ्तों की ऊँचाई के करीब होता है तो कई लोग ऐसा मानते हैं कि स्टॉक तेजी में रहने वाला है, इसी तरह जब स्टॉक अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर के करीब होता है तो ऐसा माना जाता है कि स्टॉक मंदी में रहने वाला है। 

पूरे वक्त की ऊँचाई/निचाई (All time high/ low): ऑल टाइम हाई और ऑल टाइम लो भी 52 हफ्तों की ऊँचाई या निचाई की तरह स्टॉक की कीमत बताता है, फर्क सिर्फ इतना है कि ऑल टाइम हाई या लो किसी स्टॉक के बाजार में लिस्ट होने के बाद से अब तक की सबसे ऊँची कीमत या नीची कीमत बताता है। 

अपर सर्किट/लोअर सर्किट (Upper Ciruit / Lower circuit): स्टॉक एक्सचेंज हर स्टॉक के लिए कीमत की एक सीमा तय कर देते हैं। एक ट्रेडिंग दिन में स्टॉक की कीमत उस सीमा के बाहर नहीं जाने दी जाती है, ना ऊपर की तरफ और ना ही नीचे की तरफ। ऊपरी कीमत की सीमा को अपर सर्किट और कीमत की निचली सीमा को लोअर सर्किट कहते हैं। स्टॉक की सर्किट की सीमा 2%, 5%, 10%, या 20% में से कुछ भी हो सकती है जो एक्सचेंज अपने नियमों के हिसाब से तय करते हैं। एक्सचेंज सर्किट का इस्तेमाल स्टॉक में जरूरत से ज्यादा उतार चढ़ाव को काबू में रखने के लिए करते हैं ताकि किसी खबर की वजह से स्टॉक में बहुत ज्यादा गिरावट या तेजी ना आए।

लाँग पोजिशन (Long Position):  लाँग पोजीशन या लाँग होना आपके सौदे यानी ट्रेड की दिशा बताता है। उदाहरण के तौर पर अगर आपने बायोकॉन के शेयर खरीदे हैं या खरीदने वाले हैं तो आप बायोकॉन पर लाँग हैं। अगर आपने निफ्टी इंडेक्स इस उम्मीद पर खरीदा है कि इंडेक्स ऊपर जाएगा तो आपकी इंडेक्स पर लांग पोजीशन है। अगर आपकी किसी स्टॉक या इंडेक्स पर लाँग पोजीशन है तो आपको तेजी वाला ट्रेडर या बुलिश (Bullish) माना जाएगा।

शॉर्ट पोजिशन (Short Position): “शॉर्ट करना” या “शॉर्ट पोजीशन” एक खास तरह के ट्रेड या सौदे को बताता है। इसे समझाना थोड़ा मुश्किल है इसलिए इसे समझाने के लिए मैं एक घटना बताता हूँ जो मेरे ऑफिस में घटी। 

आपको शायद पता हो कि चीन की एक मोबाइल बनाने वाली कंपनी शाओमी ने फ्लिपकार्ट से अपने Mi3 फोन बेचने का एक एक्सक्लूसिव समझौता किया था। उम्मीद की जा रही थी इस फोन की कीमत 14000 रूपए के आसपास होगी। इस फोन को खरीदने के लिए आपको अपने आप को फ्लिपकार्ट पर रजिस्टर करना था क्योंकि बिना रजिस्ट्रेशन के ये फोन नहीं मिलता। रजिस्ट्रेशन बहुत कम समय के लिए खुला था। मैंने फोन खरीदने के लिए जल्दी से रजिस्ट्रेशन करा लिया, लेकिन मेरा दोस्त राजेश रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाया। 

राजेश को भी ये फोन चाहिए था इसलिए उसने मुझे एक ऑफर दिया। उसने कहा कि वो मुझसे ये फोन 16,500 में खरीदने को तैयार है। एक पक्का ट्रेडर होने के नाते मैंने फट से ये सौदा मंजूर कर लिया और उससे पैसे भी ले लिए। 

उसके बाद मुझे लगा कि मैंने ये क्या कर दिया? मैंने एक ऐसा फोन राजेश को बेच दिया जो मेरे पास अभी है ही नहीं। 

वैसे ये सौदा बुरा नहीं था, मुझे बस ये करना था कि फोन फ्लिपकार्ट पर खरीदते ही उसी समय राजेश को देना था। लेकिन मुझे डर एक ही था कि चूंकि फोन की कीमत अभी तक घोषित नहीं थी , ऐसे में अगर फोन की कीमत 16500 से ज्यादा निकली तो मैं क्या करूंगा? अगर फोन 18000 का मिला तो मुझे राजेश के साथ किए गए सौदे में 18000-16500=1500 का नुकसान हो जाएगा। 

लेकिन किस्मत अच्छी थी कि ऐसा नहीं हुआ, फोन की कीमत 14000 निकली। मैंने जल्दी से फोन फ्लिपकार्ट पर खरीदा और राजेश को दे दिया। और मुझे 16500-14000 = 2500 का फायदा हो गया। 

अब आप घटनाक्रम देखिए, मैंने पहले फोन बेचा जो मेरे पास था ही नहीं, बाद में फ्लिपकार्ट से खरीदा और राजेश को दिया। यानी बेचा पहले और खरीदा बाद में। 

इस तरह के सौदे ही शॉर्ट ट्रेड या शॉर्ट सौदे कहे जाते हैं।

चूंकि हम अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी में ऐसा नहीं करते इसलिए ये थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन ट्रेडर के लिए ये एक मौका होता है।

अब चलते हैं शेयर बाजार की तरफ , मान लीजिए एक दिन आपने विप्रो के शेयर 405 रूपए पर खरीदे और दो दिन बाद 425 पर बेच दिए। आपने इस सौदे में 20 रूपए कमा लिए। आपने पहले 405 पर विप्रो खरीदने का सौदा किया और बाद में 425 पर बेचने का सौदा किया। ऐसा आपने इसलिए किया क्योंकि विप्रो पर आप तेजी में थे यानी बुलिश (Bullish) थे,  आपको शेयर के दाम बढ़ने की उम्मीद थी।

अब मान लीजिए चौथे दिन आप विप्रो पर बेयरिश (Bearish) हैं और गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं, शेयर अभी भी 425 पर ही है लेकिन आपको लगता है कि कुछ ही दिनों में ये शेयर 405 पर आ जाएगा। अब आप पैसा कैसे कमाएंगे? ऐसे मौके पर ही शार्ट ट्रेड किया जाता है। आप 425 पर बेचेंगे और मान लीजिए दो दिनों के बाद शेयर का दाम 405 पर आता है तो उस वक्त शेयर फिर से खरीदेंगे। 

तो, आपने पहले 425 पर बेचा और बाद में 405 पर खरीदा। शॉर्टिंग (shorting) या शॉर्ट करने में हमेशा ऐसा ही होता है जब कीमत ऊपर हो तो आप बेचते हैं और नीचे आने पर खरीदते हैं।

तो आपने अपने पहले दिन वाला ही सौदा किया- 405 पर खरीदा और 425 पर बेचा,  लेकिन इस बार सौदा उल्टी दिशा मे हुआ। 

एक सवाल आपके दिमाग में उठ सकता है- जब विप्रो का शेयर मेरे पास है ही नहीं तो उसको बेचेंगे कैसे? लेकिन वास्तव में आप उसे बेच सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मैंने वो फोन बेचा जो मेरे पास था ही नहीं। 

वास्तव में, जब आप खरीदने के पहले बेचते हैं तो आप एक तरह से शेयर उधार ले रहे होते हैं और बाद में जब खरीदते हैं तो उस उधार को चुकाते हैं। एक्सचेंज आपको सुविधा देता है कि आप उधार पर शेयर बेच सकें और बाद में शेयर खरीद कर शेयर का उधार चुका सकें। 

तो कुल मिला कर,

  1. जब आप शॉर्ट करते हैं तो आपका नजरिया मंदी का होता है। शेयर या इंडेक्स नीचे जाने से आपको फायदा होता है। शॉर्ट करने के बाद भाव ऊपर जाने से आपको नुकसान होगा।
  2. जब आप शॉर्ट करते हैं तो बाजार का कोई दूसरा भागीदार आपको शेयर उधार दे रहा होता है, बस आपको बाद में शेयर दे कर उधार चुकाना होता है। लेकिन ये सब बैकएंड (Backend) सिस्टम में होता है।
  3. शॉर्ट करना काफी आसान होता है, बस आपको अपने ब्रोकर को फोन कर के शेयर को शॉर्ट करने को कहना होता है। या फिर आप खुद ऑनलाइन जा कर, शेयर चुनकर बेचने का सौदा कर सकते हैं। 
  4. अगर आप शॉर्ट करना टाहते हैं और शॉर्ट पोजीशन कुछ दिनों तक रखना चाहते हैं, तो बेहतर ये होगा कि ये सब वायदा बाजार (Derivative Market) में किया जाए।
  5. शॉर्ट करने वाले को कीमत नीचे जाने पर फायदा होता है और कीमत ऊपर जाने पर नुकसान। 
पोजीशन पहला सौदा दूसरा सौदा उम्मीद पैसा बनेगा जब पैसा डूबेगा जब
लाँग खरीदना बेचना तेजी शेयर ऊपर जाएगा शेयर नीचे जाएगा
शॉर्ट बेचना खरीदना मंदी शेयर नीचे जाएगा शेयर ऊपर जाएगा

स्कवेयर ऑफ (Square off) : स्कवेयर ऑफ का मतलब होता है कि आप अपनी पोजीशन खत्म करना चाहते हैं। अगर आप लाँग पोजीशन बना कर बैठे हैं तो आप स्कवेयर ऑफ करने के लिए शेयर बेच देते हैं। यहां आप शॉर्ट नहीं कर रहे अपने पास मौजूद पोजीशन को बेच रहे हैं। 

जब आप शॉर्ट पोजीशन को स्क्वेयर ऑफ करते हैं तो आप शेयर खरीदते हैं। यहां आप खरीद कर लाँग पोजीशन नहीं बना यहे हैं बल्कि आप शेयर खरीद कर शॉर्ट पोजीशन खत्म कर रहे हैं।

जब आप स्क्वेयर ऑफ करने पर
लाँग हैं शेयर बेचेंगे
शॉर्ट हैं शेयर खरीदेंगे

 

इन्ट्रा डे पोजीशन (Intra day position): जब आप ऐसी पोजीशन बनाते हैं जिसे आप उसी दिन स्क्वेयर ऑफ करना चाहते हैं तो ऐसी पोजीशन को इन्ट्रा डे पोजीशन कहते हैं। 

OHLC : ओ एच एल सी का मतलब है ओपन हाई लो क्लोज। इसके बारे में आप विस्तार से टेक्निकल एनालिसिस के मॉड्यूल में जानेंगे। अभी बस इतना समझ लीजिए कि शेयर का ओपन प्राइस यानी वो जहां खुला, जिस ऊँचाई तक उसकी कीमत गयी यानी हाई, जहाँ तक कीमत नीचे गयी यानी लो और बाजार बंद होते वक्त जो कीमत थी यानी क्लोज। जैसे 17 जून 2014 के दिन ACC का OHLC था 1486, 1511, 1467 और 1499। 

वॉल्यूम (Volume): किसी शेयर का वॉल्यूम किसी एक दिन उस शेयर में हुए कुल सौदों (बेचने और खरीदने दोनों) में शेयरों की संख्या को कहते हैं।  वॉल्यूम और शेयर कीमत पर इसके असर को समझना बहुत ज़रूरी है और इसे आप टेक्निकल एनालिसिस के मॉड्यूल में ज्यादा विस्तार से समझेंगे। 

मार्केट सेगमेंट (Market Segment):  बाजार के अलग अलग सेगमेंट होते है जिनमें अलग अलग तरह के वित्तीय सौदे होते हैं। सेगमेंट को रिस्क और रिवार्ड के आधार पर अलग अलग किया जाता है। एक्सचेंज में तीन मुख्य सेगमेंट होते हैं। 

  1. कैपिटल मार्केट (Capital Market) – इस सेगमेंट में शेयर, प्रेफरेंस शेयर, वारंट और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड वगैरह खरीदे और बेचे जाते हैं। इस सेगमेंट को और हिस्सों में बाँटा जाता है। जैसे आम शेयरों को इक्विटी सेगमेंट में बेचा खरीदा जाता है। इस सेगमेंट को EQ निशान से पहचाना जा सकता है। अगर आप शेयरों को कैपिटल मार्केट सेगमेंट में खरीद बेच सकते हैं।
  2. फ्यूचर और ऑप्शंस (Futures and Options): फ्यूचर और ऑप्शंस सेगमेंट को शेयर वायदा बाजार कहते हैं। इस सेगमेंट में लीवरेज्ड प्रॉडक्ट के सौदे होते हैं। इस सेगमेंट को डेरिवेटिव माड्यूल में विस्तार से समझाया जाएगा।
  3. होलसेल डेट मार्केट (Whole sale debt market): बाजार के इस सेगमेंट में फिक्स्ड इन्कम प्रॉडक्ट के सौदे होते हैं, जैसे सरकारी या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, ट्रेजरी बिल्स, बॉन्ड्स और डिबेन्चर्स। 

53 comments

  1. Gogy singh says:

    I read chapter wise
    Simple and easy knowledge
    Best book or pdf for basic of stock market for beginners
    Tqsm
    Keep it up

  2. Uttam Rajpurohit says:

    Posted a very fundamentally and well developed syllabus or knowledge for beginners .
    Really getting something good and better
    Thanks a lot

  3. PRASHANT MAIL says:

    PLEASE TRANSLATE ALL MODULES IN MARATHI LANGUAGE ALSO..

    RESEARCH SAY’S ” LEARNING IN MOTHER TONGUE ADOPT A BETTER UNDERSTANDING..”
    IT WILL GREAT HELP TO US.. 🙂 🙂

  4. Prakash Jadhav says:

    Kindly correct the face value dividend calculation (63/5=1260 ) instead of (65/5=1260)

    • Kulsum Khan says:

      सूचित करने के लिए धन्यवाद हमने इसको सही करदिया है।

  5. ATULKUMARSINGH says:

    मैं एक अध्यापक हूँ। जब क्लासरूम से बाहर निकलता हूँ और स्टूडेंट कहते हैं थैंक यू सर मजा आ गया। सच में तब लगता है मेहनत करना सफल हो गया।
    आज आपका मैटर पढ़ के दिल से कह रहा हूँ मजा आ गया। शेयर मार्केटिंग के बेसिक जानने कि कोशिश कर रहा हूँ। और आपका मैटर कान्फिडेंस ला दिया। कृपया इसको जारी रखेें। धन्यवाद

    • Kulsum Khan says:

      आपके कृपालु शब्दों’न के लिए धन्यवाद, वर्सिटी पढ़ते रहिये और हमें सपोर्ट करते रहिये 🙂

  6. ATUL KUMAR SINGH says:

    आज जिरोधा में एकाउंट खोला हूँ।

  7. Amar Patil says:

    Hello sir,
    अगर मैंने कोइ एक शेअर सेल किया तो क्या वह मै कुछ दिनो तक होल्ड कर सकता हूँ…??

  8. Edward Pereira says:

    Very good

  9. Sanjay Pandurang Jagadale says:

    Thank you team zerodha

  10. Shanu sharma says:

    Sir kisi share ko hum kb tk hold kr skte hai…
    Kya Isme koi time limit hoti hai kya ya phir apni marzi se kabhi bhi trade kar skte hai?

  11. Mithun chauhan says:

    सर हम चाहते हैं कि हिंदी की सामग्री PDF में भी उपलब्ध हो ताकि इसको बिना नेट के भी पढ़ा जा सके कभी भी कहीं भी

    • Kulsum Khan says:

      हम उस पर काम कर रहे हैं, वह भी जल्द ही उपलब्ध कराया जायेगा।

  12. Balwant Singh Raghuwanshi says:

    What is the importance of moving average in share market kindly explain.

  13. omkar says:

    thank you for such great information for beginners…

  14. Rahul Gomase says:

    Achha kiya aapne hindi me course upload kiya…bhot achha lag raha padhne me…baki bache hue bhi lessons bhi hindi me upload kr dijiye….

  15. Sunil papal says:

    बहुत ही सरल भाषा में उदहारण के साथ! मैं आपका बहुतही आभारी हूं। Thank u sir..I have one query. प्रेफरेंस शेयर और वारंट क्या चीज़ है?

    • Kulsum Khan says:

      परेफरेंस शेयर एक ऐसा शेयर जो होल्ड करने वाले को एक निश्चित लाभ का डिविडेंड का हकदार बनाता है, जिसका भुगतान साधारण शेयर लाभ के डिविडेंड की तुलना से ज़्यादा प्राथमिकता लेता है।
      इक्विटी वारंट वे उपकरण होते हैं जो उपकरण के धारक को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्व निर्धारित मूल्य पर एक विशेष स्टॉक खरीदने का अधिकार प्रदान करते हैं।

  16. Kumar says:

    Very helpful knowledge is knowledge ke liye expert fees lete hai

  17. nihal says:

    varsity helping me to first invest in learning , each and every topics are explained in very simple manner to understand.
    varsity really adding value in my learning. thank you varsity keep it up.

  18. Saurabh says:

    thanks you so much for zerodha team for giving this great knowledge about share market and i am very happy to learn all modules
    again thanks

  19. Satya Narain Saini says:

    Sir,
    Very nice Hindi translation to understand.Thanks for the noble work.Please advise me,if you have any online learning course for fundamental knowledge?

    • Kulsum Khan says:

      Hi Satya, Varsity is the only educational blog we run. You may have to check online for fundamental knowledge. 🙂

  20. Ankit Yadav says:

    there should be a dividend of 63 in face value of share column as (63/5)*100=1260

  21. patel jay says:

    kya ham ak hi trading account se sare type ke trade kar sakte hai jaise ki intraday trading ,swing trading.etc …? ya fir alag alga account chahiye ?

    • Kulsum Khan says:

      जी हाँ आप एक ही अकाउंट से जितने चाहे और जैसे चाहे ट्रेड कर सकते हैं।

  22. Dhruv says:

    Now in Hindi language. It’s too good For everyone because these 2 Languages Known by Almost Indian and Zerodha Create a connection between All the Readers. Thanks Team Zerodha Varsity

  23. Negan says:

    As a student i can tell that this is an awesome source of knowledge. Thanks.

  24. RANJEET JAT says:

    नई निवेशक के लिए बहुत अच्छी जानकारी हैं अगर यह पीडीऍफ़ में उपलब्ध हो तो बहुत अच्छा
    थैंक्स टीम ज़ेरोधा

  25. Ashutosh says:

    Great and excellent tutorials for beginners…….. thanks Team Zerodha

  26. Stander Singh Rawat says:

    Thanks a lot to make it very simple and translate in Hindi, Big thanks to you and your team.
    many company educate people to invest in share market, but your efforts will definitely change the world.
    People like me fear to invest in the market because less or no knowledge of the market.
    I am quite sure once I will complete these modules, then I will start investing.
    once again thank you so much

  27. Shashikant More says:

    Wow…thats great Terminology… Thx..

  28. Yash Sharma says:

    Mem pls tell how I square off my delivery based position without sent p.o.a.

Post a comment